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    अयोध्या में राम मंदिर से चढ़ावा चोरी के आठों आरोपितों की आज पेशी, वीडियो कांफ्रेसिंग से होगी सुनवाई

    By Digital Desk Edited By: Dharmendra Pandey
    Updated: Mon, 29 Jun 2026 02:24 PM (IST)

    अयोध्या में अधिवक्ताओं के बढ़ते आक्रोश को देखते हुए कोर्ट प्रशासन ने दो बजे वीडियो कांफ्रेसिंग हॉल में सुनवाई का फैसला किया है। ...और पढ़ें

    पुलिस की गिरफ्त में आठों आरोपित- फाइल फोटो

    पुलिस की गिरफ्त में आठों आरोपित- फाइल फोटो

    HighLights

    1. अयोध्या में अधिवक्ताओं के बढ़ते आक्रोश को देखते हुए कोर्ट प्रशासन का फैसला

    2. चढ़ावा चोरी में एक अज्ञात और आठ नामजद के खिलाफ हुई है एफआईआर

    जागरण संवाददाता, अयोध्या। दुनिया भर में रामभक्तों की आस्था को आघात पहुंचाने वाले राममंदिर चढ़ावा चोरी के आठों आरोपितों की सोमवार को वीडियो कांफ्रेसिंग से सुनवाई के आसार हैं।

    अयोध्या में अधिवक्ताओं के बढ़ते आक्रोश को देखते हुए कोर्ट प्रशासन ने दो बजे वीडियो कांफ्रेसिंग हॉल में सुनवाई का फैसला किया है।

    श्रीराम मंदिर में चढ़ावा चोरी के मामले में मंदिर तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की शिकायत पर रमाशंकर यादव टिन्नू सहित आठ लोगों के खिलाफ गुरुवार को आठ नामजद व एक अन्य अज्ञात आरोपी के खिलाफ रामजन्मभूमि थाने में एफआईआर दर्ज कराई गई।

    ये हैं चढ़ावा चोरी के आरोपित

    अनुकल्प मिश्र, लवकुश मिश्र, मनीष यादव, राजेश पाठक, रमाशंकर यादव उर्फ टिन्नू, अविनाश शुक्ल, करुणेश पांडेय और सुभाष श्रीवास्तव।

    एसआईटी ने की थी एफआईआर की सिफारिश

    एसआईटी ने रामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपतराय के चालक रहे रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू सहित आठ लोगों के खिलाफ प्राथमिकी की सिफारिश की थी। यह घटनाक्रम तब हुआ जब विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) भी राम मंदिर में मिले दान में कथित हेराफेरी को लेकर एफआईआर की मांग में शामिल हो गई।

    बीएनएस की इन धाराओं में मुकदमा

    आरोपितों पर एफआईआर में कई गंभीर धाराएं लगाई गई हैं। इनमें आपराधिक विश्वासभंग, चोरी की संपत्ति रखने, आपराधिक साजिश और सामूहिक जिम्मेदारी जैसे आरोप हैं। सबसे गंभीर धारा 316(5) मानी जा रही है, जो किसी जिम्मेदार पद पर बैठे व्यक्ति द्वारा सौंपे गए धन या संपत्ति के गबन/दुरुपयोग से जुड़ी है। इसमें आजीवन कारावास या दस वर्ष तक की सजा और जुर्माने का प्रविधान है।

    कब सामने आया था प्रकरण

    मंदिर परिसर में चढ़ावा चोरी का मामला तब सामने आया जब सात जून को समाजवादी पार्टी के नेता और पूर्व मंत्री पवन पांडेय ने राम मंदिर के दानपात्र और चढ़ावे से पांच करोड़ से 7.5 करोड़ रुपये की चोरी का आरोप लगाया।
    इसके बाद अखिलेश यादव ने उसी दिन शाम सात बजे एक्स पर पोस्ट कर चढ़ावे में चोरी प्रकरण पर टिप्पणी की थी। सात जून की शाम को ही राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपतराय ने स्पष्टीकरण जारी किया। यह मामला धीरे-धीरे तूल पकड़ता रहा और दस जून को प्रधानमंत्री कार्यालय से विस्तृत रिपोर्ट तलब की गई।

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    तीन सदस्यीय एसआईटी गठित कर रिपोर्ट मांगी 

    सरकार ने भी इसे गंभीरता से लिया और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 13 जून को लखनऊ के मंडलायुक्त डॉ. विजय विश्वास पंत के नेतृत्व में तीन सदस्यीय एसआईटी गठित कर रिपोर्ट मांगी थी।

    एसआईटी की आरंभिक जांच रिपोर्ट में ये संस्तुतियां

    प्रथमदृष्टया दोषी पाए गए लोगों के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज कराई जाए। राम मंदिर ट्रस्ट का पुनर्गठन किया जाए और सभी सदस्यों की समान रूप से जिम्मेदारी तय की जाए। मंदिर ट्रस्ट में किसी प्रशासनिक अधिकारी को सीईओ के रूप में नियुक्त किया जाय।

    अब तक का घटनाक्रम

    सात जून
    समाजवादी पार्टी के नेता और पूर्व मंत्री पवन पांडेय ने राम मंदिर के दानपात्र और चढ़ावे से पांच करोड़ से 7.5 करोड़ रुपये की चोरी का आरोप लगाया। अखिलेश यादव ने शाम सात बजे एक्स पर पोस्ट कर चढ़ावे में चोरी प्रकरण पर टिप्पणी की थी। सात जून की शाम को ही राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपतराय ने स्पष्टीकरण जारी किया।
    आठ जून
    चंपत राय ने आरोपों को खारिज किया। मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र इसी दिन देरशाम अयोध्या आए और अगले दिन वापस चले गए।
    नौ जून
    भाजपा नेता डॉ. रजनीश सिंह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर सीबीआई या ईडी जैसी स्वतंत्र केंद्रीय एजेंसी से जांच की मांग की।
    दस जून
    प्रधानमंत्री कार्यालय ने विस्तृत रिपोर्ट तलब की। इसी दिन मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र तत्काल अयोध्या पहुंचे और चार घंटे लंबी बैठक की।
    11 जून
    राम मंदिर ट्रस्ट के पूर्व लेखापाल महिपाल सिंह का एक वीडियो प्रसारित हुआ जिसमें दावा किया कि वे 2021-2022 में उन्होंने चोरी पकड़ी थी, जिसके फुटेज डिलीट कर दिए गए।
    13 जून
    ट्रस्ट के अनुरोध पर जांच के लिए एसआईटी गठित की गई।
    15 जून
    एसआईटी ने श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपतराय और आमंत्रित सदस्य गोपाल राव से जानकारी ली। आठ से दस कर्मचारियों से करीब छह घंटे पूछताछ।
    16 जून
    टीम ने चंपतराय और गोपाल राव से चार-चार घंटे तक सवाल-जवाब किए। ट्रस्ट के 11 महीने के दस्तावेज खंगाले। चढ़ावा गिनने वाले कर्मचारियों से लंबी पूछताछ की।
    17 जून
    जांच टीम ने बैंक अधिकारियों और नोटों की गिनती से जुड़ी निजी एजेंसी के प्रतिनिधियों से पूछताछ की। बैंक स्टेटमेंट और वित्तीय रिकार्ड की भी पड़ताल की गई।
    18 जून
    टीम दस घंटे मंदिर परिसर में रही। डॉ. अनिल मिश्रा से चार घंटे तक पूछताछ की। टिटू यादव से डेढ़ घंटे तक पूछताछ की। अनिल-टिटू के जवाब क्रास चेक किए।
    19 जून
    चंपतराय, डॉ. अनिल मिश्रा और राम मंदिर के निर्माण प्रभारी गोपाल राय से अलग-अलग पूछताछ हुई। स्टेट बैंक के शाखा प्रबंधक और कैशियर से पूछताछ की।
    20 जून
    टीम ने सभी आरोपियों और संदिग्धों के बैंक खातों की जानकारी इकट्ठा की। सबूत जुटाए। जांच के बाद सारे सबूत अपने साथ लेकर लखनऊ रवाना हो गई।
    23 जून
    एसआईटी ने मंगलवार को 20 पन्नों की शुरुआती रिपोर्ट गृह विभाग के एडिशनल चीफ सेक्रेटरी संजय प्रसाद को सौंप दी।
    25 जून
    एफआईआर दर्ज।
    26 जून
    आठों नामजद गिरफ्तार
    27 जून
    चंपतराय और अनिल मिश्रा का इस्तीफा
    28 जून
    जेल भेजे गए आरोपितों के घर पर छानबीन