AI और GPS से होगा गन्ना क्रांति का सर्वे, अयोध्या में बनेगा मॉडल; किसानों को 24 घंटे में मिलेगा पूरा डेटा
अयोध्या के रुदौली क्षेत्र में अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और जीपीएस तकनीक से गन्ना खेतों का डिजिटल सर्वे होगा, जो 1 मई से शुरू होकर 30 जून तक चलेगा। इस ...और पढ़ें
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AI जेनेरेटेड फोटो।

समय कम है?
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संवाद सूत्र, शुजागंज (अयोध्या)। रुदौली क्षेत्र में इस बार गन्ना खेती एक नई डिजिटल दिशा में कदम रखने जा रही है। पहली बार आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और जीपीएस तकनीक के जरिए गन्ना खेतों का सर्वेक्षण किया जाएगा, जो 1 मई से शुरू होकर 30 जून तक चलेगा। इस पहल से न केवल सर्वे प्रक्रिया तेज और पारदर्शी होगी, बल्कि किसानों को 24 घंटे के भीतर अपने खेत का पूरा ब्यौरा मोबाइल पर मिल जाएगा।
गन्ना विकास परिषद और चीनी उद्योग विभाग द्वारा शुरू किए जा रहे इस डिजिटल सर्वे में आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल कर खेतों का सटीक मापन किया जाएगा।
सर्वे के दौरान ही किसानों को यह जानकारी भी दी जाएगी कि उनके उत्पादन के हिसाब से कितनी गन्ना पर्चियों की जरूरत होगी और संबंधित चीनी मिल उन्हें किस तारीख को उपलब्ध कराएगी। इससे कटाई और आपूर्ति के बीच तालमेल बेहतर होगा, जो पहले एक बड़ी समस्या रही है।
इस नई व्यवस्था से गन्ना रकबा बढ़ने की भी उम्मीद जताई जा रही है। पिछले सत्र में जहां यह लगभग 22 हजार हेक्टेयर था, वहीं इस बार 23 हजार हेक्टेयर से अधिक पहुंचने का अनुमान है। विभाग का मानना है कि तकनीक के उपयोग से किसानों का समय और लागत दोनों बचेंगे, जिससे उनका मुनाफा बढ़ेगा।
सर्वे को सफल बनाने के लिए 30 कर्मचारियों को तीन चरणों में विशेष प्रशिक्षण दिया गया है। टीम में सात राजकीय गन्ना पर्यवेक्षक और 23 चीनी मिल कर्मी शामिल हैं। सर्वे के बाद भूमि का सत्यापन राजस्व विभाग से कराया जाएगा और अंतिम आंकड़े ऑनलाइन पोर्टल ‘यूपी भूलेख’ पर उपलब्ध होंगे।
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ज्येष्ठ गन्ना निरीक्षक कपिल कुमार दीक्षित ने बताया कि यह पहल गन्ना खेती में पारदर्शिता और सटीकता लाएगी। उन्होंने कहा कि डिजिटल सर्वे से खेतों का सही आकलन होगा और किसानों को समय पर पर्ची व भुगतान प्रक्रिया में भी सुधार देखने को मिलेगा।
वहीं, मुख्य गन्ना प्रबंधक दिनेश कुमार सिंह ने बताया कि इस दौरान नए किसानों का पंजीकरण भी किया जाएगा और केवल पंजीकृत किसान ही चीनी मिलों को गन्ना आपूर्ति कर सकेंगे।
उन्होंने कहा कि एआई और जीपीएस आधारित सर्वे से कटाई से लेकर बिक्री तक की पूरी प्रक्रिया समयबद्ध होगी, जिससे किसानों का अतिरिक्त खर्च बचेगा और आय में वृद्धि होगी।
कुल मिलाकर यह पहल गन्ना किसानों के लिए एक गेमचेंजर साबित हो सकती है, जो उन्हें तकनीक से जोड़ते हुए खेती को अधिक लाभकारी और व्यवस्थित बनाएगी।
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