अयोध्या में संत बोले, योगी सरकार के प्रयासों ने दीपोत्सव को दिलाई वैश्विक पहचान
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के प्रयासों से अयोध्या का दीपोत्सव वैश्विक पहचान बना रहा है, जिससे उत्तर प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत ...और पढ़ें

सीएम योगी आदित्यनाथ। जागरण
HighLights
दीपोत्सव ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में वैश्विक पहचान बनाई।
जगद्गुरु स्वामी सतीशाचार्य ने अयोध्या के बदले स्वरूप की सराहना की।
युवाओं को सांस्कृतिक जड़ों और सनातन परंपराओं से जोड़ने का प्रयास।
जागरण संवाददाता, अयोध्या। दीपोत्सव की भव्यता इस बार फिर पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में दीपोत्सव ने जिस तरह वैश्विक पहचान बनाई है, वह उत्तर प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत को नई ऊंचाई देने का उदाहरण बन रहा है। दीपोत्सव के भव्य स्वरूप और तैयारियों को देखने के लिए जगद्गुरु स्वामी सतीशाचार्य जी महाराज भी अयोध्या पहुंच चुके हैं।
उन्होंने कहा कि जिस तरह त्रेतायुग में प्रभु श्रीराम के आगमन पर अयोध्या दीपों से जगमगा उठी थी। आज योगी जी के प्रयासों से वही रामनगरी एक बार फिर पूरी दुनिया को प्रकाश का संदेश दे रही है। जगद्गुरु स्वामी सतीशाचार्य ने कहा कि सूर्यवंश के राजा प्रभु श्रीराम की नगरी अयोध्या में दीपावली का विशेष महत्व है। देवी-देवताओं के नाम और उनकी संख्या के अनुरूप दीप प्रज्ज्वलित करने की परंपरा आस्था और आध्यात्मिक चेतना को प्रकट करती है।
दीपोत्सव की भव्यता और अयोध्या के बदले स्वरूप की शशिकांत दास ने भी सराहना की। उन्होंने गोस्वामी तुलसीदास जी की चौपाई अवधपुरी प्रभु आवत जानी, भई सकल सोभा कै खानी का जिक्र करते हुए कहा कि भगवान श्रीराम के आगमन की सूचना मात्र से पूरी अवधपुरी आनंद और प्रसन्नता से भर उठी थी। आज मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के प्रयासों से अयोध्या में उसी हर्षोल्लास और उत्साह का अनुभव हो रहा है। रामनगरी का वर्तमान स्वरूप लोगों को त्रेतायुग का दिग्दर्शन करा रहा है।
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संत आकाश दास महाराज ने कहा कि वर्ष 2017 से पहले युवाओं के बीच धर्म, सनातन और संस्कृति को लेकर असमंजस की स्थिति थी। युवा अपनी सांस्कृतिक जड़ों और मूल उद्देश्यों से दूर होते जा रहे थे। ऐसे समय में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने खेवनहार की भूमिका निभाते हुए युवाओं को अपनी परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने का सार्थक प्रयास किया। युवाओं में अपनी संस्कृति और सनातन परंपराओं के संरक्षण के प्रति विश्वास मजबूत हुआ है।