अयोध्या में वर्षों बाद ऐतिहासिक घंटाघर का होगा सुंदरीकरण, वापस लौटेगी चौक की शान
अयोध्या के ऐतिहासिक घंटाघर का वर्षों बाद नगर निगम द्वारा कायाकल्प किया जा रहा है। चौक क्षेत्र में स्थित यह प्रसिद्ध स्थल अपनी पुरानी भव्यता और समय की ...और पढ़ें

वर्षों बाद चौक घंटाघर का होगा कायाकल्प।
HighLights
अयोध्या के ऐतिहासिक घंटाघर का वर्षों बाद जीर्णोद्धार होगा।
नगर निगम द्वारा सुंदरीकरण और नई घड़ी लगाने का कार्य।
चौक का प्रसिद्ध स्थल अपनी पुरानी भव्यता वापस पाएगा।
संवाद सूत्र, अयोध्या। शहर के हृदयस्थल चौक की धड़कन कहा जाने वाला घंटाघर एकबार फिर धकधक करेगा। चौक क्षेत्र में स्थित प्रसिद्ध घंटाघर का कायाकल्प होने जा रहा है। वर्षों से उपेक्षा का शिकार रहे इस ऐतिहासिक स्थल का नगर निगम अब कायाकल्प कराएगा।
घड़ी फिर से टिक-टिक करती नजर आएगी और चौक का यह प्रख्यात स्थल अपनी पुरानी भव्यता वापस पा लेगा। नगर निगम ने घंटाघर के सुंदरीकरण और जीर्णोद्धार की योजना को धरातल पर उतार दिया है।
गत वर्ष दिसंबर माह में नगर निगम ने इसके कायाकल्प का निर्णय लिया गया था। अब कार्ययोजना तैयार कर ठेकेदार को सौंप दिया गया है। महापौर महांत गिरीशपति त्रिपाठी ने कार्य का शिलान्यास भी कर दिया है।
अधिकारियों के अनुसार जल्द ही काम शुरू हो जाएगा। घंटाघर की बाहरी दीवारों की मरम्मत, पेंटिंग, लाइटिंग व्यवस्था और घड़ी को पूरी तरह से नया रूप देने का काम किया जाएगा। यह महज एक मीनार या घड़ी का टावर नहीं है, बल्कि नवाबों के शहर फैजाबाद (अयोध्या कैंट जोन) की विशिष्ट पहचान रहा है।
वर्ष 1890 में नगर पालिका परिषद के कार्यकाल में बलरामपुर राजघराने ने घंटाघर का निर्माण कराया था। घंटाघर शहर की समय व्यवस्था का प्रतीक माना जाता था। आस-पास के इलाके के लोगों के लिए यह घड़ी समय का पता लगाने का प्रमुख साधन थी। शाम को घंटियों की आवाज पूरे चौक में गूंजती थी। समय के साथ-साथ संरक्षण के अभाव में घंटाघर की हालत बिगड़ती गई।
वर्ष 2015 में तत्कालीन पालिकाध्यक्ष विजय गुप्त ने पुरानी घड़ी को हटाकर नई आधुनिक घड़ी लगवाई थी। उस समय यह पहल सराहनीय रही थी, लेकिन जुलाई 2017 में उनका कार्यकाल समाप्त होने के बाद घंटाघर की देखभाल पर कोई ध्यान नहीं दिया गया। परिणामस्वरूप घड़ी फिर से बंद हो गईं और संरचना धीरे-धीरे बदहाल होती चली गई।
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अधिशासी अभियंता राजपति यादव ने बताया कि घंटाघर का कायाकल्प किया जाएगा। इसमें घड़ी को भी बदला जाएगा। घंटाघर को न केवल सुंदर बनाया जाएगा बल्कि इसे मजबूत भी किया जाएगा ताकि आने वाली पीढ़ियां भी इस ऐतिहासिक धरोहर को संरक्षित रूप में देख सकें।