अयोध्या में बलिदानी कारसेवकों का हुतात्मा स्मारक तैयार, जल्द ही दर्शन कर सकेंगे श्रद्धालु
अयोध्या में राम मंदिर आंदोलन के बलिदानी कारसेवकों की स्मृति में निर्मित हुतात्मा स्मारक बनकर तैयार हो गया है।
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HighLights
बलिदानी कारसेवकों की स्मृति में हुतात्मा स्मारक बनकर तैयार।
अयोध्या में स्मारक का निर्माण पूर्ण, जल्द होगा लोकार्पण।
नवरात्र में किसी बलिदानी परिवार से होगा उद्घाटन।
जागरण संवाददाता, अयोध्या। राम मंदिर आंदोलन में अपने प्राणों का उत्सर्ग करने वाले बलिदानी कारसेवकों की स्मृतियों को संजोने वाला हुतात्मा स्मारक बन कर तैयार हो गया। जल्द ही इसे लोकार्पित कर दिया जाएगा। ट्रस्ट किसी बलिदानी के परिवार से इसका लोकार्पण करा सकता है।
इसके बाद रामलला के साथ अन्य देवों के दर्शन के लिए पहुंचे श्रद्धालु कारसेवकों को भी अपने श्रद्धासुमन अर्पित कर सकेंगे। ट्रस्ट के सचिव जगदीश आफले ने बताया कि स्मारक का लोकार्पण नवरात्र में हो सकता है।
रामजन्मभूमि परिसर में परकोटे के बाहर दक्षिणी दिशा में शेषावतार मंदिर के समीप निर्मित हुतात्मा (बलिदानी) स्मारक का निर्माण श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने लार्सन एंड टुब्रो (एलएंडटी) कंपनी के माध्यम से कराया है।
संपूर्ण मंदिरों का निर्माण करने वाली इस कंपनी ने गत 27 अगस्त को इस स्तंभ के शीर्ष पर ट्रस्ट का लोगो स्थापित किया था। दस फीट छह इंच ऊंचा और आठ फीट छह इंच गोल यह लोगो ब्रास (पीतल) धातु का है, जो ट्रस्ट के अधिकृत लोगो की प्रतिकृति है। इससे पहले कार्यदायी संस्था एलएंडटी ने साढ़े 16 मीटर ऊंचे इस स्मारक के वाह्य हिस्से को झांसी के लाल ग्रेनाइट पत्थरों से कवर किया था।
अब स्मारक का कार्य पूर्ण हो गया है। ट्रस्ट ने 500 वर्षों तक चले लंबे मंदिर आंदोलन में अपने प्राणों की आहुति देने वाले बलिदानी कारसेवकों की स्मृति को सदैव जागृत रखने के लिए परिसर के दक्षिणी हिस्से में हुतात्मा स्मारक बनवाया है। गत वर्ष एलएंडटी ने इसका निर्माण शुरू कराया था।
स्मारक की चौड़ाई चार फीट है। इसके आधार की गोलाई साढ़े चार फीट है। पहले इसका स्ट्रक्चर तैयार हुआ था, उसके बाद वाह्य हिस्से को ग्रेनाइट पत्थरों से ढका गया।
स्मारक को रात्रि में भी जगमग रखने के लिए प्रकाश व्यवस्था भी की गई है। रोशनी पड़ते ही झांसी के ग्रेनाइट पत्थर कुछ अलग ही आभा बिखेरेंगे। एलएंडटी के परियोजना निदेशक विनोद कुमार मेहता ने बताया कि अब स्मारक में कोई भी कार्य अपूर्ण नहीं है।
