अयोध्या चढ़ावा चोरी मामला: 15 हजार आता था बिजली का बिल, ट्रस्ट देता था सिर्फ सात हजार
राम कचहरी मंदिर में श्रीराम जन्मभूमि ट्रस्ट कार्यालय के बिजली बिल और किराए को लेकर विवाद सामने आया है। महंत शशिकांत दास ने बताया कि ट्रस्ट 6 साल तक 15 ...और पढ़ें

अयोध्या राम मंदिर। जागरण
प्रहलाद तिवारी, अयोध्या। रामकोट स्थित राम कचहरी मंदिर में छह वर्षों तक संचालित रहे श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट कार्यालय का बिजली बिल हर माह 15 हजार रुपये से अधिक आता था और ट्रस्ट सिर्फ सात हजार रुपये देता था। बाकी का भुगतान मंदिर व्यवस्थापक को स्वयं करना पड़ता था। इतना ही नहीं, कार्यालय का ट्रस्ट ने छह वर्षों में एक रुपये किराया भी नहीं दिया।
यह रहस्योद्घाटन राम कचहरी मंदिर के महांत शशिकांत दास ने मंगलवार को दैनिक जागरण से खास बातचीत के दौरान किया। उन्होंने ट्रस्ट के पूर्व लेखाधिकारी महिपाल सिंह की ओर से राम कचहरी में ट्रस्ट कार्यालय खोलने पर उठाए गए सवाल व एसआइटी को ई मेल से भेजे गए साक्ष्यों पर तीखी प्रतिक्रिया दी है।
पूर्व लेखाधिकारी ने पूर्व महासचिव चंपतराय पर आरोप लगाया है कि महंत शशिकांतदास को उपकृत करने के लिए उनके रामकचेहरी मंदिर में ट्रस्ट का कार्यालय खोला गया, जबकि जगन्नाथ मंदिर, लवकुश मंदिर व रंगमहल मंदिर में निश्शुल्क स्थान मिल रहा था। इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए महांत शशिकांत दास ने कहा कि उनके राम कचहरी स्थित भवन में छह साल तक ट्रस्ट का कार्यालय चला। कार्यालय में कंप्यूटर व एसी चल रहे थे। बिल अधिक आता रहा। ट्रस्ट ने केवल बिजली का बिल ही दिया। 15 हजार रुपये का बिल आता था, उसमें से मात्र सात हजार रुपये वह चुकाता था। एक बार केवल इसकी आपत्ति गोपाल राव से मैंने जताई थी।
उन्होंने बताया कि जगन्नाथ मंदिर, लवकुश मंदिर व रंगमहल मंदिर के व्यवस्थापकों ने स्पष्ट रूप से ट्रस्ट कार्यालय के लिए जगह देने से मना कर दिया था। एक मंदिर के व्यवस्थापक ने तो 25 करोड़ रुपये तक की मांग कर दी थी। तब चंपतराय व रामनगरी के दो संभ्रांतजनों ने उनसे अनुरोध किया। फिर हमने इस प्रस्ताव को रामजी की इच्छा समझ कर सहर्ष स्वीकार किया और बिना किराए के स्थान दे दिया। सनातन के गौरव व भगवान रामलला के लिए हमने ट्रस्ट से एक भी पैसा नहीं लिया।
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मानसिक रूप से विक्षिप्त हैं महिपाल
सरयू की नित्य आरती का सूत्रपात करने वाली संस्था आंजनेय सेवा संस्थान के अध्यक्ष महांत शशिकांत दास ने कहा कि महिपाल सिंह संघ से जुड़े हैं लेकिन वह मानसिक रूप से पूरी तरह से असंतुलित हो गए हैं। वह पूर्वाग्रह से ग्रसित होकर आरोप लगा रहे हैं। उनको तथ्यों की जानकारी नहीं है। इसलिए वह अनर्गल प्रलाप कर रहे हैं। मंदिर निर्माण के बजट पर महिपाल के आरोपों पर उन्हाेंने स्पष्ट किया कि जब मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र रहे तो चंपतराय से क्या मतलब?
आगे कहा, एसआइटी जांच कर रही है। उम्मीद है कि सब कुछ स्पष्ट हो जाएगा। हालांकि उन्होंने माना कि कुछ लोगों ने विश्वासघात कर चोरी की। तो वे इस समय जेल में हैं।