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    राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में आरोपितों ने चला नया दांव, गलत धाराओं में जेल भेजने का लगाया आरोप

    Updated: Sat, 08 Aug 2026 06:13 AM (IST)

    राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में आरोपितों ने कोर्ट में अर्जी दाखिल कर गलत धाराओं में रिमांड का आरोप लगाया है। न्यायालय ने पुलिस से आख्या तलब करते हुए स ...और पढ़ें

    राम मंदिर चढ़ावा मामले में आरोपितों ने गलत धाराओं में जेल भेजने का लगाया आरोप।

     राम मंदिर चढ़ावा मामले में आरोपितों ने गलत धाराओं में जेल भेजने का लगाया आरोप।

    HighLights

    1. आरोपियों ने गलत धाराओं में रिमांड लेकर जेल भेजने का आरोप लगाया।

    2. पुलिस पर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के दुरुपयोग का आरोप लगाया गया।

    3. न्यायालय ने पुलिस से मामले पर आख्या तलब कर ली है।

    जागरण संवाददाता, अयोध्या। राम मंदिर चढ़ावा मामले में शुक्रवार को आरोपितों ने नए दांव चल दिए। विशेष न्यायाधीश भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के न्यायालय में आठो आरोपितों ने अधिवक्ता के माध्यम से अर्जी देकर गलत धाराओं में रिमांड लेकर जेल भेजने का आरोप लगाया है।

    न्यायालय में दी गई अर्जी के अनुसार पुलिस ने बिना विधिक परीक्षण के कई ऐसी धाराएं लगा दीं, जिनका प्रथम दृष्टया कोई आधार ही नहीं बनता। मामले में सुनवाई करते हुए प्रभारी विशेष न्यायाधीश भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम ने 10 अगस्त की तारीख नियत करते हुए थाने से आख्या तलब कर ली है।

    चढ़ावा चोरी प्रकरण में पुलिस ने अभी चार्जशीट प्रस्तुत नहीं की है। एक तरफ न्यायालय में अभी आरोपित पूर्व बैंककर्मी सुभाष श्रीवास्तव के पेंशन खाते के मामले में सुनवाई चल रही है, तो दूसरी तरफ बचाव पक्ष के अधिवक्ता ने पुलिस पर ही आरोप लगा कर बरामदगी को ही संदिग्ध करार दे दिया है। जिससे पुलिस की परेशानी और बढ़ गई।

    अर्जी में कहा कि भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, आपराधिक न्यासभंग, चोरी की संपत्ति रखने समेत कई धाराएं आरोपितों पर लागू ही नहीं होतीं। उनका तर्क है कि आरोपित न तो लोक सेवक हैं और न ही ट्रस्ट के अभिकर्ता, बल्कि अधिकांश लोग आउटसोर्सिंग एजेंसी के माध्यम से एसबीआई के लिए कार्यरत थे। ऐसे में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम का प्रयोग विधिसम्मत नहीं है।

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    पुलिस ने बरामदगी की प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताएं कीं और पहले से ट्रस्ट के कब्जे में पहुंच चुकी धनराशि को दोबारा बरामद दिखा कर उसे चोरी की संपत्ति का स्वरूप दे दिया।

    यही नहीं, आरोप लगाया कि रिमांड के दौरान पुलिस ने आभूषण, धनराशि इत्यादि आरोपितों के स्वजन से प्राप्त किया और उन्हें संदिग्ध वस्तु बताया है। इसी के साथ उन्होंने न्यायिक रिमांड पर सुनवाई से पूर्व संपूर्ण केस डायरी तलब किये जाने की मांग की।

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