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    अयोध्या राम मंदिर में इस साल बदलेगी पुरानी परंपरा, सावन शुक्ल तृतीया से झूला विहार करेंगे 'रामलला'

    Updated: Mon, 03 Aug 2026 08:41 AM (IST)

    राम मंदिर में इस वर्ष झूलनोत्सव सावन शुक्ल तृतीया से शुरू होगा, जो अयोध्या की पुरानी परंपरा के अनुरूप है। ...और पढ़ें

    सावन शुक्ल तृतीया से झूला विहार करेंगे 'रामलला'।

    सावन शुक्ल तृतीया से झूला विहार करेंगे 'रामलला'।

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    जागरण संवाददाता, अयोध्या। रामनगरी के विभिन्न मंंदिरों की भांति इस वर्ष राम मंदिर में भी झूलनोत्सव की शुरुआत सावन शुक्ल तृतीया तिथि से होगी। श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की धार्मिक समिति में शामिल स्थानीय साधु-संतों ने राम मंदिर की पुरानी परंपरा काे बदलने का प्रस्ताव रखा है।

    यदि यह प्रस्ताव आगामी बैठक में स्वीकृत हो जाता है, तो तृतीया से मंदिर में विराजे रामलला व उनके तीनों भाइयों और माता जानकी के चल विग्रहों को झूला विहार कराया जाने लगेगा।

    इसका समापन सावन शुक्ल पूर्णिमा (रक्षाबंधन) तिथि पर होगा। गत वर्षों में राम मंदिर में झूलनोत्सव श्रावण शुक्ल पंचमी तिथि से ही प्रारंभ होता रहा है, परंतु इस बार रामनगरी की परंपरा का ही पालन किए जाने की संभावना है।

    अयोध्या में सावन झूला मेले का प्रारंभ सावन शुक्ल तृतीया से होता है। इसी दिन मणिपर्वत पर झूला पड़ता है और लगभग सभी प्रमुख मंदिरों से राम-जानकी के विग्रहों को हिंडोले पर विराजमान कर मणिपर्वत तक रथ यात्रा निकलती है। इसके बाद पूरे सावन भर बड़े हर्षोल्लास से देवों का झूला विहार संपन्न होता है।

    झूला विहार करेंगे रामलला

    वहीं, राम मंदिर में विराजमान रामलला काे नागपंचमी (श्रावण शुक्ल पंचमी) के दिन से झूले पर विराजमान कर झूला विहार कराया जाता रहा है। भूतल पर स्थित रामलला के गर्भगृह के सम्मुख स्वर्ण-रजत मिश्रित झूले पर विधि-विधान से चल विग्रहों को विराजमान कराया जाता है और अर्चक प्रतिदिन मंगला आरती से शयन आरती तक झूला विहार कराते हैं।

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    इस दौरान कलाकार कजरी गीत सुनाते हैं और रामलला का दर्शन करने आने वाले श्रद्धालुओं को भी दिव्य दर्शन प्राप्त होता है। गत दिनों चढ़ावा चोरी प्रकरण उजागर होने के बाद दो ट्रस्टियों का त्यागपत्र हुआ और ट्रस्ट की बैठक में धार्मिक समिति का पुनर्गठन करके रामनगरी के साधु-संतों को इसमें शामिल किया गया।

    अब इसी धार्मिक समिति को राम मंदिर के समस्त धार्मिक अनुष्ठानों का दायित्व दे दिया गया है। समिति में शामिल एक संत ने बताया कि सदस्यों ने रामनगरी की परंपरा का पालन करने का प्रस्ताव रखा है।

    इसके अंतर्गत प्रमुख मंदिरों की भांति राम मंदिर में भी सावन झूलनोत्सव तृतीया तिथि से ही शुरू करने का विचार रखा गया है। आगामी दिनों में सदस्यों के साथ बैठक होगी। यदि इसमें प्रस्ताव पर सहमति मिल जाती है, तो इस बार 15 अगस्त से ही झूलनोत्सव शुरू किया जाएगा।

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