राम मंदिर गणना में चोरी का अब अवसर नहीं, हर एंगल से हो रही रिकॉर्डिंग
राम मंदिर के दानपात्रों में चोरी के बाद अब श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने गणना प्रक्रिया को बेहद सख्त कर दिया है। पूरी प्रक्रिया की वीडियो रि ...और पढ़ें

चढ़ावा में चोरी उजागर होने के बाद ट्रस्ट ने सख्त की पूरी गणना प्रक्रिया।
HighLights
दानपात्रों की गणना की अब वीडियो रिकॉर्डिंग।
गणना कक्ष में लगे 12 पीटीजेड सीसी कैमरे।
पूर्व सैनिक कर रहे हैं पूरी प्रक्रिया की निगरानी।
लवलेश कुमार मिश्र, अयोध्या। राम मंदिर के दानपात्रों की धनराशि में चोरी के बाद अब श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने पूरी गणना प्रक्रिया को बेहद सख्त कर दिया है। गणना के प्रत्येक चरण की निगरानी इतनी बढ़ाई गई है कि कोई कर्मी या इससे जुड़ा व्यक्ति अब अनियमितता को अंजाम नहीं दे सकता है।
परिसर से दानपात्रों को गणना कक्ष तक लाने और इसे खोलने से लेकर गिनती तक की प्रक्रिया की वीडियो रिकॉर्डिंग कराई जा रही। ट्रस्ट ने दो कैमरामैन भी नियुक्त कर दिए हैं। गणना कक्ष में ऐसे दर्जनभर पीटीजेड सीसी कैमरे लगवाए गए हैं, जो चारों कोण पर घूम सकते हैं।
प्रत्येक दिन की गणना का विस्तृत अंकन होने लगा है। किस दिन किस नंबर की दानपेटी से कितनी धनराशि निकली और गिनती के सापेक्ष कितना बैंक में जमा कराया गया, सबका हिसाब-किताब दुरुस्त रखा जा रहा है।
गत पांच जून को उजागर हुई चढ़ावा में चोरी की एसआटी जांच में तमाम अनियमितताएं खुलकर सामने आईं, तो ट्रस्ट और ट्रस्टियों को प्रतिकूल परिस्थितियों का सामना करना पड़ा। बैंक व ट्रस्ट के बीच तय मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) का अनुपालन नहीं कराने को लेकर सवाल उठे और दो ट्रस्टियों को त्यागपत्र देना पड़ा।
ट्रस्टी कृष्ण मोहन अंतरिम महासचिव बनाए गए तो इन्होंने कोषाध्यक्ष स्वामी गाेविंददेव गिरि के निर्देशन में पूरी व्यवस्था को पारदर्शी व दोषरहित बनाने का प्रयास शुरू किया है। इसी क्रम में दानराशि की गणना को इतना सख्त किया गया है कि चोरी का कोई अवसर शेष न रह जाए।
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गणना से जुड़े एक ट्रस्ट कर्मी ने बताया कि परिसर में रखे सभी 56 दानपात्रों को अलग-अलग दिन क्रमवार तब खोला जाता है, जब वह भर जाते हैं। एक साथ पांच-छह दानपात्रों को ही लाया जाता है। इन्हें कक्ष तक ले जाकर खोलने तक की रिकार्डिंग होती है। सभी दानपात्रों की धनराशि एक साथ नहीं मिलाई जाती। किस दानपेटी से कितनी धनराशि निकली, इसका अलग-अलग अंकन करके समग्र रूप से गिनती होती है।
किस दिन कितनी धनराशि की गिनती हुई, इसका रिकॉर्ड भी मेंटेन रखा जा रहा है। प्रतिदिन कितनी धनराशि बैंक में ले जाई गई और कितनी ट्रस्ट के खाते में जमा हुई, इसका संयुक्त मिलान कराया जाता है। किसी दिन 18 से 20 लाख रुपये तो कभी 30 से 35 लाख या इससे भी अधिक धनराशि जमा कराई जा रही।
गणना और इससे जुड़े समस्त कार्यों का पर्यवेक्षण भूतपूर्व सैनिकों के हवाले है। एक कर्मी ने बताया कि पीटीजेड (पैन टिल्ट जूम) कैमरा की विशेषता यह होती है कि वह 350 से 360 डिग्री तक घूम सकता है। इसे मोबाइल एप या कंट्रोलर के माध्यम से जिस स्थान पर लगा है, उससे तीन दिशाओं में घुमाया जा सकता है। यह हर कोण से रिकार्डिंग करने में सक्षम है। इसकी कनेक्टिविटी व जूम क्षमता भी उच्च गुणवत्ता वाली होती है।
भंडारण क्षमता भी बढ़ाई गई
गणना कक्ष की दैनिक गतिविधियों को अधिक दिनों तक सुरक्षित रखने के लिए ट्रस्ट ने भंडारण क्षमता (स्टोरेज कैपिसिटी) भी बढ़ाई है। कैमरों में 256 जीबी क्षमता के मेमोरी कार्ड लगाए गए हैं और इनका स्टोरेज हार्ड डिस्क में सुरक्षित करके भविष्य के लिए रखा जा रहा है, जिससे आवश्यकता पड़ने पर पड़ताल हो सके।
प्रारंभिक जांच में एसआइटी को 40 दिनों का ही डेटा मिला था, जिसमें गणना कर्मियों को 70 बार चोरी करते पकड़ा गया था। एसआइटी ने कार्य की महत्ता की दृष्टि से सम्परीक्षा आख्याओं के अनुरूप 180 दिनों का सीसीटीवी फुटेज संरक्षित करने का सुझाव दिया था।