चढ़ावा चोरी में आरोपियों ने दिया जवाब, कोर्ट ने तलब की केस डायरी; 25 अगस्त को अगली सुनवाई
राम मंदिर चढ़ावा चोरी प्रकरण में आरोपितों के अधिवक्ता ने विवेचक की आपत्ति पर अपना जवाब प्रस्तुत किया है। न्यायालय ...और पढ़ें


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जागरण संवाददाता, अयोध्या। राम मंदिर चढ़ावा चोरी प्रकरण में आरोपितों और अभियोजन के बीच कानूनी दांव-पेच और तेज हो गए हैं। गलत धाराओं में जेल भेजने का आरोप लगाने वाले आठों आरोपितों के अधिवक्ता डिप्टी लीगल ऐड डिफेंस काउंसिल कुलशेखर सिंह ने बुधवार को विवेचक की आपत्ति पर अपना जवाब प्रस्तुत कर दिया।
अधिवक्ता ने विवेचक आशुतोष तिवारी की प्रस्तरवार आख्या को संदेहास्पद और भ्रामक बताते हुए उसे निरस्त करने की याचना की। विशेष न्यायाधीश भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम रजत वर्मा ने केस डायरी तलब करते हुए अगली सुनवाई के लिए 25 अगस्त की तारीख नियत कर दी है।
न्यायालय में प्रस्तुत जवाब में कहा गया कि आरोपितों की ओर से उठाए गए बिंदु विधि तथा उच्च न्यायालय और उच्चतम न्यायालय के निर्णयों से समर्थित हैं। इसके बावजूद विवेचक ने इन बिंदुओं पर स्पष्ट और सुसंगत आख्या देने के बजाय संदेहास्पद एवं भ्रामक तथ्य प्रस्तुत किए हैं।
मामले में आरोपितों ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, आपराधिक न्यासभंग, चोरी की संपत्ति रखने समेत विभिन्न धाराओं की वैधानिकता पर सवाल उठाए थे। तर्क दिया कि अधिकांश आरोपित आउटसोर्सिंग एजेंसी के माध्यम से कार्यरत थे और वे लोक सेवक अथवा ट्रस्ट के अभिकर्ता नहीं हैं। इसलिए भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराएं सवालों के घेरे में हैं।
बरामदगी की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाते हुए आरोप लगाया था कि पहले से ट्रस्ट के कब्जे में पहुंच चुकी धनराशि को दोबारा बरामदगी दिखा कर चोरी की संपत्ति का स्वरूप दिया गया। इस अर्जी पर विवेचक ने अपनी आख्या में मामले को सुनियोजित, आवर्ती और सतत आपराधिक षड्यंत्र बताया था।
चढ़ावे की राशि की छंटाई और गणना के दौरान सुनियोजित तरीके से गबन/चोरी की गई तथा वास्तविक चोर और प्राप्तकर्ता की भूमिकाएं अलग-अलग कड़ियों में बंटी थीं। आरोपितों की निशानदेही पर बरामदगी होने का भी दावा किया गया था। भ्रष्टाचार की धारा को लेकर विवेचक ने कहा था कि आरोपित ऐसी व्यवस्था के अंतर्गत कार्यरत थे, जो लोक कर्तव्य से जुड़ी थी।
