राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में बार एसोसिएशन की मॉनिटरिंग अर्जी पर नहीं आई आख्या, 29 अगस्त को होगी अगली सुनवाई
राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में फैजाबाद बार एसोसिएशन की मॉनिटरिंग अर्जी पर विवेचक ने आख्या प्रस्तुत नहीं की। न्यायालय ने विवेचक के व्यस्त होने का हवाला देते हुए अगली सुनवाई के लिए 29 अगस्त की तारीख तय की है।

राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में बार एसोसिएशन की मॉनिटरिंग अर्जी पर नहीं आई आख्या।
HighLights
चढ़ावा चोरी मामले में विवेचक ने आख्या नहीं दी।
न्यायालय ने अगली सुनवाई के लिए 29 अगस्त तय की।
बार एसोसिएशन निष्पक्ष जांच और साक्ष्य प्रस्तुत करना चाहता है।
जागरण संवाददाता, अयोध्या। राम मंदिर के चढ़ावा चोरी मामले में फैजाबाद बार एसोसिएशन की मॉनिटरिंग अर्जी पर विवेचक ने आख्या नहीं प्रस्तुत की। विवेचक के पर्व की ड्यूटी में व्यस्त होने का हवाला देते हुए राज्य सरकार की ओर से वरिष्ठ अभियोजन अधिकारी ने मौका मांगा है, जिस पर न्यायालय ने 29 अगस्त की तारीख नियत कर दी है।
प्रकरण में फैजाबाद बार एसोसिएशन के महामंत्री शैलेंद्र जायसवाल की ओर से ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपतराय, पूर्व ट्रस्टी डा. अनिल मिश्र व राम मंदिर के व्यवस्थापक रहे गोपाल राव के विरुद्ध मुकदमा दर्ज करने की तहरीर बीती दो जुलाई को अयोध्या कोतवाली में दी गई थी।
इसमें चंपतराय, डॉ. अनिल मिश्र, गोपाल राव व ट्रस्ट के अंतरिम महासचिव कृष्णमोहन पर गंभीर आरोप लगाए गए थे। पुलिस ने इसे जनरल डायरी में दर्ज कर पीली पर्ची उपलब्ध कराई थी। कई दिन बीतने के बाद भी जब मुकदमा दर्ज नहीं हुआ, तो न्यायालय में मानीटरिंग अर्जी प्रस्तुत की गई।
विशेष न्यायाधीश भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम रजत वर्मा ने इसे विविध वाद के रूप में दर्ज करते हुए विवेचक से इस मुकदमे की वैधानिकता पर आपत्ति मांगी थी। शनिवार को आख्या न आने पर न्यायालय ने 29 अगस्त की तारीख तय कर दी है।
मंत्री शैलेंद्र जायसवाल ने अर्जी में कहा है कि अधिवक्ता संघ के पास चढ़ावा चोरी मामले में ऐसे कई महत्वपूर्ण साक्ष्य हैं, जो विवेचना में सहायक सिद्ध हो सकते हैं। अर्जी में लिखा गया है कि विवेचक ने कहा है कि विवेचना मैं कर रहा हूं, जो मेरी मर्जी होगी उसी पर जांच करूंगा। जो मेरा मन करेगा, वैसे ही साक्ष्यों काे पुलिस प्रपत्राें में इंद्राज करूंगा।
मंत्री ने आरोप लगाया है कि विवेचक प्रभाव, दबाव व प्रलोभन के अधीन रहते हुए प्रकरण की निष्पक्ष विवेचना नहीं कर रहे हैं। सर्वोच्च न्यायालय व उच्च न्यायालय की ओर प्रतिपादित विधि व्यवस्थाओं के अनुरूप प्रकरण की निष्पक्ष व सही विवेचना हेतु विवेचना की मानीटरिंग कराए जाने की नितांत आवश्यकता है।
