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    राम मंदिर चढ़ावा चोरी : फंस सकते हैं कई और सफेदपोश, पुलिस ने बैंक कर्मियों और आरोपितों के करीबियों से शुरू की पूछताछ

    Updated: Sun, 28 Jun 2026 06:52 AM (IST)

    राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में पुलिस ने आठ आरोपितों के संरक्षकों की तलाश शुरू कर दी है, जिसमें बैंक अधिकारियों और गणनाकर्मी उपलब्ध कराने वाली एजेंसी ...और पढ़ें

    राम मंदिर।

    राम मंदिर।

    HighLights

    1. चढ़ावा चोरी में आठ आरोपितों के संरक्षकों की तलाश शुरू।

    2. बैंक अधिकारियों और गणनाकर्मी उपलब्ध कराने वाली एजेंसी पर शिकंजा।

    3. एसआइटी का कार्यकाल बढ़ा, कई सफेदपोशों के फंसने की आशंका।

    लवलेश कुमार मिश्र, अयोध्या। राम मंदिर चढ़ावा चोरी प्रकरण में आठ आरोपितों को जेल भेजने के बाद पुलिस ने इनके उन संरक्षकों की भूमिका की तलाश में जुट गई है जो इन्हें पीछे से सहारा दे रहे थे। इनमें बैंक अधिकारियों और गणनाकर्मी उपलब्ध कराने वाली एजेंसी पर शिकंजा कस सकता है। शनिवार को पुलिस ने बैंक के कुछ कर्मचारियों और आरोपितों के करीबियों से पूछताछ की। पुलिस इनकी भूमिका की भी जांच कर रही है।

    पुलिस यह पता लगा रही है कि पिछले कुछ वर्षों के दौरान आरोपितों के कौन परिवारीजन और करीबी हैं जिनके रहन-सहन में अचानक बदलाव आया है। जल्द ही संबंधित लोगों के बैंक खातों की डिटेल भी खंगाली जाएगी।

    एसआइटी की जांच में दो बैंक अधिकारियों सहित कुछ कर्मियों की भूमिका संदिग्ध मिली थी, लेकिन एफआइआर में किसी बैंककर्मी का नाम नहीं है। पुलिस विवेचना में इनके नाम बढ़ा सकती है। इस बीच राज्य सरकार द्वारा गठित विशेष जांच दल (एसआइटी) का कार्यकाल बढ़ाने की बात कही जा रही है।

    कुछ ही घंटों में आरोपितों को पुलिस ने कर लिया था गिरफ्तार

    गुरुवार को चढ़ावा चोरी मामले में रामजन्मभूमि थाने में पहली प्राथमिकी दर्ज होने के कुछ ही घंटे बाद पुलिस ने कुछ आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया था। प्राथमिकी में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम भी लगाए जाने के कारण माना जा रहा कि इसमें किसी लोकसेवक यानी सरकारी कर्मी की भी भूमिका संदिग्ध पाई गई है। हालांकि, इन्हें अभी अज्ञात में शामिल किया गया है। पुलिस सूत्रों के अनुसार सोमवार को आरोपितों की कस्टडी रिमांड के लिए आवेदन किया जाएगा।

    रिमांड पर पूछतांछ में यह भी देखा जाएगा कि इस गबन प्रकरण में केवल इन्हीं आठ नामजद आरोपितों की ही भूमिका रही है या बैंककर्मी और ट्रस्ट व मंदिर से जुड़े अन्य कर्मचारी की भी संलिप्तता रही। ट्रस्टियों को जानकारी थी या नहीं? यदि उनके संज्ञान में लाया गया था तो उनके स्तर से क्या कार्रवाई हुई।

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    इन कर्मियों को किसकी संस्तुति पर नियुक्ति दी गई। ये ट्रस्ट या मंदिर से जुड़े लोग थे या फिर बाहर के। सूत्रों के अनुसार गणना की निगरानी करने वाले रिटायर्ड बैंककर्मी सुभाष श्रीवास्तव को एक नेता ने ट्रस्ट का कर्मचारी बनवाया था।

    इसी तरह गबन मामले के मास्टरमाइंड अनुकल्प मिश्र की नियुक्ति भी एक नेता के कहने पर एक ट्रस्टी ने की थी। बाद में इसने बहनोई लवकुश मिश्र व क्षेत्र के करुणेश पांडेय को भी ट्रस्ट में रखवा कर गणना कार्य से जोड़ा था। अविनाश शुक्ल की नियुक्ति में भी किसी नेता की भूमिका बताई जा रही है। इस मामले के विवेचक सीओ अयोध्या आशुतोष त्रिपाठी हैं जिनके बारे में कहा जा रहा है कि चूंकि यह बेहद संवेदनशील मामला है इसलिए किसी इंस्पेक्टर के बजाए सीओ से विवेचना कराई जा रही है।

    28 तक ही था एसआइटी का कार्यकाल

    पांच जून को दान पात्र से चोरी का मामला उछलने के बाद राज्य सरकार ने 13 जून को विशेष जांच दल (एसआइटी) गठित किया था। लखनऊ के मंडलायुक्त डा विजय विश्वास पंत के नेतृत्व में एसआइटी को सात दिन में प्रारंभिक और 15 दिनों में फाइनल रिपोर्ट सौंपनी थी। एसआइटी ने 23 जून को अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट अपर मुख्य सचिव संजय प्रसाद को सौंप दी थी। 28 जून को एसआइटी का कार्यकाल पूरा रहा था लेकिन सरकार ने अभी और समय बढ़ा दिया है।

    कार्यकाल कितने दिन का बढ़ाया है इसकी पुष्टि तो नहीं है लेकिन दल के एक सदस्य ने जागरण को बताया कि जांच में अभी कुछ और बिंदु हैं जिनके देखना बाकी है। इसके बाद ही टीम फाइनल रिपोर्ट सौपेंगी। कहा जा रहा है कि पुलिस जहां आरोपितों को रिमांड पर लेने के बाद उनसे पूछताछ के आधार पर अन्य की भूमिका की जांच करेगी वहीं एसआइटी की जांच का दायरा बढ़ सकता है। एसआइटी की टीम भूमि खरीद में अनियमितता और दान आभूषणों के गायब होने के आरोपों की सत्यता जांच कर सकती है।