श्रीराम जन्मभूमि मंदिर ट्रस्ट में चंपतराय की फिर होगी वापसी? पाना होगा दो तिहाई ट्रस्टियों का ’विश्वास’
राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में त्यागपत्र देने वाले पूर्व महासचिव चंपतराय की श्रीरामजन्मभूमि मंदिर ट्रस्ट में वापसी की अटकलें हैं। उनकी वापसी के लिए ट्रस्ट के दो-तिहाई स्थायी सदस्यों का विश्वास प्राप्त करना अनिवार्य होगा।
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वापसी के लिए चंपतराय को पाना होगा दो तिहाई ट्रस्टियों का ’विश्वास’।
HighLights
चंपतराय की राम मंदिर ट्रस्ट में वापसी की अटकलें।
वापसी के लिए दो-तिहाई स्थायी सदस्यों की सहमति अनिवार्य।
2 सितंबर की ट्रस्ट बैठक में प्रस्ताव पर विचार संभव।
लवलेश कुमार मिश्र, अयोध्या। राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में आराेप लगने के बाद त्यागपत्र देने वाले पूर्व महासचिव चंपतराय की ट्रस्ट में वापसी की अटकलें शुरू हैं। उनकी श्रीरामजन्मभूमि मंदिर ट्रस्ट में वापसी संभव तो है लेकिन इसमें एक पेच यह है कि उन्हें ट्रस्ट सदस्यों का ’विश्वास’ प्राप्त करना होगा।
ट्रस्ट डीड के अनुसार किसी पदाधिकारी या सदस्य के त्यागपत्र दे देने के बाद उसे वापस तो लिया जा सकता है, परंतु दो तिहाई स्थायी सदस्यों की सहमति अनिवार्य होगी।
माना जा रहा कि दो सितंबर को प्रस्तावित ट्रस्ट की बैठक में इससे संबंधित प्रस्ताव लाया जा सकता है। यह प्रस्ताव पारित हो जाएगा, तो उनकी सदस्य के रूप में वापसी हो जाएगी। हालांकि उन्हें अभी महासचिव या अन्य कोई पद नहीं दिया जाएगा।
गत जून माह में चढ़ावा चोरी उजागर होने के बाद एसआटी जांच शुरू हुई, तो पूर्व महासचिव चंपतराय के साथ पूर्व सदस्य डा. अनिल मिश्र पर भी तमाम सवाल उठे। एसआईटी की 23 जून को प्रारंभिक रिपोर्ट आई, तो दोनों ट्रस्टियों ने अपने पद से त्यागपत्र दे दिया था। छह जुलाई की ट्रस्ट बैठक में इसे स्वीकृत भी कर लिया गया।
अब जबकि इसी एसआईटी की अंतिम रिपोर्ट आ गई और इसमें पूर्व महासचिव पर कोई आरोप न लगने की बात कही जा रही तो उन्हें दोबारा ट्रस्ट में वापस लिए जाने की अटकलें शुरू हो गई हैं। चंपतराय के समर्थक तो एसआइटी रिपोर्ट में क्लीनचिट मिल जाने को लेकर आश्वस्त हो चुके हैं कि उनकी शीघ्र ही वापसी हो जाएगी।
हालांकि डॉ. अनिल मिश्र की पुनर्वापसी की संभावना नहीं बताई जा रही। इस संबंध में हाईकोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता पवन पांडेय कहते हैं, ट्रस्ट डीड के अनुसार किसी सदस्य या पदाधिकारी की पुनर्वापसी तो हो सकती है, परंतु यह स्थायी सदस्यों के दो तिहाई बहुमत से ही संभव है। इसका उचित कारण भी प्रस्ताव में स्पष्ट करना होगा। यदि सभी ट्रस्टी सहमत होंगे, तो कोई समस्या नहीं है।
चंपतराय का इस्तीफा स्वीकार हो गया है तो अब ट्रस्ट के पदाधिकारियों को ही पहल करनी होगी। बैठक में ट्रस्ट की तरफ से प्रस्ताव लाना होगा। अगर त्यागपत्र स्वीकार न हुआ होता, तो उनके ही पत्र पर उन्हें वापस लिया जा सकता था।
वहीं, वरिष्ठ अधिवक्ता प्रियनाथ सिंह कहते हैं कि ट्रस्ट के इस निर्णय को सक्षम न्यायालय में कभी भी चुनौती दी जा सकती है। कोई भी व्यक्ति जनहित याचिका दाखिल कर सकता है।
अधिकांश ट्रस्टी व साधु-संत भी उनकी पुनर्वापसी के पक्ष में
चंपतराय की पुनर्वापसी को लेकर ट्रस्ट में कोई अंतर्विरोध नहीं है। रामनगरी के अधिकांश साधु-संत व ट्रस्ट के सदस्य भी उनके विरोध में नहीं हैं। ऐसे में माना जा रहा कि यदि इससे संबंधित प्रस्ताव लाया जाता है, तो वह पारित हो जाएगा।
हालांकि, सूत्राें का कहना है कि गुप्त मतदान की स्थिति में परिस्थिति इसके विपरीत हो सकती है। ट्रस्ट सदस्य व निर्मोही अखाड़ा के महांत दिनेंद्रदास ने कहाकि जांच के दौरान चंपतराय ने त्यागपत्र दिया था। उन पर कोई आरोप नहीं सिद्ध हुआ तो उन्हें वापस लेने में कोई समस्या नहीं है। उन्होंने स्पष्ट तौर पर यह भी कहाकि वह किसी का विरोध नहीं करेंगे।
