राम मंदिर में CEO की नियुक्ति से बढ़ेगी पारदर्शिता, ट्रस्टियों का बोझ होगा कम
अयोध्या राम मंदिर में पहले मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) की नियुक्ति का रास्ता साफ हो गया है, जिससे ट्रस्टियों पर से प्रबंधकीय दायित्वों का बोझ कम होगा। सीईओ मंदिर के सभी वैधानिक, प्रशासनिक, वित्तीय कार्यों और दर्शनार्थियों की व्यवस्थाओं की जवाबदेही संभालेंगे, जिससे पारदर्शिता सुनिश्चित होगी।

अयोध्या राम मंदिर।

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
लवलेश कुमार मिश्र, अयोध्या। राम मंदिर में पहले मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) की नियुक्ति का रास्ता लगभग साफ हो गया है। अंतिम साक्षात्कार संपन्न हो जाने के बाद अब जल्द ही किसी एक नाम पर ट्रस्टियों की सहमति भी मिल जाने के आसार हैं।
सीईओ की नियुक्ति के बाद अब तक समस्त दायित्वों का निर्वहन कर रहे ट्रस्ट पदाधिकारी इससे मुक्त हो जाएंगे। सीईओ पर मंदिर से जुड़े समस्त वैधानिक, प्रशासनिक व वित्तीय कार्यों की जवाबदेही होगी।
यह भले ट्रस्ट महासचिव के प्रति उत्तरदायी होंगे, परंतु इन पर दर्शनार्थियों के सुगम दर्शन की व्यवस्थाएं, सुविधाएं और वित्तीय पारदर्शिता को सुनिश्चित करने का दायित्व होगा।
चढ़ावा चोरी उजागर होने के बाद एसआइटी जांच में तमाम तरह की अनियमितताएं सामने आने पर श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने देश के अन्य मंदिरों की भांति राम मंदिर में भी मुख्य कार्यकारी अधिकारी की नियुक्ति करने का निर्णय लिया था। इसके लिए छह जुलाई की बैठक में तीन सदस्यीय चयन समिति गठित कर 20 वर्ष की बहुआयामी प्रतिभा के अनुभवी व्यक्तियों से आवेदन आमंत्रित किए गए।
इसमें बड़ी संख्या में उन सेवानिवृत्त हो चुके लोगों ने भी आवेदन किया, जिन्होंने प्रशासन व प्रबंधन के क्षेत्र में लंबे समय तक काम किया है। ऐसे 5585 आवेदकों के विस्तृत बायोडाटा में तीन चरणों में छंटनी करके अंतिम साक्षात्कार के लिए 16 आवेदकों को अयोध्या बुलाया गया। गत 11 व 12 अगस्त को इनका साक्षात्कार भी ले लिया गया।
अब चयन समिति की ओर से सौंपे गए तीन नामों के पैनल में शामिल कोई एक व्यक्ति ट्रस्ट का पहला सीईओ बनेगा। यह नाम दो सितंबर की ट्रस्ट बैठक में सामने आ जाने की संभावना है। सीईओ की नियुक्ति तीन वर्ष के लिए होगी। इसके बाद प्रदर्शन के आधार पर नवीनीकरण होगा।
मंदिर से जुड़े एक संत कहते हैं, सीईओ चाहे जिस पृष्ठभूमि का व्यक्ति बने, उस पर दर्शन व्यवस्था व नकदी की गणना से संबंधित विभिन्न प्रकार के दायित्व होंगे। सीईओ महासचिव के निर्देशन में कार्य करेंगे, उनकी सहमति पर ही कोई निर्णय सार्थक होगा, परंतु इससे ट्रस्टियों पर दायित्व का बोझ काफी कम हो जाएगा।
सीईओ प्रतिदिन आने वाले एक-डेढ लाख श्रद्धालुओं की दर्शन व्यवस्था को सुगम बनाएंगे, तो दान की नकदी की गणना को पारदर्शी तरीके से संपन्न करा कर ट्रस्ट के खाते में धनराशि जमा कराएंगे। सीईओ नियुक्ति को लेकर रामनगरी के साधु-संतों में मतभेद अवश्य हैं, लेकिन प्रशासनिक सेवा से मुक्त हुए व्यक्ति के सीईओ बनने से व्यवस्थाएं काफी हद तक पटरी पर आ जाएंगी।
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सीईओ पर होंगे ये दायित्व
- समस्त वैधानिक, प्रशासनिक व वित्तीय कार्यों का निष्पादन।
- स्वरूप और आकार के अनुसार कार्यप्रणाली और पद्धतियां विकसित करना।
- उद्देश्य, स्वरूप और आकार के अनुसार संगठन गठित करना।
- अधिकारियों, सेवकों और कर्मचारियों के शीर्षस्थ कार्यकारी नायक का दायित्व संभालना।
- वर्तमान गतिविधियों और भावी विकास का कुशल संचालन करना।
- समस्त वैधानिक, नियामक और ट्रस्ट डीड की आवश्यकताओं की पूर्ति करना।
- वित्तीय व्यवहार, लेखों और सूचनाओं में पारदर्शिता व कुशलता सुनिश्चित करना।
- समस्त धार्मिक पूजा-पाठ, उत्सव, अनुष्ठान आदि का नियमित एवं सुचारू संचालन सुनिश्चित करना।
- दर्शनार्थियों की सुरक्षा, सुविधा और संतोष सुनिश्चित करना।
- समय-समय पर आने वाले विशिष्ट अतिथियाें व प्रमुख संतों की यथोचित व्यवस्था करना।
- मंदिर की संपत्तियों की समुचित सुरक्षा और नियमानुसार विनिवेश करना।
- ट्रस्ट डीड के अनुसार उद्देश्यों की प्राप्ति की योजनाएं बनाना, और ट्रस्टी मंडल व महासचिव के निर्देशन में कुशल क्रियान्वयन करना।
