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    राम मंदिर चढ़ावा चोरी: बैंक व गणना कर्मियों को नौकरी दिलाने वालों पर भी कसेगा शिकंजा

    Updated: Sat, 27 Jun 2026 12:59 PM (IST)

    अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में एसआईटी की संस्तुतियों पर आठ कर्मियों को नामजद किया गया है, लेकिन विवेचना बढ़ने पर बैंककर्मियों और नौकरी दिलाने ...और पढ़ें

    नीचे बाएं से सुभाष चंद्र श्रीवास्तव, रामशंकर यादव टिन्नू, लवकुश मिश्र। ऊपर बाएं से करुणेश पांडेय और अनुकल्प मिश्र। सौ- इंटरनेट मीडिया

    नीचे बाएं से सुभाष चंद्र श्रीवास्तव, रामशंकर यादव टिन्नू, लवकुश मिश्र। ऊपर बाएं से करुणेश पांडेय और अनुकल्प मिश्र। सौ- इंटरनेट मीडिया  

    HighLights

    1. चढ़ावा चोरी मामले में आठ कर्मी नामजद, विवेचना जारी।

    2. बैंककर्मी और नौकरी दिलाने वाले नेता भी जांच के दायरे में।

    3. एसआईटी को 40 दिनों में 70 बार चोरी के साक्ष्य मिले।

    लवलेश कुमार मिश्र, अयोध्या। राम मंदिर के चढ़ावा चोरी मामले में विशेष जांच दल (एसआइटी) की संस्तुतियाें के आधार पर भले अभी आठ कर्मियों को ही नामजद किया गया है, परंतु जैसे-जैसे मामले की विवेचना आगे बढ़ेगी, माना जा रहा कि कुछ नए नाम भी शामिल हो सकते हैं।

    पुलिस, आरोपितों से पूछताछ व साक्ष्यों के आधार पर ट्रस्ट या मंदिर से जुड़े अन्य लोगों के साथ उन बैंककर्मियों को भी आराेपित बनाएगी, जिनके हवाले गणना कार्य की निगरानी रही। अभी किसी बैंककर्मी पर मुकदमा नहीं हुआ है। सभी आरोपित ट्रस्ट के कर्मी या मंदिर से जुड़े सेवादार हैं।

    बताया तो यह भी जा रहा कि विवेचना में इन गणना कर्मियों को नौकरी दिलाने वालों पर भी शिकंजा कसेगा। ऐसे में कुछ सफेदपोश नेताओं के नाम भी सामने आ सकते हैं, जिनकी इनसे घनिष्ठता रही और इन्होंने पैरवी की थी।

    लगभग 20 दिनों की लंबी उठापटक व एसआइटी जांच के बाद अंतत: गुरुवार को चढ़ावा चोरी प्रकरण में पहली प्राथमिकी ट्रस्ट के सदस्य कृष्णमोहन की शिकायत पर रामजन्मभूमि थाने में दर्ज कराई गई। शुरुआत में अभी इसमें मंदिर व्यवस्था से जुड़ा रहा रामशंकर यादव टिन्नू, इसका भतीजा मनीष यादव, अनुकल्प मिश्र व इसका बहनोई लवकुश मिश्र, अविनाश शुक्ल, करुणेश पांडेय, रमाशंकर मिश्र व रिटायर्ड बैंककर्मी सुभाष चंद्र श्रीवास्तव ही नामजद किए गए हैं।

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    इनके अलावा कुछ अज्ञात भी शामिल हैं। अज्ञात का नाम पुलिस की विवेचना में सामने आएगा। यह विवेचना शासन स्तर से पुलिस क्षेत्राधिकारी अयोध्या आशुतोष त्रिपाठी को सौंपी गई है। हालांकि उन्होंने इस संबंध में अभी कुछ भी बताने से इन्कार कर दिया, परंतु इतना तो निश्चित है कि विवेचना में पुलिस इन सवालों का जवाब जरूर तलाशेगी कि इन गणना कर्मियों की नियुक्ति के लिए किसने संस्तुति की?

    किसके कहने पर इन्हें बिना सत्यापन गणना कार्य से जोड़ा गया? ट्रस्टियों ने स्वयं इन्हें ट्रस्ट कर्मी बनाया या किसी नेता के इशारे पर? सूत्रों का कहना है कि एसआइटी के सीसीटीवी फुटेज जांच में यह सामने आया है कि इन कर्मियों ने महज 40 दिनों में लगभग 70 बार धनराशि की चोरी की है। ऐसे में चोरी के दौरान भारतीय स्टेट बैंक की ओर से नियुक्त बैंककर्मी कहां रहते थे?

    क्या वे किसी के दबाव में अनदेखी करते रहे या इन आरोपितों को किसी ने ऐसा करने के लिए बाध्य किया? सीसीटीवी फुटेज को किसके इशारे पर डिलीट किया गया? एसआइटी जांच में फुटेज से छेड़छाड़ व चोरी के पर्याप्त साक्ष्य पाए गए हैं। इन परिस्थितियों में स्पष्ट है कि विवेचना के आगे बढ़ने पर कुछ नए नाम भी सामने आना निश्चित है।

    गणना कार्य की निगरानी करने वाले कर्मी सुभाष श्रीवास्तव की नियुक्ति को लेकर तो जिले के एक नेता का नाम सामने आ रहा है। वहीं, चोरी मामले के मास्टरमाइंड अनुकल्प मिश्र का जिले के कई जनप्रतिनिधियों से अच्छा संबंध रहा है। इसी रसूख के बूते ही उसने जीजा लवकुश को भी ट्रस्ट में रखवाया था। रामशंकर यादव टिन्नू की ट्रस्ट के जिम्मेदार पदाधिकारी से नजदीकियां अब सबके सामने है। ऐसी स्थिति में कई लोगों के चेहरे जांच के दौरान बेनकाब हो सकते हैं।

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    नकदी की गणना से लंबे समय से जुड़े रहे बैंककर्मी
    दानराशि की गणना का दायित्व ट्रस्ट ने स्टेट बैंक को दे रखा है। बैंक ने अपने नौ कर्मियों को नियुक्त किया है। ये लंबे समय से यही कार्य कर रहे हैं। बैंक ने बनारस की सैनिक सर्विसेज नामक कलेक्शन एजेंसी भी अधिकृत की है, जो दानपात्रों से नकदी एकत्रित करती है। इसके 25 कर्मी लगे हैं। एसआइटी जांच में यह साफ है कि गबन का खेल लंबे समय से चल रहा था। ऐसे में बैंक व कलेक्शन एजेंसी के कर्मियों की प्रत्यक्ष भूमिका को नकारा नहीं जा सकता है।

    यह संभव है कि इन कर्मियों ने जानबूझकर अनदेखी की हो, लेकिन सवाल यह भी है कि किसके इशारे पर। यह जांच का विषय है। ऐसे में जानबूझकर छिपाना भी अपराध बनेगा।