राम मंदिर चढ़ावा चोरी: ट्रस्टियों की सहमति से SIT की फाइनल रिपोर्ट पर होगी कार्रवाई, दो सितंबर को होगा फैसला
राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले की जांच कर रही एसआईटी ने अपनी अंतिम रिपोर्ट श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को सौंप दी है। यह रिपोर्ट 2 सितंबर को ट्रस्ट की बैठक में प्रस्तुत की जाएगी, जिसके बाद कार्रवाई पर निर्णय लिया जाएगा।
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ट्रस्टियों की सहमति मिलने के बाद फाइनल रिपोर्ट पर होगी कार्रवाई।
HighLights
एसआईटी ने राम मंदिर चढ़ावा चोरी की अंतिम रिपोर्ट सौंपी।
रिपोर्ट में पर्यवेक्षणीय विफलताएं और संस्थागत खामियां उजागर हुईं।
ट्रस्ट 2 सितंबर की बैठक में कार्रवाई पर निर्णय लेगा।
जागरण संवाददाता, अयोध्या। राम मंदिर के चढ़ावा चोरी मामले की जांच कर रही पहली एसआईटी (विशेष जांच दल) ने फाइनल रिपोर्ट श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को सौंप दी है। अभी इस रिपोर्ट के तथ्य आधिकारिक रूप से सामने नहीं आए हैं, परंतु बताया जा रहा कि एसआईटी ने अपनी रिपोर्ट में चढ़ावा चोरी के साथ मंदिर की अन्य व्यवस्थाओं से संबंधित पर्यवेक्षणीय विफलताएं व प्रशासनिक उत्तरदायित्व तय करके संस्थागत खामियों को इंगित किया है।
साथ ही सुधारात्मक सुझावों के संबंध में अपनी आख्या दी है। अब यह रिपोर्ट दो सितंबर को प्रस्तावित ट्रस्ट की बैठक में प्रस्तुत की जाएगी। विचारोपरांत ट्रस्टी इस रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई का निर्णय लेंगे। इसमें बैंक से अनुबंध पर विचार हो सकता है और व्यवस्था में संलग्न रहे लोगों पर कार्रवाई संभावित है।
गत पांच जून को चढ़ावे की धनराशि की गणना के दौरान चोरी उजागर होने के बाद ट्रस्ट ने प्रदेश सरकार से विस्तृत जांच कराने का अनुरोध किया था। लखनऊ कमिश्नर विजय विश्वास पंत के निर्देशन मेें तीन सदस्यीय विशेष जांच दल गठित करके राज्य सरकार ने 13 जून को जांच का आदेश दिया था। एसआईटी ने 15 जून से जांच शुरू कर 23 जून को प्रारंभिक रिपोर्ट सौंपी थी।
इसी के आधार पर ट्रस्ट ने 25 जून को प्राथमिकी दर्ज कराकर आठ कर्मियों को जेल भेजा था। इसमें छह गणना कर्मी, ताे दो ट्रस्ट कर्मी रहे। प्रारंभिक रिपोर्ट में एसआईटी ने ट्रस्ट के पूर्व सदस्य डॉ. अनिल मिश्र पर निगरानी व प्रशासनिक दायित्व में अक्षमता को स्पष्ट किया था।
साथ ही उनका पर्यवेक्षणीय दायित्व निर्धारित करते हुए यह भी बताया था कि ट्रस्ट व भारतीय स्टेट बैंक ने गणना के लिए मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) तो निर्धारित की थी, इस पर डॉ. अनिल मिश्र व बैंक प्रबंधक गोविंद मिश्र के संयुक्त हस्ताक्षर भी रहे, परंतु इनका अनुपालन किसी भी स्तर पर नहीं मिला।
हालांकि, दर्ज प्राथमिकी में न तो ट्रस्ट के किसी पदाधिकारी का नाम रहा, न ही बैंक कर्मियों का। एसआईटी ने दो बैंक कर्मियों के नाम का भी उल्लेख किया था। इसके दो दिन बाद ट्रस्ट ने दोनों पदाधिकारियों के त्यागपत्र ले लिए थे।
अब जबकि एसआईटी ने अंतिम रिपोर्ट सौंप दी है, तो माना जा रहा कि इसके निष्कर्षों के आधार पर ट्रस्ट कोई विधिक या प्रशासनिक कार्रवाई करेगा, परंतु इससे पहले इस रिपोर्ट पर विस्तृत विमर्श होगा। यह दो सितंबर को ट्रस्ट की बैठक में संभावित है।
सूत्रों ने बताया कि इस रिपोर्ट में भी डॉ. अनिल मिश्र पर पर्यवेक्षणीय दायित्व नहीं निभाने और लापरवाही बरतने का आरोप है, जबकि पूर्व महासचिव चंपतराय को स्पष्ट रूप से दोषी नहीं ठहराया गया है। इस संबंध में ट्रस्ट के अंतरिम महासचिव कृष्ण मोहन से संपर्क नहीं हो सका। वहीं, ट्रस्टी महांत दिनेंद्रदास ने कहाकि दूरभाष पर इस संबंध में कोई बात नहीं करेंगे।
