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    राम मंदिर चढ़ावा चोरी : कहीं अधिक रकम तो नहीं हो रही पार... इसलिए चक्कर लगाता था टिन्नू यादव

    Updated: Fri, 03 Jul 2026 06:55 AM (GMT+05:30)

    राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में गिरफ्तार रामशंकर यादव टिन्नू गोपनीय कक्ष तक बेरोकटोक आता-जाता था। उसने पुलिस को बताया कि वह यह देखने जाता था कि कहीं ग ...और पढ़ें

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    HighLights

    1. टिन्नू यादव गोपनीय कक्ष तक बेरोकटोक आता-जाता था।

    2. उसने कहा, गणनाकर्मी अधिक रकम तो नहीं निकाल रहे थे।

    3. टिन्नू का भाई, बड़े लोगों को बचाने का आरोप।

    लवलेश कुमार मिश्र, अयोध्या। राम मंदिर के चढ़ावा चोरी प्रकरण में गिरफ्तार राम्शंकर यादव टिन्नू की गणना कार्य में ड्यूटी भले नहीं थी, लेकिन वह यात्री सुविधा केंद्र (पीएफसी) के गोपनीय कक्ष तक बेरोकटोक आता-जाता था। उसने यह बात पुलिस की पूछताछ में स्वीकार की है। यह भी बताया कि वह क्यों वहां जाता था। वह अचानक यह देखने पहुंचता था कि कहीं गणनाकर्मी अधिक रकम तो नहीं पार कर रहे हैं।

    बताया जा रहा है कि पूरा नेटवर्क तो उसी का काम कर रहा था, लेकिन इसमें मुख्य सहयोगी अनुकल्प मिश्र रहा। वह वेतन तो संविदाकर्मी के रूप में बैंक से लेता रहा, परंतु ट्रस्टियों के साथ मिल कर अपने साथ वाले कर्मियों की ड्यूटी एक ही शिफ्ट में लगवाता था। इसमें सुभाषचंद्र श्रीवास्तव भी सहयाेग करता रहा। इसी की ड्यूटी गणना की निगरानी में थी।

    प्रत्येक स्थान पर रहता था दखल

    एसआइटी की प्रारंभिक रिपोर्ट की संस्तुतियों के आधार पर गत 25 जून को दर्ज एफआइआर में आठ कर्मियों को आरोपित बनाया गया है। इनमें से एक आरोपित रामशंकर यादव टिन्नू का गणना कार्य से प्रत्यक्ष लेना-देना नहीं था। वह मंदिर व्यवस्था का सहयोगी कर्मी था, लेकिन दखल प्रत्येक स्थान पर रहता था।

    यहां तक कि दिनभर में तीन-चार बार वह राम मंदिर से 300 मीटर दूर परिसर में स्थित पीएफसी में आता-जाता था। सूत्रों ने बताया कि पूछताछ के दौरान पुलिस ने इसी गुत्थी को सुलझाने का प्रयास किया, तो उसने बताया कि वह यह देखने जाता था कि सब ठीक चल रहा है या नहीं? कहीं ऐसा तो नहीं हो रहा कि ज्यादा रकम निकल जा रही हो और उसे पता न चले।

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    सूत्र बताते हैं कि थोड़ा-थोड़ा करके नोटों की गड्डियां जेब व मोजे में छिपा कर निकाली जाती थी और बाथरूम में छिपा दी जाती थी, फिर शाम को निकलते समय सुरक्षाकर्मियों की नजरों से बचा कर इस राशि को कौशलपुरी तक पहुंचाया जाता था, लेकिन टिन्नू व उसके भतीजे मनीष का हिस्सा उसे पहले ही मिल जाता था। कौशलपुरी में ही कुछ दूरी पर अनुकल्प मिश्र व अविनाश शुक्ल रहते थे।

    सूत्रों का कहना है कि यदि किन्हीं कारणों से किसी दिन पीएफसी से रकम नहीं निकल पाती थी, तो इसे बैंक में जमा कराते समय अधिक नकदी ले जाकर चुरा लिया जाता था। कोई भी ऐसा दिन नहीं गुजरता था, जब 100 या 500 के नोटों के 15-20 बंडल न निकलते रहे हों। एक बंडल लगभग एक लाख रुपये का बनता था। ये लोग सिक्कों का झोला नहीं पार करते थे। इसे बाहर ले जाना मुश्किल रहता था। अभी तक यह स्पष्ट नहीं हुआ है कि इस चोरी में बैंककर्मियों का कितना सहयोग रहता था और उन्हें कितना हिस्सा मिलता था।

    छोट़े लोगों को फंसा कर बड़ों को बचाया जा रहा

    टिन्नू यादव के बड़े भाई दिनेश यादव ने श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के सदस्यों पर सीधे तौर पर आरोप लगाते हुए कहा है कि उनके भाई को फंसाया जा रहा है। इस मामले में छोटे लोगों को फंसा कर बड़े लोगों को बचाया जा रहा है। टिन्नू यादव ट्रस्ट का अध्यक्ष तो था नहीं कि सारा दोष उसी पर मढ़ा जा रहा है। बड़े लोगों की जांच क्यों नहीं हो रही है? उन्हें क्यों बचाया जा रहा है।