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‘चंपतराय को बचाने के लिए क्लीन चिट…’, राम मंदिर चढ़ावा चोरी के स्टार विटनेस महिपाल का बड़ा खुलासा

Updated: Wed, 19 Aug 2026 03:47 PM (GMT+05:30)

महिपाल सिंह, जो 52 वर्षों से संघ के स्वयंसेवक रहे हैं, राम मंदिर चढ़ावा चोरी प्रकरण में स्टार गवाह बनकर उभरे हैं।

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प्रहलाद तिवारी, अयोध्या। राम मंदिर में चढ़ावा चोरी प्रकरण के स्टार विटनेस बन कर उभरे महिपाल सिंह श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पूर्व लेखा (अकाउंट्स) प्रभारी रहे हैं। इसके साथ ही उनके पास सह कार्यालय प्रमुख का दायित्व रहा। वह आरएसएस की पृष्ठभूमि से ही पल्लवित हुए।

कौन हैं महिपाल सिंह?

राजस्थान के कोटा में 1959 में जन्मे महिपाल सिंह राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के कार्यों व विचारों से किशोरावस्था में कदम रखते ही प्रभावित हो गए। यही कारण रहा कि महज नौ वर्ष की आयु में वर्ष 1968 में उन्होंने संघ में बाल स्वयंसेवक के रूप में प्रवेश पा लिया। उसके बाद वह निरंतर कोटा में संघ की शाखाओं को लगवाने से लेकर कार्यक्रमों में प्रमुखता से अपनी सहभागिता निभाने लगे।

शुरू से ही मेधावी छात्र रहे महिपाल सिंह को 21 वर्ष की आयु पूर्ण होते ही बैंक में नौकरी लग गई। सहकारी बैंक में वह वर्ष 2019 तक कार्यरत रहे और 39 वर्षों तक बैंक के कैशियर से लेकर क्षेत्रीय अधिकारी पद पर अपनी सेवाएं दीं। इस बीच भी वह लगातार संघ व विहिप के विभिन्न दायित्वों का निर्वहन करते रहे।

सरकारी सेवा से रिटायर्ड होने के बाद वह संघ में फिर से पूर्ण रूप से सक्रिय हो गए। राम मंदिर निर्माण निधि संग्रह अभियान में उनको संघ ने प्रमुख जिम्मेदारी दी। उनको अभियान के तहत कोटा विभाग क्षेत्र का प्रभारी बनाया गया है। 55 संग्रहकर्ता धनराशि को उनके पास जमा करते थे।

चढ़ावे की गणना से हटाए गए थे महिपाल

दैनिक जागरण से दूरभाष पर उन्होंने बताया कि श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में एक कार्य के लिए उनको अयोध्या बुलाया गया। यहां पर 10 माह से दान व निधि समर्पण की रसीदें नहीं जारी हो पा रही थी। इसके समाधान की जिम्मेदारी महिपाल को सौंपी गई। उनको ट्रस्ट का लेखाधिकारी व सहकार्यालय प्रमुख का दायित्व दिया गया।

ट्रस्ट में उनका कार्यकाल जनवरी 2021 से मई/जुलाई 2022 के बीच राम कचहरी कार्यालय में लेखा प्रभारी के रूप रहा। उन्होंने बताया है कि वह जनवरी 2021 से जुलाई 2022 तक राम मंदिर ट्रस्ट में काम कर रहे थे, लेकिन मार्च 2022 में ही उनसे चढ़ावे की गणना से हटा दिया गया।

राम मंदिर में चढ़ावा चोरी झंझावात के बीच सर्वाधिक चर्चा में आए महिपाल सिंह ने मंदिर के दान और चढ़ावे में अनियमितताओं व गड़बड़ियों को लेकर बड़े राजफाश किए। उनका कहना है कि वह किसी राजनीतिक पार्टी से प्रेरित नहीं हैं, उनका वैचारिक परिवार राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ है। उन्होंने दो संघ कार्यालय कोटा व उदयपुर के प्रभारी का दायित्व निभाया। साथ ही वह विश्व हिंदू परिषद में राजस्थान के प्रांत सहसेवा प्रमुख भी रहे।

चंपतराय की वापसी के लिए रची जा रही क्लीन चिट की पृष्ठभूमि

महिपाल सिंह आज भी अपनी बातों पर कायम है। बुधवार को दैनिक जागरण को उन्होंने बताया कि पुरानी एसआईटी ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपतराय व ट्रस्टी डाॅ. अनिल मिश्र को क्लीन चिट दे ही नहीं सकती। दो सितंबर को होने वाली बैठक में चंपतराय की वापसी के लिए क्लीन चिट की पृष्ठभूमि तैयार की जा रही है।

उन्होंने दोहराया कि वर्ष 2021 से 22 तक की आडिट रिपोर्ट में कई तरह के आक्षेप लगे हैं, जिनका ट्रस्ट ने निराकरण ही नहीं किया। गणना कर्मियों की तैनाती के बारे में बताते हुए कहा कि वाराणसी की एक एजेंसी को गणनाकर्मी रखे थे, लेकिन नियुक्ति चंपतराय व टिन्नू यादव करते थे। गणनाकर्मी रहे मनीष यादव का उदाहरण भी दिया। उन्होंने दावा किया एक भी गणनाकर्मी को बैकिंग ज्ञान नहीं था। इन लोगों ने खोज-खोज कर अपने भरोसे के लोगों को रखा।

उन्होंने चढ़ावे में हेराफेरी का आरोप लगाते हुए बताया कि गिनती के दौरान नोटों के बंडल कम दिखाए जाते थे और अधिक मात्रा में पैसे निकाले जाते थे। दान पेटियों से निकलने वाली बहुमूल्य धातुओं (सोना-चांदी) की उचित रसीद या प्रविष्टि (एंट्री) न किए जाने के भी आरोप लगाए।

साथ ही राम मंदिर निर्माण की शुरुआती अनुमानित लागत (लगभग 800 करोड़ रुपये) के मुकाबले बढ़कर करीब 2,200 करोड़ रुपये खर्च होने की बात कही।

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