चढ़ावा चोरी मामला: राम मंदिर ट्रस्ट ने माना, मीडिया से संवादहीनता से बिगड़ा मामला, अब नियुक्त होगा नया प्रवक्ता
राम मंदिर ट्रस्ट ने स्वीकार किया कि चढ़ावा चोरी मामले में मीडिया से संवादहीनता के कारण विवाद बढ़ा। अब ट्रस्ट ने भविष्य में ऐसी चूक से बचने के लिए एक न ...और पढ़ें

राम मंदिर
HighLights
ट्रस्ट ने चढ़ावा चोरी मामले में संवादहीनता स्वीकार की।
मीडिया से दूरी ने विवाद को और बढ़ाया।
भविष्य के लिए नया प्रवक्ता नियुक्त करने का निर्णय।
लवलेश कुमार मिश्र, अयोध्या। चढ़ावा चोरी मामले को लेकर जिस बात की चर्चा रामनगरी और इंटरनेट मीडिया पर काफी पहले शुरू हो गई थी, उसे श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने लगभग डेढ़ माह बाद स्वीकारा। वह भी तब जब एसआईटी की प्रारंभिक जांच के बाद प्राथमिकी दर्ज होने पर पुलिस ने अलग से जांच शुरू कर दी।
गत दिनों ट्रस्ट की बैठक में ट्रस्टियों के बीच इस बिंदु पर विस्तृत विमर्श हुआ, सदस्यों ने स्पष्ट राय रखी और चूक को स्वीकारते हुए यह कहा कि अगर चोरी खुलने के तुरंत बाद मीडिया में इसे स्पष्ट करके जांच शुरू करा दी जाती, तो विवाद इतना विकराल रूप न लेता। कई ट्रस्टियों ने माना कि मीडिया से संवादहीनता से ही चोरी प्रकरण ने तूल पकड़ा।
राम मंदिर के दानपात्रों की धनराशि की गणना के दौरान चोरी होने की सूचना पांच जून को उजागर हुई। यह जानकारी तो सार्वजनिक हो गई थी और इंटरनेट मीडिया पर चर्चा भी होने लगी थी, लेकिन ट्रस्टियों ने इसे छिपाए रखा और अपने स्तर पर ही पुलिस के सहयोग से आंतरिक जांच शुरू करा कर रिकवरी भी कराने लगे।
सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने ट्वीट किया, तो जवाब में पूर्व महासचिव चंपतराय ने आंतरिक ऑडिट की बात तो स्वीकारी, लेकिन कुछ भी उल्लेखनीय नहीं मिलने की बात कही। मामला यहीं से बिगड़ा और एक के बाद एक नए घटनाक्रम प्रतिदिन सामने आने लगे, परंतु ट्रस्ट स्तर पर इसे स्वीकार नहीं किया गया।
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लगभग सप्ताह भर बाद जब यह प्रकरण सुर्खियों में छाया तो राज्य सरकार ने ट्रस्ट के अनुरोध पर एसआईटी गठित कर जांच शुरू करा दी, तो मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र ने सामने आकर बहुत कुछ सार्वजनिक कर दिया। सूत्रों का कहना है कि गत 22 जुलाई की बैठक में यह मुद्दा उठा तो कुछ ट्रस्टियों का मत रहा कि यदि उसी समय पूर्व महासचिव या कोई अन्य सदस्य मीडिया में सामने आकर इसे स्पष्ट करता और जांच शुरू करा दी जाती, तो इतनी चर्चा नहीं होती और मंदिर ट्रस्ट को इस विषम परिस्थिति का सामना नहीं करना पड़ता।
मीडिया से यह संवादहीनता आगे भी न बनी रहे, इसके लिए विमर्श के पश्चात ट्रस्टियों ने एक प्रवक्ता की नियुक्ति का निर्णय लिया है। यह प्रवक्ता अयोध्या का ही स्थानीय व्यक्ति होने की संभावना है।
चाहे वह ट्रस्ट का हो या फिर विहिप व संघ का कोई पदाधिकारी प्रवक्ता बनाया जाए। इसकी नियुक्ति और ट्रस्ट के नए सदस्यों का मनोनयन दो सितंबर को प्रस्तावित अगली बैठक में होने की संभावना है।
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