राम मंदिर ट्रस्ट और SBI के बीच खत्म हो सकता है करार, इन दो बैंकों से अनुबंध पर किया जा रहा विचार
श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट और भारतीय स्टेट बैंक के बीच चढ़ावा चोरी मामले को लेकर विवाद बढ़ गया है। ट्रस्ट एसबीआई से चढ़ावा गणना का अनुबंध सम ...और पढ़ें

राम मंदिर ट्रस्ट और एसबीआई का खत्म हो सकता है करार।
लवलेश कुमाार मिश्र, अयोध्या। चढ़ावा चोरी मामले से श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट और भारतीय स्टेट बैंक के बीच खटास बढ़ गई है। ऐसा तब हुआ, जब गत दिनों ट्रस्ट के न्यासी मंडल ने बैंक की प्रतिक्रिया और गंभीरता के अभाव को आधार बनाते हुए निराशा प्रकट की।
ट्रस्टियों ने अप्रत्यक्ष रूप से चोरी को लेकर सारा दोष बैंक पर ही मढ़ दिया। इसी के बाद कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंददेव गिरि ने दो बैंक प्रतिनिधियों को बुलाकर उनसे बातचीत की है।
इस घटनाक्रम के पश्चात यह संभावना जताई जाने लगी है कि ट्रस्ट गणना का दायित्व किसी दूसरे बैंक को सौंप कर एसबीआई से अनुबंध खत्म कर सकता है। हालांकि यह भी चर्चा है कि दूसरे बैंक को भी जोड़ा जा सकता है, लेकिन इसकी संभावना कम है।
जून के महीने में चढ़ावा चोरी केस आया सामने
जून महीने में चढ़ावा में चोरी सामने आई, तो एसआईटी जांच में यह तथ्य सामने आया कि ट्रस्ट व बैंक के बीच हुए अनुबंध में निर्धारित हुई मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) का किसी भी स्तर पर अनुपालन नहीं हुआ, जिसका लाभ उठाकर गणना कर्मियों ने चोरी को लगातार अंजाम दिया।
हालांकि एसआईटी ने इसको लेकर ट्रस्टियों की भूमिका को भी संदेहास्पद बताया है, परंतु 22 जुलाई को हुई ट्रस्टियों की बैठक में समस्त अनियमितताओं के लिए बैंक को ही जिम्मेदार ठहरा दिया गया।
दूसरी ओर, सूत्रों का कहना है कि दोनों के बीच हुए अनुबंध के अनुसार गणना कक्ष की सुरक्षा ट्रस्ट के जिम्मे रही और निगरानी का दायित्व संयुक्त रहा था। बावजूद इसके केवल बैंक को ही दोषी ठहराए जाने को बैंक के उच्चाधिकारी भी अनुचित मानते हैं।
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एसओपी का नहीं किया गया पालन
वहीं, मंदिर से जुड़े लोगों का तर्क है कि जब एसओपी का पालन नहीं हो रहा था और ट्रस्टियों के स्तर से कर्मियों की जांच या निगरानी नहीं कराई जा रही थी, तो बैंक अधिकारियों को भी विरोध करना चाहिए था। कभी न तो बैंक, न ही ट्रस्ट स्तर से एसओपी के पालन का प्रयास किया गया।

ऐसे में दोनों स्तरों पर ही अनियमितता बरती गई है। ट्रस्ट से जुड़े लोग बताते हैं कि जल्द ही दानराशि को लेकर नया निर्णय लिया जाएगा। इसमें भारतीय स्टेट बैंक से गणना का दायित्व हटाने की बात भी हो रही है।
एसबीआई से अनुबंध हो सकता है समाप्त
सूत्रों ने बताया कि गत दिनों कोषाध्यक्ष की ICICI व HDFC बैंक के प्रतिनिधियों से मुलाकात इसी के लिए ही थी। हालांकि दो बातें भी हो रही हैं कि या तो ट्रस्ट एसबीआई से गणना का अनुबंध समाप्त कर लेगा, या फिर एक बैंक और जोड़ दिया जाएगा।