राम मंदिर चढ़ावा चोरी: आठों आरोपितों की रिमांड 14 दिन और बढ़ी, अभी आरोप पत्र दाखिल नहीं
अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में आठों आरोपितों की न्यायिक रिमांड 14 दिनों के लिए बढ़ा दी गई है। ...और पढ़ें

HighLights
आठों आरोपितों की न्यायिक रिमांड 14 दिन और बढ़ी।
पुलिस ने 72 दिन बाद भी आरोप पत्र नहीं दिया।
यह सातवीं बार है जब आरोपितों की रिमांड बढ़ी।
जागरण संवाददाता, अयोध्या। राम मंदिर चढ़ावा चोरी के आठों आरोपितों की न्यायिक रिमांड शनिवार को पुन: 14 दिनों के लिए बढ़ा दी गयी है। जेल में निरुद्ध आठो आरोपित अविनाश शुक्ल, मनीष यादव, रमाशंकर मिश्र, अनुकल्प मिश्र, लवकुश मिश्र, करुणेश पांडेय, रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू व सुभाषचंद्र श्रीवास्तव शनिवार को जेल से वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से विशेष न्यायाधीश भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के समक्ष पेश किए गए।
सभी की न्यायिक हिरासत 18 सितंबर तक बढ़ा दी गयी है। प्रकरण में पुलिस को विवेचना करते लगभग 72 दिन हो चुके हैं। पुलिस ने अभी आरोप पत्र प्रस्तुत नहीं किया है। आरोपितों की यह रिमांड सातवीं बार बढ़ाई गई है।
इसी बीच आरोपितों की ओर से पुलिस पर गलत धाराओं में रिमांड लेने और बरामदगी पर सवाल उठाते हुए एक अर्जी न्यायालय में दी गई थी, जोकि निरस्त कर दी गई। वहीं, पुलिस सभी आरोपितों को रिमांड पर लेकर पूछताछ व उनकी निशानदेही पर संदिग्ध ठिकानों पर ले जाकर कई बहुमूल्य वस्तुओं को बरामद कर चुकी है।
चढ़ावा चोरी के आरोपितों ने प्रस्तुत की जमानत अर्जी, कोर्ट ने मांगी आख्या
अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावा चोरी के आरोप में बीती 26 जून से जेल में निरुद्ध आठों आरोपितों की ओर से शनिवार को जमानत अर्जी विशेष न्यायाधीश भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के न्यायालय में प्रस्तुत की गई। आरोपितों की ओर से लगभग यह अर्जी 72 दिनों बाद प्रस्तुत की है। न्यायालय ने इसे दर्ज करते हुए थाने से आख्या तलब कर ली है।
स्वयं को निर्दोष बता रहे आरोपित
आरोपित अविनाश शुक्ल, मनीष यादव, रमाशंकर मिश्र, अनुकल्प मिश्र, लवकुश मिश्र, करुणेश पांडेय, रामशंकर यादव व सुभाष श्रीवास्तव ने जमानत अर्जी प्रस्तुत करते हुए स्वयं को निर्दोष बताया है। आरोप लगाया है कि विवेचक द्वारा यह निर्णय नहीं लिया जा सका है कि किस व्यक्ति ने मंदिर परिसर से कितनी धनराशि की चोरी की है।
ट्रस्ट ने दी बरामदगी की जानकारी, वो भी रिपोर्ट में शामिल
वहीं, जमानत अर्जी में एसआईटी की उस रिपोर्ट का भी उल्लेख किया है जिसमें ट्रस्ट ने स्वयं लगभग 81.19 लाख रुपये, विदेशी मुद्राएं, आभूषण तथा अन्य बहुमूल्य वस्तुओं को बरामद करने की बात कही। साथ ही विवेचक ने उन्हीं बरामद वस्तुओं को ट्रस्टी व वादी मुकदमा कृष्णमोहन के कब्जे व नियंत्रण वाले लाकर से 26 जून को ही आरोपितों से बरामद दिखाकर चोरी की वस्तु बताया है।
निरस्त कर दी अर्जी
अर्जी में इसी बरामदगी को संदिग्ध करार दिया गया है। आरोप लगाया कि ट्रस्ट के बड़े पदाधिकारियों को बचाने के लिए आरोपितों के कंधे का प्रयोग किया है। आरोपितों की ओर से इसके पूर्व कई ऐसे दांव चले गए, जिनमें गिरफ्तारी, रिमांड की धाराओं तथा पुलिस की कार्यशैली पर गंभीर आरोप लगाए गये थे। हालांकि, न्यायालय ने आरोपितों की उस अर्जी को निरस्त कर दिया है।
