विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

राम मंदिर ट्रस्ट के पुनर्गठन में संघ की छाप: तीन नए न्यासियों का चयन, RSS और विहिप का बढ़ा प्रभाव

Published: Fri, 04 Sep 2026 10:06 AM (IST)

श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पुनर्गठन में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) और संबद्ध संगठनों की मजबूत उपस्थिति स्पष्ट दिख रही ...और पढ़ें

अयोध्या राम मंदिर।

अयोध्या राम मंदिर।

HighLights

  1. ट्रस्ट पुनर्गठन में आरएसएस और संबद्ध संगठनों की मजबूत उपस्थिति।

  2. तीन नए न्यासी संघ की विचारधारा से गहरे जुड़े हुए हैं।

  3. डॉ. निर्मला यादव पहली महिला न्यासी, संघ परिवार से संबंध।

रमाशरण अवस्थी, अयोध्या। श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पुनर्गठन के बाद नई तस्वीर में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) व उससे जुड़े संगठनों की उपस्थिति की मौजूदगी स्पष्ट नजर आ रही है।

बुधवार को मणिरामदास छावनी में हुई ट्रस्ट की अहम बैठक में तीन नए न्यासियों के चयन से ट्रस्ट के स्वरूप में महत्वपूर्ण बदलाव आया है। नए चेहरों में दो का जुड़ाव सीधे तौर पर संघ व संबद्ध संगठनों से रहा है, जबकि तीसरे न्यासी को भी संघ व विहिप का करीबी माना जाता है।

तीनों नए चेहरों की पृष्ठभूमि और उनकी पूर्व संगठनात्मक भूमिकाओं के कारण ट्रस्ट के पुनर्गठन में संघ की छाप साफ परिलक्षित हो रही है। नए ट्रस्टी महेश भागचंदका व मदन मोहन पांडेय ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपतराय के करीबी माने जाते हैं। इन दोनों के चयन में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

नए ट्रस्टी बनाए गए मदनमोहन पांडेय लंबे समय तक उच्च न्यायालय से उच्चतम न्यायालय तक विहिप व रामलला के अधिवक्ता रहे। रामलला की ओर से पैरवी करने वाले अधिवक्ताओं में उनका नाम प्रमुख रहा। वह वर्ष 1973 में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (अभाविप) के फैजाबाद नगर के मंत्री रहे। ऐसे में ट्रस्ट में उनकी इंट्री को मंदिर आंदोलन से जुड़े पुराने नेटवर्क की निरंतरता के तौर पर देखी जा रही है।

शिकोहाबाद की डा. निर्मला यादव ट्रस्ट में पहली महिला न्यासी बनी हैं। उनकी पृष्ठभूमि भी संघ से जुड़े शिक्षक संगठन राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ से जुड़ी है। वह संगठन में अखिल भारतीय संपर्क प्रमुख की जिम्मेदारी संभाल रही हैं। पहले यूपी में संगठन की कोषाध्यक्ष रहीं।

C-439-1-LKO1050-516472

उनका परिवार संघ के करीब है। फिरोजाबाद जिले के शिकोहाबाद में स्थित उरावर स्टेट यादव जमींदारों की प्रतिष्ठित रिसायत रही है। उरावर हाउस का इतिहास देश सेवा, सैन्य योगदान, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और राममंदिर आंदोलन से जुड़ा रहा है।

इसी स्टेट की बहू शिक्षाविद् डॉ. निर्मला यादव हैं। उनके ससुर सूर्यकुमार यादव भारतीय वायुसेना में स्क्वाड्रन लीडर के पद से सेवानिवृत्त हुए थे। सेवानिवृत्ति के बाद आरएसएस में सक्रिय हुए और संघ के विभाग संचालक के दायित्व का निर्वहन किया। पति हरेंद्र यादव भी संघ की विचारधारा से जुड़े रहे। वर्ष 1980 से 2002 तक आरएसएस में सक्रिय रहे हरेंद्र वर्ष 1992 के राममंदिर आंदोलन के दौरान जेल भी गए थे।

दिल्ली के महेश भागचंदका विश्व हिंदू परिषद के पूर्व अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष अशोक सिंघल के करीबी रहे। विहिप की कार्यशैली को करीब से देखा भी और बाद में सक्रिय भी हुए। राम मंदिर से जुड़े महत्वपूर्ण आयोजनों में उनकी सक्रियता रही है। गवर्निंग काउंसिल वर्ल्ड हिन्दू इकोनामिक फोरम के सदस्य है।

साथ ही कई सामाजिक, धार्मिक आयोजन से निरंतर जुड़े हुए हैं। वे बाल्यकाल से ही स्वयंसेवक रहे हैं। उन्हें राम जन्मभूमि मंदिर निर्माण भूमि पूजन व श्री राम लला प्राण प्रतिष्ठा समारोह में सहभागिता का दुर्लभ सौभाग्य प्राप्त हुआ, जहां उन्होंने यजमान के रूप में पवित्र अनुष्ठानों में भाग लिया।

दो शीर्ष महत्वपूर्ण पदों पर देवरिया का दबदबा

श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पहले मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) एयर मार्शल (सेवानिवृत्त) जितेंद्र मिश्र के अलावा राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र भी देवरिया जिले के रहने वाले हैं। इस तरह मंदिर निर्माण और ट्रस्ट के संचालन से जुड़े दोनों अहम दायित्वों पर देवरिया की महत्वपूर्ण भागीदारी है। सूत्रों के अनुसार, दोनों की पारिवारिक पृष्ठभूमि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़ी रही है।

हालांकि, दोनों की नियुक्ति में उनके लंबे प्रशासनिक, सुरक्षा, प्रबंधन और संचालन संबंधी अनुभव को भी प्रमुख आधार माना गया है। नृपेंद्र मिश्र प्रशासनिक सेवा में लंबे अनुभव के बाद राम मंदिर निर्माण समिति की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं।

यह भी पढ़ें- अयोध्या में बनेगी नई फूड स्ट्रीट, गुरु गोविंद सिंह चौक फव्वारे का होगा जीर्णोद्धार