राममंदिर ट्रस्ट: अंतरिम महासचिव बने कृष्णमोहन, चयन में निहित ‘सबके राम’ का संदेश; IFS से हुए रिटायर्ड
रामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने दिवंगत कामेश्वर चौपाल के स्थान पर कृष्णमोहन को अंतरिम महासचिव नियुक्त किया है। अनुसूचित जाति से आने वाले कृष्णमोहन ...और पढ़ें

राम मंदिर ट्रस्ट के अंतरिम महासचिव बने कृष्णमोहन।
HighLights
कृष्णमोहन रामजन्मभूमि ट्रस्ट के अंतरिम महासचिव नियुक्त।
दिवंगत कामेश्वर चौपाल का स्थान लेंगे कृष्णमोहन।
उनका चयन 'सबके राम' संदेश का प्रतीक।
नवनीत श्रीवास्तव, अयोध्या। रामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने दिवंगत कामेश्वर चौपाल का स्थान लेने वाले कृष्णमोहन को अंतरिम महासचिव बना कर सामाजिक ताने-बाने को भी बखूबी साधा। अनुसूचित जाति से आने वाले कृष्णमोहन को कामेश्वर चौपाल के निधन के बाद गत वर्ष ही ट्रस्ट का सदस्य बनाया गया था।
कृष्णमोहन के रूप में ट्रस्ट महासचिव के चयन में ‘सबके राम’ का संदेश भी निहित है। साथ ही ट्रस्ट ने लोगों से सभी वर्गों को समान सम्मान और अवसर देने का संवाद भी स्थापित किया। यह भी कि राममंदिर केवल आस्था का केंद्र नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, समरसता और सामाजिक एकता का भी प्रतीक है।
इंडियन फारेस्ट सर्विस के अधिकारी रह चुके हैं कृष्णमोहन
राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के अत्यंत भरोसेमंद कृष्णमोहन इंडियन फारेस्ट सर्विस के अधिकारी भी रह चुके हैं। प्रशासनिक अनुभव रखने वाले 73 वर्षीय कृष्णमोहन हरदोई के रहने वाले हैं और आरएसएस में पूर्वी उत्तर प्रदेश के संघचालक भी हैं। उन्होंने लखनऊ विश्वविद्यालय से एमएससी की पढ़ाई पूरी की। वर्ष 1952 में जन्मे कृष्ण मोहन का आरएसएस से जुड़ाव महाराष्ट्र में नौकरी के दौरान हुआ। अब महासचिव के रूप में वह ट्रस्ट की प्रशासनिक गतिविधियों के समन्वय, क्रियान्वयन तथा विभिन्न सामाजिक कार्यक्रमों के संचालन में प्रमुख भूमिका में दिखेंगे।
अनुसूचित जाति से आते हैं राममंदिर ट्रस्ट के अंतरिम महासचिव
ट्रस्ट का यह निर्णय समाज के विभिन्न वर्गों को साथ लेकर चलने की दिशा में भी महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। उनके चयन में यह संदेश भी है कि राममंदिर आंदोलन शुरू से ही ‘सबके राम’ की अवधारणा पर आधारित रहा।
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पूर्व सीएमओ डॉ. नानक सरन कहते हैं, निषादराज, वाल्मीकि और शबरी को प्रभु राम ने जिस सम्मान से अपनाया था, कृष्ण मोहन का अंतरिम महासचिव के पद पर मनोनयन उसी भाव का विस्तार है। यूं भी आरएसएस और विहिप राममंदिर को मात्र धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि राष्ट्रीय एकता का केंद्र बताता रहा है।