राम मंदिर चढ़ावा चोरी: SIT की दोबारा जांच से बढ़ेंगी कइयों की मुश्किलें, सामने आ सकते हैं नए चेहरे
सुप्रीम कोर्ट ने राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में नई एसआईटी से दोबारा जांच का आदेश दिया है। इससे कई बैंक अधिकारियों और ट्रस्ट पदाधिकारियों सहित नए चेहर ...और पढ़ें

चढ़ावा चोरी: SIT की दोबारा जांच से बढ़ेंगी कइयों की मुश्किलें।

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
लवलेश कुमार मिश्र, अयाेध्या। राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले को लेकर उच्चतम न्यायालय के नए आदेश ने कइयों को बेचैन कर दिया है। न्यायालय के आदेश पर अगर इस मामले की दोबारा जांच हुई, तो न केवल यह अधिक प्रभावी होगी, बल्कि अब तक की जांच व पूछताछ से बच गए लोगों पर भी कार्रवाई होने के आसार बढ़ जाएंगे।
कोर्ट का यह आदेश ट्रस्ट के उन पदाधिकारियों को भी मुश्किलों में डालेगा, जिन पर तमाम सवाल उठते रहने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हुई है। माना जा रहा कि एसआईटी की दोबारा होने वाली जांच में आरोपितों की संख्या भी बढ़ सकती है।
अब तक उन बैंक अधिकारियों या कर्मचारियों पर कोई कार्रवाई नहीं हुई, जिन पर दानराशि की गणना का समस्त दायित्व था, फिर भी इनकी निगरानी में हर कदम पर लापरवाही बरती गई।
नई एसआईटी की टीम करेगी जांच
राज्य सरकार के आदेश पर चढ़ावा चोरी की जांच कर रही एसआईटी की अंतिम रिपोर्ट आने से पहले ही, 20 जुलाई 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने हस्तक्षेप करते हुए अब तक की जांच व कार्रवाई से असंतुष्टि जताकर नए सिरे से जांच कराने और अनुभवी आईपीएस अधिकारी के नेतृत्व में एसआईटी गठित करने का आदेश दे दिया है।
न्यायालय का यह आदेश सार्वजनिक होते ही उन रामभक्तों के चेहरों पर प्रसन्नता छा गई, जिन्हें राम मंदिर में चढ़ावा चोरी उजागर होते ही गहरा आघात लगा था। वहीं, ऐसे लोग सशंकित भी हो उठे हैं, जो एसआईटी व पुलिस की जांच के बाद भी कार्रवाई के दायरे से बाहर हैं और ऐसे लोगों पर प्राथमिकी भी दर्ज नहीं हुई।
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सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने दिया आदेश
सोमवार को अदालत के आदेश को लेकर मंदिर परिसर से लेकर रामनगरी तक, चहुंओर इसकी व्यापक चर्चा रही। अधिकांश लोगों ने यही संभावना जताई कि अब ऐसे लोग भी सामने लाए जा सकते हैं, जिनसे लंबी पूछताछ हुई, जो स्वयं सशंकित भी रहे, लेकिन एसआईटी की प्रारंभिक रिपोर्ट आने के बाद 25 जून 2026 को दर्ज हुई प्राथमिकी से बाहर रह गए।
इनमें आउटसोर्स कंपनी के गणना कर्मियों के साथ निगरानी करने वाले बैंक व ट्रस्ट के कर्मी भी शामिल हैं। एसआईटी ने भले ही प्रारंभिक रिपोर्ट में इस बात का जिक्र किया है कि बैंक अधिकारियों व ट्रस्ट पदाधिकारियों के बीच वित्तीय पारदर्शिता को लेकर मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) तो तय की गई थी, इन पर बाकायदा हस्ताक्षर भी किए गए थे, परंतु इन किसी नियमों का सही से पालन नहीं कराया गया।

इनमें आउटसोर्स कंपनी के गणना कर्मियों के साथ निगरानी करने वाले बैंक व ट्रस्ट के कर्मी भी शामिल हैं। एसआईटी ने भले प्रारंभिक रिपोर्ट में इस बात का जिक्र किया है कि बैंक अधिकारियों व ट्रस्ट पदाधिकारियों के बीच वित्तीय पारदर्शिता को लेकर मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) तो तय की गई थी, इन पर बाकायदा हस्ताक्षर भी किए गए, परंतु किसी नियमों का पालन नहीं कराया गया।
दोबारा जांच में कइयों पर गिर सकती है गाज
गणना करके निकलते समय कर्मियों की तलाशी भी नहीं कराई जा रही थी, जिसका लाभ उठाते हुए दान चोरी काे अंजाम दिया गया। अब दोबारा जांच में न केवल बैंक, सुरक्षा, गणना व निगरानीकर्ताओं पर शिकंजा कस सकता है, बल्कि उन जिम्मेदार लोगों को भी कार्रवाई के दायरे में लाया जा सकता है, जिनके कंधों पर इन कार्यों की निगरानी और वित्तीय पारदर्शिता सुनिश्चित करने का दायित्व था।
गत दिनों दर्ज हुई प्राथमिकी में शामिल आठ आरोपितों में से छह एजेंसी की ओर से नियुक्त गणना कर्मी हैं, तो दो ट्रस्ट कर्मी भी हैं। ट्रस्ट या बैंक के नीति-नियंताओं को इसमें शामिल नहीं किया गया है, जिन पर कार्रवाई को लेकर पुरजोर मांग भी उठती रही है।