चढ़ावा चोरी के बाद रामलला की पूजा-अर्चना होगी और समृद्ध, संतों के लिए खुलेगा रंग महल का दर्शन मार्ग
संतों और नगरवासियों के लिए रंग महल का दर्शन मार्ग खोला जा सकता है, साथ ही स्थायी पास जारी करने पर भी विचार हो रहा है। ...और पढ़ें

बैठक के दौरान संत।
HighLights
चढ़ावा चोरी के बाद रामलला की पूजा सुदृढ़ होगी
नौ संतों की समिति पूजा व्यवस्थाओं की समीक्षा करेगी
रंग महल मार्ग संतों व नगरवासियों के लिए खुलेगा
प्रवीण तिवारी, अयोध्या। चढ़ावा चोरी की घटना के बाद ट्रस्ट की व्यवस्था को नये सिरे से सुदृढ़ किया जा रहा है। इसमें प्रमुख रूप से रामलला के भोग-राग व पूजा-आरती को और समृद्ध बनाने की तैयारी है। इसी के दृष्टिगत ट्रस्ट ने नौ संतों को यह दायित्व सौंपा है।
अगस्त के प्रथम सप्ताह में समिति बैठक कर भगवान की पूजा, भोग व नियमित चल रही सेवा की समीक्षा करेगी। इसमें पुजारी भी सम्मिलित होंगे। यदि कुछ कमियां सामने आएंगी तो उन्हें दूर किया जाएगा।
हालांकि ट्रस्टी महांत दिनेंद्रदास ने स्पष्ट किया कि भगवान की सेवा में किसी प्रकार की लापरवाही नहीं बरती जा रही है, हां संतों से मार्गदर्शन में इसे और शास्त्र सम्मत किया जा सकता है।
समिति भोर में भगवान के जागरण से लेकर शयन तक पांच बार होने वाली आरती व भोग की व्यवस्था का अध्ययन करेगी। उत्सवों की रूपरेखा खींची जाएगी।
नई उम्मीद, संतों व नगर वासियों के लिए खुल सकता है रंग महल का दर्शन मार्ग
उधर संतों व नगर निवासियों के दर्शन की नई व्यवस्था भी तय हो सकती है। रंग महल बैरियर उनके लिए खोला जा सकता है, जिससे साधु संत निर्बाध रूप से मंदिर में जाकर रामलला के दर्शन व आरती में शामिल हो सकें। परिसर की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जाएगा।
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स्थायी पास भी जारी किए जा सकते हैं
सूत्र बताते हैं कि इसके लिए मंदिर-मंदिर सर्वे कर स्थायी पास भी जारी किए जा सकते हैं, जिससे संतों को पास के लिए परेशान न होना पड़े। गुरुवार को हुई बैठक में ट्रस्ट प्रतिनिधियों ने संतों को ध्यान से सुना। अभी स्थानीय लोगों के लिए नित्य दर्शन पास बन रहा है, लेकिन इसमें आरती को भी शामिल करने की मांग है।
समिति इस दिशा में कर सकती है कार्य
- रामलला के जागरण से लेकर मंगला, श्रृंगार, मध्याह्न आरती, संध्या के साथ ही शयन आरती को निर्धारित समय सारिणी के अनुरूप तय समय पर कराने पर जोर है
- भोग प्रसाद में श्रेष्ठ स्वादिष्ट व्यंजन बनवाना
- परिसर के अन्य मंदिर में विराजित देवी-देवताओं की विधिवत नित्य पूजा अर्चना कराना। नित्य ग्रंथों का पारायण सुनिश्चित करना।
- छप्पन भोग में सामान्य श्रद्धालु की भागीदारी कराना है
पूजा समिति के सम्मुख चुनौती
- पर्वों पर होने वाले अनुष्ठान, सांस्कृतिक उत्सवों की रूपरेखा व इसमें आमजन की सहभागिता कराना
- नित्य दर्शनार्थियों को प्रसाद देने की सम्यक व्यवस्था करना। अभी इलायची दाना वितरित किया जाता है। इसे और भी समृद्ध करना
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मधुकरी संत मिथिलाबिहारीदास कहते हैं, रामलला की सेवा- अर्चना प्राथमिकता होगी। वह कहते हैं कि आमजन के लिए नियमित रूप से रंग महल बैरियर खोल दिया जाए। उधर चढ़ावा चोरी के लिए परिसर में चल रहे प्रायश्चित पूजन की पूर्णाहुति हो गई। ट्रस्टी महांत दिनेंद्र दास ने हवन किया। यजमान व वैदिक आचार्यों ने मंडप की परिक्रमा की।