आजमगढ़ में 25 हजार का इनामी आरोपी ने कोर्ट में किया सरेंडर, अर्धसैनिक बलों में नौकरी का झांसा देकर करता था ठगी
फर्जी डोमिसाइल के जरिए अर्धसैनिक बलों में नौकरी दिलाने के नाम पर करोड़ों की ठगी के मामले में 25 हजार का इनामी आरोपित वीरेंद्र यादव ने आजमगढ़ कोर्ट में ...और पढ़ें

HighLights
25 हजार का इनामी वीरेंद्र यादव ने किया आत्मसमर्पण।
फर्जी डोमिसाइल से अर्धसैनिक बलों में नौकरी का झांसा।
अंतरराज्यीय गिरोह ने 100 से अधिक युवाओं को ठगा।
जागरण संवाददाता, आजमगढ़। फर्जी डोमिसाइल बनवाकर अर्द्धसैनिक बलों में नौकरी दिलाने के नाम पर करोड़ों रुपये की ठगी के मामले में फरार चल रहे 25 हजार रुपये के इनामी आरोपित ने गुरुवार को चोरी छिपे अदालत में आत्मसमर्पण कर दिया। पुलिस उसकी गिरफ्तारी के लिए लगातार दबिश दे रही थी।
रानी की सराय थाना क्षेत्र के कोइलाड़ी खुर्द निवासी विरेंद्र यादव ने फास्ट ट्रैक कोर्ट (सीनियर डिवीजन) के न्यायाधीश अतुल पाल की अदालत में आत्मसमर्पण किया। वह फर्जी डोमिसाइल के जरिए सीआरपीएफ, बीएसएफ, आईटीबीपी और सीआईएसएफ में नौकरी दिलाने का झांसा देकर युवाओं से करोड़ों रुपये की ठगी करने वाले अंतरराज्यीय गिरोह का सदस्य है।
20 मई 2026 को अंधौरी गांव निवासी पंकज यादव की तहरीर पर रानी की सराय थाने में गिरोह के मुख्य सरगना विद्यासागर सहित पांच के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया था।
एसएसपी डाॅ. अनिल कुमार ने 29 जून को आरोपित विरेंद्र के जल्द गिरफ्तारी को 25 हजार रुपये का इनाम घोषित किया था। उसके आत्मसमर्पण के बाद न्यायालय ने उसे न्यायिक अभिरक्षा में भेज दिया।
27 जुलाई को गिरफ्तार हुए थे तीन आरोपित
अपर पुलिस अधीक्षक (एएसपी) ग्रामीण चिराग जैन ने बताया कि पूरे मामले की जांच 11 सदस्यीय एसआईटी कर रही है, गिरोह के असम, बिहार और यूपी के अबतक 12 आरोपित गिरफ्तार हो चुके हैं। हालांकि, गिरोह का सरगना विद्यासागर अभी भी फरार है, उसके जल्द गिरफ्तारी को 50 हजार रुपये का इनाम घोषित किया गया है।
इसी मामले में 27 जुलाई को रानी की सराय थाना की पुलिस ने तीन आरोपितों को गिरफ्तार किया था। एएसपी चिराग जैन ने बताया कि गिरोह के लोगों ने 100 से अधिक लोगों के साथ ठगी की है। गिरोह वर्ष 2012 से ठगी की घटना को अंजाम दे रहा है।