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    आजमगढ़ में नवजात बच्‍चे का हाथ कटने के मामले में एसआईटी गठित, दो क्लीनिक सील क‍िए गए

    By sauEdited By: Abhishek sharma
    Updated: Fri, 07 Aug 2026 11:25 AM (GMT+05:30)

    आजमगढ़ में नवजात के गलत इलाज से हाथ कटने के मामले में स्वास्थ्य विभाग ने जांच तेज कर दी है। मुख्य चिकित्साधिकारी के निर्देश पर एसआइटी गठित कर दो क्लीन ...और पढ़ें

    आजमगढ़ में नवजात का हाथ कटने पर एसआइटी गठित, दो क्लीनिक सील।

    आजमगढ़ में नवजात का हाथ कटने पर एसआइटी गठित, दो क्लीनिक सील।

    HighLights

    1. नवजात के गलत इलाज पर स्वास्थ्य विभाग की जांच तेज।

    2. मुख्य चिकित्साधिकारी के निर्देश पर चार सदस्यीय एसआइटी गठित।

    3. कप्तानगंज में सुरक्षा पाली और चाइल्ड केयर क्लीनिक सील।

    जागरण संवाददाता, आजमगढ़। नवजात के गलत इलाज के बाद उसकी जान बचाने के लिए हाथ काटने की नौबत आने के मामले में स्वास्थ्य विभाग ने जांच तेज कर दी है। मुख्य चिकित्साधिकारी डा. एनके वर्मा के निर्देश पर चार सदस्यीय विशेष जांच टीम (एसआइटी) गठित की गई है। एसआइसी सतीश कनौजिया के नेतृत्व में गठित टीम को एक सप्ताह के भीतर जांच रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए गए हैं।

    जांच के दौरान उपचार से संबंधित अभिलेख, चिकित्सकीय प्रक्रिया, चिकित्सकों की भूमिका और अन्य तथ्यों का परीक्षण किया जाएगा। साथ ही स्वास्थ्य विभाग ने कार्रवाई करते हुए कप्तानगंज स्थित सुरक्षा पाली क्लीनिक और चाइल्ड केयर क्लीनिक को सील कर दिया है। मामले में कप्तानगंज थाने में पहले ही तीन झोलाछाप के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया जा चुका है।

    पुलिस और स्वास्थ्य विभाग अपने-अपने स्तर पर जांच कर रहे हैं। अहरौला थाना क्षेत्र के बनाखुर्द गांव निवासी चंद्रकेश यादव ने तहरीर में आरोप लगाया है कि 14 जून को प्रसव पीड़ा होने पर उन्होंने अपनी पत्नी साधना यादव को कप्तानगंज स्थित स्टेट बैंक के सामने सुरक्षा पाली क्लीनिक में भर्ती कराया था। यहां कन्हैया लाल श्रीवास्तव और संतोष कुमार अस्थाना की देखरेख में दो दिन बाद नवजात का जन्म हुआ।

    आरोप है कि जन्म के बाद बिना आवश्यक चिकित्सकीय जांच के नवजात की दाहिनी कलाई के पास से रक्त निकाला गया, जिससे उसकी हालत बिगड़ने लगी। बाद में पीलिया की जांच और बेहतर इलाज का हवाला देकर नवजात को मनीष पांडेय के चाइल्ड केयर क्लीनिक भेज दिया गया।
    पीड़ित का आरोप है कि चाइल्ड केयर क्लीनिक में नवजात को आइसीयू में भर्ती कर प्रतिदिन पांच हजार रुपये शुल्क लिया गया, लेकिन स्वजन को बच्चे से मिलने तक नहीं दिया गया।

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    हालत लगातार बिगड़ने पर भी चिकित्सक उसे दूसरे अस्पताल ले जाने को तैयार नहीं थे। किसी तरह स्वजन नवजात को लेकर जेपीएस अस्पताल, लखनऊ पहुंचे। वहां चिकित्सकों ने जांच के बाद बताया कि जन्म के समय हुए गलत उपचार के कारण संक्रमण गंभीर हो चुका है और बच्चे की जान बचाने के लिए उसका एक हाथ काटना पड़ेगा। इसके बाद चिकित्सकों ने नवजात का हाथ काटकर उसकी जान बचाई।

    घटना सामने आने के बाद पीड़ित की तहरीर पर कप्तानगंज पुलिस ने कन्हैया लाल श्रीवास्तव, संतोष कुमार अस्थाना और मनीष पांडेय के खिलाफ विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज किया है। वहीं स्वास्थ्य विभाग की एसआइटी की रिपोर्ट आने के बाद संबंधित क्लीनिकों और आरोपितों के विरुद्ध विभागीय कार्रवाई भी की जाएगी।

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