बदायूं में मतांतरण और दुष्कर्म के मामले में पहली सजा, दोषी साकिर को 10 साल की जेल, 1 लाख का जुर्माना भी लगाया
बदायूं में मतांतरण और दुष्कर्म के मामले में साकिर हुसैन को 10 साल की जेल और 1 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है। यह बदायूं में मतांतरण के मामले में प ...और पढ़ें

प्रतीकात्मक चित्र
जागरण संवाददाता, बदायूं। बिल्सी थाना क्षेत्र के एक गांव निवासी महिला और उसकी दस वर्षीय बेटी का अपहरण कर बंधक बनाने, बेटी को जान से मारने की धमकी देकर मां से दुष्कर्म करने और नमाज आदि पढ़वा कर मतांतरण कराने के आरोपित को दोषी करार देते हुए दस साल की सजा और एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है।
विशेष न्यायाधीश फास्ट ट्रैक कोर्ट व महिलाओं से संबंधित अपराध की न्यायाधीश नेहा गर्ग ने दोषी रिसौली निवासी साकिर हुसैन को सजा सुनाई है। मतांतरण के मामले में बदायूं में यह पहली सजा है।
अभियोजन पक्ष के अनुसार, 27 मई को महिला के पति ने बिल्सी थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई थी कि उसकी पत्नी और बेटी को रिसौली गांव रहने वाला साकिर हुसैन बहला फुसला कर अपहरण कर ले गया है। पुलिस ने मामल दर्ज कर आरोपित और महिला की तलाश शुरू की।
करीब आठ दिन बाद पुलिस ने घेराबंदी की आरोपित महिला व उसकी बेटी को रास्ते में छाेड़कर फरार हो गया। महिला ने कोर्ट में दिए बयान बताया कि साकिर उन दोनों को बाइक से सिढुपुरा कासगंज स्थित एक घर ले गया। जहां उन दोनों बंधक बनाकर रखा।
वहां बेटी को जान से मारने की धमकी देकर गलत काम किया। वह रोज उनसे नमाज पढ़वाता। पुलिस ने बयान के अनुसार दुष्कर्म, बंधक बनाने, मारपीट व धमकी देने और उप्र विधि विरुद्ध धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेध अनिधिनिय की धारा बढ़ाई और आरोपित साकिर को गिरफ्तार कर जेल भेजा।
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पुलिस ने दिसंबर 2025 में मामले की चार्जशीट दाखिल की। जिस पर फरवरी 2026 में ट्रायल शुरू हुआ। सोमवार को इस मामले में न्यायाधीश ने सभी पक्षों को सुनने के बाद दोषी साकिर को सजा सुनाई।