बदायूं में वही थाना, वही चौकी और अंजाम भी वही... 27 महीने बाद फिर दोहराया गया 'इतिहास'
बदायूं में 27 महीने बाद पुलिस ने फिर एक बड़ा एनकाउंटर किया है, जिसमें इस्लामनगर डकैती कांड का मुख्य आरोपी जितेंद्र उर्फ ढालू ढेर हो गया। यह मुठभेड़ पि ...और पढ़ें

साजिद और जितेंद्र उर्फ ढालू का फाइल फोटो
HighLights
दोनों बार पुलिसकर्मी हुए घायल, बुलेटप्रूफ जैकेट बनी सुरक्षा कवच, तैयारी और प्रशिक्षण से पुलिस ने पाई सफलता
अंकित गुप्ता, बदायूं। जिले में 27 महीने 12 दिन बाद पुलिस ने एक बार फिर बड़ा फुल एंकाउंटर किया है। दिलचस्प संयोग यह है कि पिछली और इस बार की मुठभेड़ में सिर्फ अपराधी ही नहीं, बल्कि थाना, चौकी, समय और हालात तक लगभग एक जैसे रहे।
19 मार्च 2024 को दो मासूम बच्चों के हत्यारोपित साजिद को सिविल लाइंस थाना क्षेत्र की शेखूपुर चौकी के जंगल में पुलिस ने मार गिराया था। अब एक जुलाई 2026 की रात इसी थाना और चौकी क्षेत्र में इस्लामनगर डकैती कांड के मुख्य आरोपित जितेंद्र उर्फ ढालू पुलिस मुठभेड़ में ढेर हो गया।
दोनों घटनाओं में पुलिस टीम पर बदमाशों ने पहले फायरिंग की और जवाबी कार्रवाई में वे मारे गए। वर्ष 2024 की मुठभेड़ में तत्कालीन सिविल लाइंस इंस्पेक्टर गौरव विश्नोई गोली लगने से घायल हुए थे। वहीं इस बार शेखूपुर चौकी प्रभारी नीरज और सिपाही अविनाश चौधरी गोली लगने से घायल हुए।
दोनों मुठभेड़ों में पुलिस अधिकारियों की जान बुलेटप्रूफ जैकेट ने बचाई। इस बार एसपी सिटी अभिषेक सिंह और सिविल लाइंस इंस्पेक्टर हरेंद्र सिंह पर भी फायर हुआ, लेकिन सुरक्षा उपकरणों और सतर्कता के चलते बड़ा हादसा टल गया। 19 मार्च 2024 की घटना आज भी शहर के लोगों के जेहन में ताजा है।
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बाबा कालोनी निवासी ठेकेदार विनोद के दो मासूम बच्चों की सैलून संचालक दो भाइयों ने उस्तरा, चाकू और ब्लेड से निर्मम हत्या कर दी थी। वारदात के बाद फरार साजिद को पकड़ने पहुंची पुलिस पर उसने फायरिंग कर दी थी। जवाबी कार्रवाई में पुलिस ने उसे मार गिराया था। उस समय साजिद को तीन गोलियां लगी थीं।
करीब 27 महीने बाद एक बार फिर वही थाना, वही चौकी और लगभग वही समय पुलिस और बदमाश के आमने-सामने आने का गवाह बना। फर्क सिर्फ इतना रहा कि इस बार मुठभेड़ शेखूपुर क्षेत्र के पश्चिमी हिस्से में हुई, जबकि पिछली बार उत्तर दिशा में हुई थी। दोनों घटनाएं रात करीब नौ से साढ़े नौ बजे के बीच हुईं।
लगातार बढ़ते अपराधों के बीच इस कार्रवाई को बदायूं पुलिस के लिए बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि बेहतर रणनीति, आधुनिक प्रशिक्षण और सुरक्षात्मक उपकरणों के कारण इस बार पुलिस टीम ने न केवल खुद को सुरक्षित रखा, बल्कि कुख्यात डकैत जितेंद्र उर्फ ढालू का भी अंत कर दिया।