बदायूं में 'गुटखा किंग' निकला सपा नेता: घर के बेसमेंट में चल रही थी नकली फैक्ट्री, ₹218 करोड़ की चोरी का खुलासा
सपा जिला कोषाध्यक्ष रचित गुप्ता के घर के बेसमेंट में नकली गुटखा फैक्ट्री का भंडाफोड़ हुआ है, जहां से 218 करोड़ रुपये की जीएसटी चोरी का खुलासा हुआ। जां ...और पढ़ें

मशीन से निकल रहे गगन गुटखा के पाउच और बेसमेंट में चल रही फैक्ट्री में पड़ा माल व चल रही मशीन
HighLights
जीएसटी चोरी में जेल भेजे जाने के बाद जांच में सामने आया खेल, कई ब्रांडों की कथित नकली पैकिंग और उत्पाद मिले
प्रशासन की नाक के नीचे चलता रहा कारोबार, पेट्रोल पंप समेत परिवार से जुड़े अन्य कारोबारों की भी जांच शुरू
जागरण संवाददाता, बदायूं। 218 करोड़ रुपये की जीएसटी चोरी के मामले में जेल भेजे गए समाजवादी पार्टी के जिला कोषाध्यक्ष रचित गुप्ता की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं। अब जांच में सामने आया है कि वह शहर के आवास विकास कालोनी स्थित अपने मकान के बेसमेंट में नकली गुटखा, पान मसाला और अन्य उत्पादों के पाउच व सामग्री तैयार कराने का बड़ा कारोबार चला रहा था।
जांच एजेंसियों को यहां से 12 एफएफएस मशीनें, भारी मात्रा में कच्चा माल, पैकिंग सामग्री और नामी ब्रांडों के पाउच बरामद हुए थे। शहर के बीचोंबीच इतना बड़ा फर्जी कारोबार चल रहा था और जिला प्रशासन व खाद विभाग को इसकी भनक तक नहीं थी।
सीजीएसटी गौतमबुद्ध नगर और राज्य जीएसटी मेरठ की टीम ने 30 जून और एक जुलाई को टैक्स चोरी की गोपनीय सूचना के आधार पर रचित गुप्ता के आवास विकास और दातागंज क्षेत्र के सराय पिपरिया स्थित रजनी राजी एडिबल फर्म पर छापेमारी की थी। कार्रवाई के दौरान मकान से पाउच बनाने वाली 12 मशीनें बरामद की गईं।
वहीं फर्म परिसर से करीब 410 किलोग्राम कटी सुपारी, पान मसाला बनाने की मशीन, विभिन्न नामी ब्रांडों के तैयार पैकेट और बड़ी मात्रा में पैकिंग सामग्री मिली थी। इसके बाद आरोपित रचित गुप्ता व उसके दो सहयोगियों को टीम साथ ले गई। जहां पूछताछ के बाद उन्हें मेरठ जेल भेजा गया।
खबरें और भी
अब इसकी पड़ताल में पता चला है कि सपा जिला कोषाध्यक्ष रचित गुप्ता केवल पाउच निर्माण का काम ही नहीं करता था, बल्कि दिलबाग, शिखर, गगन समेत कई ब्रांडों के नाम से नकली गुटखा, पान मसाला और तंबाकू उत्पाद तैयार कर बाजार में सप्लाई करता था।
इसके अलावा चाय की पत्ती, मसाले, साबुन और अन्य दैनिक उपयोग के उत्पादों की भी कथित नकली पैकिंग और निर्माण कराया जाता था। तैयार माल की आपूर्ति बदायूं के अलावा आसपास के कई जिलों में भी की जाती थी। इस कारोबार का नेटवर्क काफी बड़ा है।
प्रारंभिक पड़ताल में परिवार के अन्य सदस्यों और उनसे जुड़े व्यापारिक प्रतिष्ठानों की भूमिका भी सामने आई है। इसी आधार पर अब उनके अन्य कारोबारों, फर्मों और वित्तीय लेनदेन की भी जांच शुरू कर की गई है। जांच एजेंसियां इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की पहचान कर साक्ष्य जुटाने में लगी हैं।
इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि शहर के रिहायशी इलाके में लंबे समय से कथित रूप से नकली उत्पादों का इतना बड़ा कारोबार चलता रहा, लेकिन जिला प्रशासन, खाद्य सुरक्षा विभाग और अन्य संबंधित विभागों को इसकी भनक तक नहीं लगी।
पेट्रोल में मिलावट में भी आया था नाम
बताते हैं वर्ष 2018-19 के करीब रचित गुप्ता का पेट्रोल में मिलावट करने में भी नाम सामने आया था। बरेली के देवचरा के पास एक ट्रक पकड़ा गया था। उस समय भी बड़ी कार्रवाई हुई थी। बताते हैं कि तब मिट्टी के तेल को डीजल व पेट्रोल में मिलाने का आरोप लगा था।