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    बागपत में पावर कारपोरेशन ने लापरवाही की हद कर दी! श्मशान घाट के गेट के बीचों-बीच लगवा दिए बिजली के खंभे

    By Gaurav Kumar Edited By: Praveen Vashishtha
    Updated: Tue, 09 Jun 2026 05:39 PM (IST)

    Baghpat News : बागपत के हसनपुर मसूरी गांव में श्मशान घाट के गेट के बीचों-बीच बिजली के खंभे लगवा दिए गए हैं। इससे अंतिम संस्कार के लिए आने वाले ग्रामीण ...और पढ़ें

    श्मशान घाट के गेट के बीच में लगे खंभे। जागरण

    श्मशान घाट के गेट के बीच में लगे खंभे। जागरण

    HighLights

    1. लकड़ी व उपले लेकर वाहन के अंदर जाने की जगह नहीं।

    2. लोगों के दो साल से शिकायत करने के बाद भी समाधान नहीं।

    संवाद सहयोगी, खेकड़ा (बागपत)। हसनपुर मसूरी गांव के श्मशान घाट के गेट के बीचोंबीच ऊर्जा निगम ने खंभे लगवाए हैं। अंत्येष्टि के लिए ग्रामीणों को बाहर से ही हाथ में ईंधन लेकर जाना पड़ता है, क्योंकि अंदर छोटे वाहन के जाने का रास्ता भी बाधित है। परेशान ग्रामीण कई बार विभाग और अधिकारियों से शिकायत कर चुके हैं पर कोई सुनने को तैयार नहीं है।

    दिल्ली-यमुनोत्री नेशनल हाईवे (Delhi-Yamunotri National Highway) पर हसनपुर मसूरी गांव के बाहर छोर पर श्मशानघाट है। श्मशानघाट में जाने के लिए हाईवे से ही रास्ता जाता है परंतु ऊर्जा निगम ने दिल्ली-देहरादून एलिवेटेड रोड (Delhi-Dehradun Elevated Road) निर्माण व दिल्ली-यमुनोत्री मार्ग चौड़ीकरण के दौरान लाइन को शिफ्ट कराया था।

    अब खंभों को विभाग ने श्मशानघाट के गेट के बिल्कुल बीचों-बीच लगवा दिया है। इससे अंत्येष्टि के लिए उपले और लकड़ी को अंदर तक वाहन से पहुंचाने की कोई व्यवस्था नहीं है, क्योंकि मार्ग के बीच खंभे लगे होने से सिर्फ पैदल ही निकला जा सकता है।

    करीब दो साल से बनी समस्या के समाधान को ग्रामीण तहसील दिवस से लेकर मुख्यमंत्री पोर्टल तक शिकायतों को कर थक चुके हैं, लेकिन कोई जिम्मेदार समाधान के लिए आगे नहीं आ रहा। ग्रामीणों की मानें तो अंतिम संस्कार के लिए कंधों पर शव को लेकर चलते हैं तो पीछे ग्रामीण हाथों में ईंधन की लकड़ी व उपले लेकर चलते हैं।

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    इन्होंने कहा....
    श्मशानघाट के गेट पर जब खंभे लगाए गए थे तो तत्कालीन एसडीएम को जानकारी देकर करीब डेढ़ फीट की दूरी पर लगवाने की अपील की थी पर एसडीएम ने एक नहीं सुनीं। अधिकारियों की अनदेखी के कारण ग्रामीणों को परेशानी हो रही है।
    -संजीव यादव

    जब किसी की मौत होती है तो चार लोग कंधे पर शव को लेकर चलते हैं तो ग्रामीण हाथों में लकड़ी, उपले लेकर चलते हैं। अधिकारियों से शव के संस्कार के लिए खंभे साइड में करने की मांग कर रहे हैं पर अधिकारी मुख्यमंत्री पोर्टल पर शिकायत पर भी मनमर्जी कर रहे हैं।
    -याेगेश शर्मा

    किसी गेट या मार्ग के बीच खंभे नहीं लगाए जाते हैं। हो सकता है कि खंभे लगने के बाद गेट निर्माण हुआ हो। फिर भी जो संभव हो सकेगा, समाधान के लिए प्रयास किए जाएंगे।
    -रवि यादव, एक्सईएन, खेकड़ा