बागपत की बेटियों ने बाल विवाह के खिलाफ फूंका बगावत का बिगुल, बालिका वधू बनने के बजाय थामी कलम
बागपत में बेटियों ने बाल विवाह की कुप्रथा के खिलाफ बगावत की है, जहां चाइल्ड हेल्पलाइन ने इस साल 24 बाल विवाह रोके। कई लड़कियों ने बालिका वधू बनने से इ ...और पढ़ें
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बागपत की बेटियों ने बाल विवाह के खिलाफ फूंका बगावत का बिगुल।
HighLights
बागपत में चाइल्ड हेल्पलाइन ने इस साल 24 बाल विवाह रोके।
आठ बेटियों ने बालिका वधू बनने से इनकार कर पढ़ाई चुनी।
एक बहादुर बेटी को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सम्मानित किया।
जहीर हसन, बागपत। बाल विवाह की कुप्रथा के खिलाफ बेटियों ने बगावत बिगुल फूंक दिया। बागपत में चाइल्ड हेल्पलाइन द्वारा चालू साल में 24 बाल विवाह रोके गए। इनमें आठ बेटियों ने बालिका वधू बनने को मंडप में बैठने से इन्कार कर सपनों के करियर को उड़ान देने को स्कूलों की राह पकड़ी।
भले ही उन्हें बाल विवाह करने की जिद पर अड़े स्वजन को सही राह पर लाने के लिए कानून का सहारा लेना पड़ा। ये बेटियां न केवल पढ़ाई कर रही हैं, बल्कि अफसर बनकर सामाजिक कुरीतियां मिटाने का जज्बा भी अपने अंदर पाले हैं।
बड़ौत के एक गांव की 14 वर्षीय किशोरी को गत जुलाई में जब स्कूल में कक्षा नौ में प्रवेश मिला तो खुशी का ठिकाना नहीं रहा। खुश होती भी क्यों नहीं?...कक्षा आठ के बाद बीच में छूटी पढ़ाई पूरी करने को न केवल स्वजन बल्कि समाज से भिड़ना पड़ा, लेकिन हार नहीं मानी।
छह माह पहले जब उनकी बरात घर के दरवाजे पर आने ही वाली थी तो उसने हाथों में मेहंदी रचाने और मंडप में जाने के बजाय पढ़ाई जारी रखने की बात कही, मगर स्वजन पर असर नहीं हुआ। तब चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 पर काल कर अपना बाल विवाह रुकवाने को कानूनी कानूनी सहारा लिया।
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बिटिया ने चाइल्ड हेल्पलाइन कर्मियों से कहा कि मेरी उम्र कम है। मैं पढ़ाई करना चाहतीं हूं पर स्वजन नहीं मान रहे। चाइल्ड हेल्पलाइन ने शादी रुकवाई। स्वजन ने माली हालत का रोना रोकर पढ़ाने से इन्कार कर दिया। तब सामने आया महिला बाल कल्याण विभाग, जिसने बच्चों के लिए संचालित स्पांसरशिप स्कीम में उसका चयन कर चार हजार रुपये प्रतिमाह आर्थिक मदद स्वीकृत कराई।
बिटिया ने कहा कि पढ़-लिखकर अपने पैरों पर खड़ा होकर दिखाएंगी, बल्कि आइएएस अफसर बनने का सपना पूरा करने में कसर नहीं छोडूंगी। वहीं इस बहादुरी पर बिटिया को महिला दिवस पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी सम्मानित कर चुके हैं।
वहीं, एक दूसरे गांव की 17 वर्षीय किशोरी ने कक्षा 10 के बाद छूटी आगे की पढ़ाई पूरी करने के लिए अप्रैल में चाइल्ड हेल्पलाइन पर काल कर स्वयं को नाबालिग बताकर अपनी शादी रुकवाई है। अब वह आगे की पढ़ाई पूरी करने के लिए 11वीं में प्रवेश ले चुकी हैं। दोघट के एक गांव की 15 वर्षीय लड़की ने चाइल्ड हेल्पलाइन पर काल कर अपनी शादी रुकवाई और अब वह कक्षा नौ में प्रवेश पा चुकी हैं।
वहीं रमाला के गांव की एक लड़की ने अपनी स्नातक की पढ़ाई पूरी करने के लिए शादी करने से इन्कार कर दिया। स्वजन ने दबाव डाला तो चाइल्ड हेल्पलाइन की मदद ली। अब लड़की ने एक कालेज में पुन: स्नातक प्रथम वर्ष में प्रवेश लेकर पढ़ाई शुरू की। ये बानगीभर हैं वरना, ऐसे अनेक मामले हैं। बता दें कि चालू साल में 24 बाल विवाह रोके गए। पिछले साल 28 बाल विवाह रोके गए थे।
एक दो नहीं बल्कि कई नाबालिग लड़कियों ने चाइल्ड हेल्पलाइन पर काल कर अपनी शादी रुकवाकर आगे की पढ़ाई के लिए स्कूलों में प्रवेश लिया। बाल विवाह सामाजिक बुराई है, लेकिन जिस तरह बेटियां हिम्मत दिखा रहीं हैं वह सराहनीय है। बाल विवाह कानूनी अपराध है, इसलिए अभिभावकाें को चाहिए कि बेटे की शादी 21 साल और बेटी की शादी 18 साल के होने के बाद ही करें। -वंदना गुप्ता, कोआर्डिनेटर चाइल्ड हेल्पलाइन, बागपत।
आज की जनरेशन पहले जैसी नहीं है, जो स्वजन के फैसले को मान ले। यह जनरेशन काफी स्मार्ट व पढ़ी-लिखी है, जो खुद फैसला लेने लगी। इस बदलाव से किशोरियां बाल विवाह रुकवाने सामने आ रही हैं। अनेक अभिभावकों की सोच है कि बिटिया जवान होने लगी है। कोई ऊंच-नीच न हो जाए, इसलिए शादी करने की जल्दी रहती है जो कानूनी और सामाजिक दृष्टि से गलत है। -शालू चौधरी, डिस्ट्रिक्ट कोआर्डिनेटर, हब फार एम्पावरमेंट ऑफ वुमेन।