NCR का नया इंडस्ट्रियल हब बनता बागपत, अमूल और बिम्बो जैसे बड़े ब्रांड्स के निवेश से खुले रोजगार के नए रास्ते
बागपत, जो कभी महाभारत काल के 'व्याघ्रप्रस्थ' के रूप में जाना जाता था, अब आधुनिक विकास और औद्योगिक क्रांति का प्रतीक बन गया है। दिल्ली से बेहतर कनेक्टि ...और पढ़ें

बागपत बना NCR का नया औद्योगिक केंद्र
HighLights
अमूल, बिम्बो जैसे बड़े ब्रांड्स का बागपत में निवेश।
दिल्ली से बेहतर कनेक्टिविटी ने बनाया लॉजिस्टिक्स हब।
ऐतिहासिक सिनौली उत्खनन ने महाभारत को किया प्रमाणित।
डिजिटल डेस्क, बागपत। उत्तर प्रदेश का बागपत जिला आज इतिहास की विरासतों को सहेजते हुए आधुनिक विकास की दौड़ में अग्रणी बनकर उभरा है। जिसे कभी महाभारत काल में पांडवों द्वारा मांगे गए पाँच गाँवों में से एक 'व्याघ्रप्रस्थ' (आज का बागपत) के रूप में जाना जाता था, वह आज अपनी आध्यात्मिक पहचान और तेजी से बढ़ते बुनियादी ढांचे के कारण 'विकसित उत्तर प्रदेश' का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है।
ऐतिहासिक जड़ें और सिनौली की सभ्यता
बागपत का इतिहास हजारों साल पुराना है। बरनावा का 'लाक्षागृह' आज भी उस काल की गवाही देता है जब कौरवों ने पांडवों को जलाने की साजिश रची थी। वहीं, जिले के सिनौली गाँव ने तो दुनिया के नक्शे पर एक नई पहचान बनाई है। यहाँ हुई खुदाई में 3,000 साल पुराने मानव कंकाल, महाभारत कालीन रथ, तलवारें और तांबे के कड़े मिले हैं। इन अवशेषों ने यह सिद्ध कर दिया है कि महाभारत केवल एक पौराणिक कथा नहीं बल्कि एक ऐतिहासिक सच्चाई है।
आध्यात्मिक और सांस्कृतिक संगम
बागपत आस्था का भी एक बड़ा केंद्र है। यहाँ का पुरा महादेव मंदिर लाखों श्रद्धालुओं की श्रद्धा का प्रतीक है, जहाँ माना जाता है कि भगवान परशुराम ने स्वयं शिवलिंग स्थापित किया था। इसके अलावा, बड़ा गाँव का माँ मनसा देवी मंदिर और जैन धर्म की आस्था का केंद्र त्रिलोक तीर्थ धाम पूरे वर्ष भक्तों से गुलजार रहते हैं। यहाँ की संस्कृति में आज भी 'राधे-राधे' और आपसी सौहार्द की गूँज सुनाई देती है।
कनेक्टिविटी: दिल्ली से मिनटों की दूरी
बागपत के विकास की रफ़्तार को दिल्ली-देहरादून ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे ने नई ऊँचाई दी है। यह एक्सप्रेसवे बागपत को दिल्ली के अक्षरधाम से महज 20 से 25 मिनट की दूरी पर ले आया है। साथ ही, दिल्ली-सहारनपुर हाईवे का नवीनीकरण और ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे के एग्जिट पॉइंट्स ने जिले को लॉजिस्टिक्स और ट्रांसपोर्ट का एक प्रमुख हब बना दिया है। उद्यमियों का मानना है कि इस कनेक्टिविटी के कारण अब दिल्ली और गाजियाबाद की इंडस्ट्रीज तेजी से बागपत की ओर शिफ्ट हो रही हैं।
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औद्योगिक क्रांति और ODOP
बागपत अब केवल कृषि प्रधान जिला नहीं रहा, बल्कि एक औद्योगिक केंद्र भी बन रहा है। यहाँ के खेकड़ा क्षेत्र में टेक्सटाइल और होम फर्निशिंग का बड़ा काम होता है, जिसे 'एक जिला एक उत्पाद' (ODOP) योजना के तहत बढ़ावा दिया जा रहा है। जिले में 800 करोड़ का अमूल प्लांट और 500 करोड़ का बिम्बो बेकरी प्लांट जैसे निवेश आ रहे हैं। साथ ही, 22,000 से अधिक सूक्ष्म उद्योग यहाँ 66,000 से अधिक लोगों को रोजगार दे रहे हैं।
कृषि और नई पहल
गन्ना बागपत की मुख्य फसल है और यहाँ तीन बड़ी चीनी मिलें हजारों किसानों की आजीविका का आधार हैं। हालांकि, पानी के गिरते स्तर को देखते हुए अब यहाँ के किसान हॉर्टिकल्चर और चिया सीड्स जैसी नई फसलों की ओर भी रुख कर रहे हैं। साथ ही, यहाँ ब्लैकबेरी का उत्पादन भी शुरू किया गया है, जिसका 100% एक्सपोर्ट किया जा रहा है, जो किसानों की आय बढ़ाने में सहायक सिद्ध हो रहा है।
सुरक्षा और भविष्य का विजन
स्थानीय निवासियों और खिलाड़ियों का मानना है कि पिछले कुछ वर्षों में कानून-व्यवस्था में आए सुधार ने बागपत की छवि बदल दी है। पहले जहाँ शाम के बाद सड़कों पर निकलने में डर लगता था, आज लोग देर रात भी निर्भीक होकर यात्रा करते हैं। 87 हेक्टेयर में बनने वाला अंतरराष्ट्रीय योग और आरोग्य केंद्र और मितली में मेडिकल कॉलेज जैसे प्रोजेक्ट्स बागपत को भविष्य का एक 'आधुनिक शहर' बनाने की दिशा में निर्णायक कदम हैं।
इतिहास की विरासत को संजोते हुए और आधुनिकता की रफ़्तार पकड़ते हुए बागपत आज 'नया उत्तर प्रदेश' की पहचान बन चुका है। खेलों में अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी देने से लेकर रक्षा और तकनीक में योगदान देने तक, बागपत का यह सफर निरंतर जारी है।