बागपत के पुजारी का करीबी किशोर उत्तराखंड में घर से पकड़ा गया, इसरार के स्वजन ने किया हंगामा
गाजियाबाद के फोरेंसिक एक्सपर्ट की देखरेख में अंकित और इसरार के शवों का पोस्टमार्टम हुआ, जिसमें मौत का कारण स्पष्ट नहीं हुआ। मुख्य आरोपी पुजारी नरेशनाथ फरार है, जबकि उसका करीबी किशोर उत्तराखंड से पकड़ा गया।

सिंगोली तगा गांव में इसरार का शव पहुंचने के बाद मुआवजे की मांग व आरोपितों का एनकाउंटर की मांग करते स्वजन।
HighLights
अंकित-इसरार के शवों का पोस्टमार्टम, मौत का कारण अज्ञात।
मुख्य आरोपी पुजारी नरेशनाथ की तलाश में दबिश जारी।
पुजारी का करीबी किशोर उत्तराखंड से गिरफ्तार, परिजन आक्रोशित।
संवाद सूत्र, चांदीनगर। मंदिर में गड्ढे से निकाले गए दो दोस्त अंकित और इसरार के शवों का करीब 40 घंटे बाद गाजियाबाद के फोरेंसिक एक्सपर्ट की देखरेख में चिकित्सकों के पैनल ने पोस्टमार्टम किया। इसकी वीडियोग्राफी की गई। रिपोर्ट में मौत के कारण का पता नहीं चला। चिकित्सकों द्वारा सुरक्षित किया गया विसरा विधि विज्ञान प्रयोगशाला भेजा जाएगा।
वहीं दोनों युवकों शव गांव में पहुंचते ही इसरार के स्वजन ने हंगामा कर दिया। उन्होंने एनकाउंटर की मांग की। पुलिस ने उन्हें समझाकर शांत किया।
वहीं आरोपित पुजारी नरेशनाथ की गिरफ्तारी के लिए पांच राज्यों में पुलिस ने दबिश दी, लेकिन उसका कहीं सुराग नहीं लगा। उसका करीबी किशोर उत्तराखंड में घर से पकड़ा गया। वहीं जौनपुर से गिरफ्तार किए गए उसके दूसरे शिष्य को न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेजा गया। उसके दो चेलों को हिरासत में लिए गए है।
ग्राम सिंगोली तगा से दिव्यांग 27 वर्षीय अंकित पुत्र मुकेश और उसका मुस्लिम दोस्त 34 वर्षीय इसरार पुत्र रिड़कू गत 25 जुलाई को बाइक से खेकड़ा जाने के लिए घर से कहकर गए थे। वापस नहीं लौटने पर अंकित की बहन भावना ने 29 जुलाई को चांदीनगर थाने में अज्ञात में मुकदमा दर्ज कराया था।
पुलिस ने 13 जुलाई की तड़के करीब तीन बजे श्री गणेश मंदिर लहचौड़ा के परिसर में गड्ढे की खोदाई कर उन दोनों के शव बरामद किए थे। पुलिस ने दावा किया था कि मंदिर के पुजारी नरेश नाथ निवासी कुंडेश्वरी थाना काशीपुर, जनपद ऊधमसिंह नगर (उत्तराखंड) का अंकित की एक बहन से अवैध संबंध थे। इसका अंकित विरोध करता था।
इसी के चलते योजनाबद्ध तरीके से नरेशनाथ ने अपने करीबी किशोर व दो शिष्य उज्ज्वल पांचाल निवासी ग्राम पूरनपुर नवादा व कृष्णा यादव पुत्र उदयभान निवासी पोखरा थाना चंदवक जिला जौनपुर के साथ मिलकर 25 जुलाई को चाय में नींद की गोलियां खिलाकर और नशीला इंजेक्शन लगाकर अंकित व इसरार की हत्या की है।
किसी को पता न चले, इसलिए उन दोनों के शवों को मंदिर परिसर में गड्ढा खोदकर गाड़ दिया गया, जिसके बाद इंटरलाकिंग टाइल्स लगाकर ऊपर धुना जला दिया था।
पुलिस ने आरोपित उज्ज्वल पांचाल की निशानदेही पर उन दोनों के शव बरामद किए। दूसरे शिष्य कृष्णा यादव को उसके घर से गिरफ्तार किया। उसे शुक्रवार को अदालत में पेश किया, जहां से न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेजा गया। गाजियाबाद के फोरेसिक एक्सपर्ट विशन सिंह मान की देखरेख में दो चिकित्सकों के पैनल ने अंकित व इसरार के शवों का पोस्टमार्टम किया।
स्वास्थ्य विभाग के सूत्रों के मुताबिक उनकी मौत का कारण स्पष्ट नहीं हाेने पर चिकित्सकों ने विसरा सुरक्षित किया। वहीं पोस्टमार्टम के बाद रात करीब नौ बजे उन दोनों के शव गांव में पहुंचे। इसरार के शव को स्वजन ने घर के बाहर रखकर हंगामा कर दिया। उसके साले खट्टा प्रहलादपुर निवासी अनीस और रिश्तेदार पूर्व राज्यमंत्री (दर्जा प्राप्त) उम्मेद पहलवान नें पुजारी के एनकाउंटर और पीड़ित परिवार की आर्थिक मदद की मांग की।
थाना प्रभारी राकेश कुमार और ग्राम प्रशासक प्रतिनिधि बाबूराम त्यागी व अन्य लोगों के आश्वासन पर स्वजन शांत हुए। इसके बाद उसके शव को सिपुर्द-ए-खाक किए गए। वहीं अंकित के शव का स्वजन ने बगैर हंगामा किए ही अंतिम संस्कार किया। इस दौरान पुलिस और पीएसी तैनात रही है।
चांदीनगर थाना प्रभारी राकेश कुमार का कहना है कि पुजारी नरेशनाथ के करीबी युवक को उसके पैतृक गांव में घर से पकड़ा गया, जिसे लेकर टीम लौट हरी है। वहीं पुजारी नरेशनाथ की गिरफ्तारी के लिए यूपी, उत्तराखंड, दिल्ली, हरियाणा व राजस्थान में संभावित स्थानों पर दबिश दी जा रही है, लेकिन अभी सफलता नहीं मिली।
पकड़े गए संदिग्धों की भूमिका की जांच
पुलिस ने दो संदिग्ध को हिरासत में लिया है। पुलिस सूत्रों के मुताबिक एक युवक का लहचौडा गांव, जबकि दूसरा सिंगोली तगा गांव का है। एक संदिग्ध से गड्ढा खोदने के लिए फावड़ा मांगा गया था जबकि दूसरे ने दोनों शव जमीन में दबाने के लिए गड्ढे की खोदाई करने में सहयोग किया था। ये पुजारी के चेले है।
थाना प्रभारी का कहना है कि ये सच है कि लहचौडा के एक युवक से पुजारी के चेले ने फावड़ा मांगा था, लेकिन उसके पास फावड़ा नही था। दूसरा संदिग्ध घटना के बाद मंदिर जरूर गया था, लेकिन पुजारी ने उसे गेट से लौटा दिया था। पुजारी नरेशनाथ कायस्थ जाति है, जबकि वह खुद को ब्राह्मण बताता है।
