घोड़ा-तांगा से माल भेजना है, बताइए ई-वे बिल कैसे बनेगा! अधिकारियों के निर्देश पर उठे व्यापारियों के सवाल
राज्य कर विभाग ने बागपत में व्यापारी संवाद कार्यक्रम आयोजित कर जीएसटी की जानकारी दी, जहां व्यापारियों ने घोड़ा-तांगा से माल भेजने पर ई-वे बिल को लेकर ...और पढ़ें

औद्योगिक क्षेत्र में उद्यमियों को जानकारी देते राज्य कर विभाग के अधिकारी। जागरण
HighLights
बागपत में राज्य कर विभाग ने व्यापारी संवाद कार्यक्रम किया।
व्यापारियों ने घोड़ा-तांगा से माल भेजने पर ई-वे बिल पूछा।
सहायक आयुक्त ने बताया, घोड़ा-तांगा पर इनवाइस काफी।
जागरण संवाददाता, बागपत। राज्य कर विभाग ने औद्योगिक क्षेत्र बागपत में व्यापारी संवाद कार्यक्रम आयोजित कर व्यापारियों को जीएसटी की जानकारी दी। व्यापारियों ने पूछा कि हमें ट्रक या अन्य वाहनों से नहीं भेजना माल...घोड़ा-तांगा या भैंसा बुग्गी से भेजेंगे फिर बताइए इनका ई-वे बिल कैसे बनेगा।
यह सुन अफसरों का सिर चकराया लेकिन सहायक आयुक्त ने जवाब दिया कि तब ई-वे बिल नहीं तब घोड़ा तांगा चालक को माल का इनवाइस दीजिए। सहायक आयुक्त राज्य कर शशि प्रकाश ने उद्यमियों व्यापारियों को जीएसटी रिटर्न, मुख्यमंत्री व्यापारी दुर्घटना बीमा योजना जीएसटी 2.0 के ढांचे के सरलीकरण तथा आम जन को राहत देने के लिए लागू किए गए स्लैब की जानकारी दी। मुख्यमंत्री व्यापारी दुर्घटना बीमा योजना में 10 लाख रुपये की सहायता मिलती है।
सहायक आयुक्त ने कहा कि सरकार ने स्लैब को तर्कसंगत बनाकर पांच व 18 प्रतिशत के मुख्य ढांचे को व्यवस्थित किया। स्टाक और पूंजीगत माल, इनपुट क्रेडिट का रिवर्सल, बकाया टैक्स क्रेडिट का भुगतान आदि बिंदुओं की जानकारी दी। सहायक आयुक्त ने उद्यमियों एवं व्यापारियों से समय से रिटर्न फाइल करने की अपील की। चायनीज मांझे के जोखिम की जानकारी देकर इसकी बिक्री खरीद नहीं करने को जागरूक किया है।
बागपत वेलफेयर इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के महासचिव अश्वनी शर्मा ने बताया कि हमें राज्य कर विभाग के अधिकारियों से कहा कि 50 हजार रुपये से ज्यादा का माल एक स्थान से दूसरे स्थान को भेजने के लिए ई-वे बिल की जरूरत पड़ती है। इंजन चलित वाहनों का ई-वे बिल जनरेट हो जाता है, क्योंकि उन वाहनों पर रजिस्ट्रेशन नंबर होता है। मगर ट्रक या अन्य किसी वाहन के बजाय घोड़ा -तांगा या भैंसा बोगी से बागपत से खेकड़ा या बड़ौत 50 हजार रुपये से ज्यादा कीमत के स्पेयर पार्ट्स या अन्य माल भेजना है तो बताइए ई-वे बिल कैसे बनेगा।
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अफसर सवाल सुन हैरान रह गए और कई का सिर चकराने लगा लेकिन सहायक आयुक्त राज्य कर ने जवाब दिया कि घोड़ा-तांगा या भैंसा बोगी का ई-वे बिल नहीं बनेगा बल्कि इनवाइस से काम चलेगा। राज्य कर सहायक आयुक्त सचल दल गगन बिहारी, प्रशिक्षु सहायक आयुक्त प्रियंका नैन, कोषाध्यक्ष लोकेश शर्मा, दीपक, सौरभ जैन ने भी इनपुट-क्रेउिट व पंजीयन के बारे में विचार व्यक्त किए। बताते चलें कि ई-वे बिल (इलेक्ट्रानिक वे बिल) वस्तु और सेवा कर व्यवस्था के तहत 50 हजार रुपये से अधिक मूल्य के सामान को एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाने के लिए आवश्यक एक डिजिटल दस्तावेज़ है।