कभी रोटी तक के लाले पड़ जाते थे, अब हैं लखपति दीदी... राज्यपाल आनंदीबेन पटेल कर चुकीं सम्मान
बागपत में आजीविका मिशन ने महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाया है, जहाँ 15 हजार से अधिक महिलाएं 'लखपति दीदी' बन चुकी हैं। कभी गरीबी में जीवन बिताने वाली ये महि ...और पढ़ें

विद्युत सखी रजनी को सम्मानित करतीं प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल। सौ. आजीविका मिशन
HighLights
आजीविका मिशन ने बागपत की महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाया।
बागपत में 15 हजार से अधिक महिलाएं अब 'लखपति दीदी' हैं।
विद्युत सखी रजनी को राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने सम्मानित किया।
जागरण संवाददाता, बागपत। जिले में महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए आजीविका मिशन वरदान साबित हुआ है। जो कभी घर खर्च चलाने को दूसरों पर निर्भर थीं, आज वे स्वरोजगार के बूते महिला स्वावलंबन की मिसाल बनी हैं। इनमें 15 हजार से ज्यादा महिलाओं को लखपति होने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। विद्युत सखी रजनी राज्यपाल आनंदीबेन पटेल के हाथों सम्मानित हो चुकी हैं। उप्र ग्रामीण आजीविका मिशन महिला स्वावलंबन के लिए स्वयं सहायता समूह गठित कराकर स्वरोजगार के लिए अनुदान देने के साथ 20 लाख तक के लोन के लिए सीसीएल (बैंक क्रेडिट लिंकेज) जारी कराई जाती है।
बागपत में 64 हजार महिलाओं को आजीविका मिशन का लाभ मिला। इनमें 40 हजार महिलाएं डेयरी यानी भैंस-गाय पालन, मशरूम व जैविक सब्जियों की खेती, परचून तथा सौंदर्य प्रसाधन दुकान, ब्यूटी पार्लर, आटा-चक्की चलाने, गर्म मसाला, हैंडलूम, रेडीमेड गार्मेंट्स, राखी बनाने, दोना-पत्तल, कान्हा ड्रेस बनाने व सिलाई आदि में रोजगार कर आत्मनिर्भर भारत का सपना साकार कर रही हैं। ये प्रति माह 15 से 60 हजार रुपये तक कमा रहीं है।
नौरोजपुर गुर्जर निवासी इंटर उत्तीर्ण विद्युत सखी रजनी के पति अरविंद कुमार मजदूरी करते पर कमाई इतनी थी कि भरपेट भोजन को भी गनीमत समझते। बदलाव की नींव तब रखी, जब अक्टूबर 2019 में रजनी स्वयं सहायता समूह से जुड़ीं। वर्ष 2021 में विद्युत सखी बनीं तो घर-घर बिजली बिल वसूली करने लगीं, लेकिन मुश्किलें आईं। उन्होंने तब भी हिम्मत नहीं हारी। वर्ष 2025 में रिकार्ड 10 करोड़ रुपये वसूली की।
कमीशन से हर माह 60 हजार रुपये से ज्यादा कमाई हो रही है। दिसंबर 2023 में प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल रजनी को प्रदेश में सर्वाधिक बिल वसूली करने पर सम्मानित कर चुकीं हैं। सिंघावली अहीर की उमा रक्षाबंधन के लिए राखी बनवाकर हर माह 25 हजार रुपये, पिलाना निवासी रीना प्रजापति मसालों के कारोबार से 15 हजार रुपये तथा ख्वाजा नंगला की समाज शास्त्र से एमए उत्तीर्ण आरती मान ठाकुर जी तथा राधा जी की पोशाक बनाती हैं।
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12 हजार रुपये में एक पोशाक बेच चुकीं है। हर माह 15-20 हजार कमा रहीं हैं। यह बानगी है, वरना 15 हजार 702 महिलाएं गरीबी से निकल लखपति बन गईं। इनकी सालाना कमाई दो लाख से 19 लाख तक है। बता दें कि 28 हजार महिलाओं को लखपति बनाने का लक्ष्य है।
रोटी तक के लाले पड़ जाते थे
हमने ऐसी गरीबी देखी कि कई बार रोटी तक के लाले पड़ जाते थे। स्वयं सहायता समूह से जुड़ी तो सरकार का साथ मिला, जिससे अच्छे से आजीविका चल रही है। रजनी, विद्युत सखी।
महिला सशक्तीकरण शासन-प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता में है
स्वयं सहायता समूह के माध्यम से महिलाओं को जोड़कर आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने को प्रशासन निरंतर कार्य कर रहा। महिलाएं स्वरोजगार की शानदार मिसाल पेश कर रहीं हैं। महिला सशक्तीकरण शासन-प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता में है। अस्मिता लाल, जिलाधिकारी बागपत।