बहराइच हिंसा: बूढ़ी आंखों को मिला न्याय, कहा- भगवान पर था भरोसा
बहराइच के महसी में मूर्ति विसर्जन जुलूस में रामगोपाल मिश्र की हत्या के मामले में न्यायालय ने मुख्य दोषी को फांसी और नौ को उम्रकैद की सजा सुनाई। 14 माह ...और पढ़ें
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HighLights
रामगोपाल मिश्र की हत्या पर न्यायालय का फैसला
मुख्य दोषी को फांसी, नौ को उम्रकैद
परिजनों ने न्याय मिलने पर जताई खुशी
जागरण संवाददाता, बहराइच। 13 अक्टूबर 2024 को महसी के महाराजगंज में मूर्ति विसर्जन जुलूस के दौरान प्रतिमा पर पथराव का विरोध करने पर रामगांव के रेहुआ मंसूर निवासी रामगोपाल मिश्र की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी।
14 माह बाद गुरुवार को जब न्यायालय ने मुख्य दोषी को फांसी व अन्य नौ को उम्रकैद की सजा सुनाई तो बूढ़ी आंखों को न्याय मिला। उन्होंने कहा कि मुझे भगवान और न्यायालय पर पूरा भरोसा था।
महसी के महाराजगंज में मूर्ति विसर्जन के दौरान 22 वर्षीय रेहुआ मंसूर निवासी रामगोपाल मिश्र की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस मामले में हरदी थाने में कुल 11 मुकदमे दर्ज हुए थे। इनमें 1300 से अधिक अज्ञात लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया था।
मृतक रामगोपाल के 70 वर्षीय पिता कैलाशनाथ मिश्र को जैसे ही प्रथम अपर सत्र न्यायाधीश पवन कुमार शर्मा द्वितीय द्वारा दोषियों पर फैसला सुनाने की जानकारी हुई तो उनकी आंखें छलक गई।
पास में ही बैठी पत्नी मुन्नी देवी व बेटे हरमिलन से उन्होंने कहा कि भगवान के घर देर है अंधेर नहीं। मुन्नी देवी ने कहा कि उन्हें देश की न्याय व्यवस्था पर पूरा भरोसा था। उन्होंने कहा कि आज मेरे कलेजे को ठंडक मिली है।
सीओ, थानाध्यक्ष व चौकी इंचार्ज हुए थे निलंबित
एएसपी ग्रामीण डीपी तिवारी ने बताया कि महाराजगंज कांड के दूसरे दिन हरदी थानाध्यक्ष सुरेश कुमार वर्मा, महसी चौकी इंचार्ज शिवकुमार सरोज व तीसरे दिन सीओ रूपेंद्र गौड़ को निलंबित कर दिया गया था।
विभागीय जांच अंतिम चरण में है। दोषी मिलने पर कार्रवाई होगी। प्रकरण में लापरवाही मिलने पर तहसीलदार रविकांत द्विवेदी को हटा दिया गया था।