डीएम-कमिश्नर उत्तर प्रदेश के उच्च शिक्षण संस्थानों की करेंगे निगरानी, पहली बार जिला प्रशासन को भी इस प्रक्रिया से सीधे जोड़ा गया
उत्तर प्रदेश में अब जिला प्रशासन विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों की शैक्षणिक गुणवत्ता व नई शिक्षा नीति के प्रभावी क्रियान्वयन की सीधी निगरानी करेगा। ...और पढ़ें

उत्तर प्रदेश में उच्च शिक्षा संस्थानों की गुणवत्ता पर अब जिला प्रशासन की सीधी नजर।
HighLights
जिला प्रशासन करेगा उच्च शिक्षण संस्थानों की सीधी निगरानी।
शैक्षणिक गुणवत्ता, NEP-2020 क्रियान्वयन पर रहेगा जोर।
एकीकृत अनुश्रवण पोर्टल से होगी नियमित समीक्षा।
जागरण संवाददाता, बलिया। प्रदेश के विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों की शैक्षणिक गुणवत्ता, नई शिक्षा नीति-2020 के प्रभावी क्रियान्वयन और विभिन्न योजनाओं की प्रगति पर अब जिला प्रशासन भी सीधी नजर रखेगा। उच्च शिक्षा विभाग ने इसके लिए एकीकृत अनुश्रवण पोर्टल तैयार किया है।
शासन के निर्देश पर जिलाधिकारी और मंडलायुक्त नियमित समीक्षा करेंगे तथा प्रत्येक तीन माह में रिपोर्ट शासन को भेजेंगे। इसके लिए प्रत्येक जिले में उच्च शिक्षा के लिए जिला नोडल अधिकारी भी नामित किए गए हैं। नई व्यवस्था लागू होने के बाद जननायक चंद्रशेखर विश्वविद्यालय (जेएनसीयू) और उससे संबद्ध 139 महाविद्यालय भी जिला प्रशासन की नियमित निगरानी के दायरे में आ जाएंगे।
इससे स्थानीय स्तर पर कमियों की पहचान, समयबद्ध समीक्षा और आवश्यक सुधार तेजी आने की उम्मीद है। अब तक विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों की शैक्षणिक गुणवत्ता, प्रवेश, परीक्षा, नई शिक्षा नीति-2020 के क्रियान्वयन तथा विभिन्न योजनाओं की समीक्षा मुख्य रूप से विश्वविद्यालय प्रशासन और उच्च शिक्षा विभाग तक सीमित थी। नई व्यवस्था में पहली बार जिला प्रशासन को भी इस प्रक्रिया से सीधे जोड़ा गया है।
10 बिंदुओं पर होगी निगरानी
एकीकृत अनुश्रवण पोर्टल के माध्यम से विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों के कार्यों की 10 प्रमुख बिंदुओं पर निगरानी की जाएगी। इसमें राजकीय एवं सहायता प्राप्त महाविद्यालयों की स्थिति, राष्ट्रीय सेवा योजना (एनएसएस), डिजिटल पुस्तकालय, संबद्धता, विश्वविद्यालयों की प्रगति, अपार (आटोमेटेड परमानेंट एकेडमिक अकाउंट रजिस्ट्री) पहचान, समर्थ पोर्टल तथा नई शिक्षा नीति से जुड़े विभिन्न मानकों की समीक्षा शामिल है।
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साथ ही जहां शिक्षक, संसाधनों या अन्य व्यवस्थाओं में कमी मिलेगी, वहां सुधार के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। शासन ने वर्ष 2047 तक प्रदेश में उच्च शिक्षा का सकल नामांकन अनुपात (जीईआर) 75 प्रतिशत तक पहुंचाने, सभी उच्च शिक्षण संस्थानों को नैक से मान्यता दिलाने तथा प्रदेश के 10 विश्वविद्यालयों को क्यूएस विश्व रैंकिंग के शीर्ष 100 में शामिल कराने का लक्ष्य निर्धारित किया है। इसके साथ ही विद्यार्थियों को रोजगारोन्मुखी शिक्षा और एआइ आधारित शिक्षण से जोड़ने पर भी विशेष जोर दिया गया है। इन सभी लक्ष्यों की प्रगति की अब जिला स्तर पर नियमित समीक्षा होगी।
शासन के निर्देश के तहत अब जिलाधिकारी जिला स्तर पर विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों में नई शिक्षा नीति-2020 के क्रियान्वयन और विभिन्न माड्यूल के माध्यम से शैक्षणिक गतिविधियों की नियमित समीक्षा करेंगे। इससे कमियों की समय पर पहचान होगी और योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जा सकेगा।
रमेश कुमार सिंह, क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारी, आजमगढ़।