'साहब, अल्ट्रासाउंड तो लिख दिया गया लेकिन जांच की व्यवस्था नहीं है', सर्जन न होने से मरीजों को कर देते हैं रेफर
रेवती सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में मरीजों को गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। अल्ट्रासाउंड और विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी के कारण डेढ़ लाख आबाद ...और पढ़ें

अब तक अर्थों व सर्जन न होने से मरीजों को कर दिया जाता रेफर।

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जागरण संवाददाता, रेवती (बलिया)। सोमवार, सुबह 10 बजे, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र रेवती। मरीजों के अस्पताल आने का क्रम शुरु हो गया है। तभी भोपालपुर गांव निवासी सुनीता पहुंचती हैं। वह बताती है कि पेट में दिक्कत होने पर अल्ट्रासाउंड डाक्टर साहब ने लिखा है, लेकिन यहां जांच की व्यवस्था ही नहीं है। यदि बाहर जांच कराया जाए तो बहुत पैसा लग जाएगा। इतना पैसा नहीं है।
इसी दौरान रेवती निवासी वीरेंद्र गुप्ता पहुंचते हैं। वह जागरण की टीम को बताते हैं कि यहां का जनरेटर बीते छह महीने से बंद पड़ा है। डॉक्टर द्वारा जो जांच लिखा जाता है वह बिजली के न रहने पर प्रभावित होती है। ऐसे में रिपोर्ट दूसरे दिन मिलती है।
ऐसे में जांच रिपोर्ट लेने व उसे डॉक्टर को दिखाने के लिए दोबारा अस्पताल आना पड़ता है। नौवाबारा गांव निवासी त्रिभुवन ओझा ने बताया कि कुते ने काट लिया था, ऐसे में इंजेक्शन लगाने के लिए 20 रुपये देना पड़ा।
26 वर्षीय अंशु चौरसिया ने बताया कि पेट दर्द के चलते इलाज के लिए वह अस्पताल में भर्ती थीं, बताया कि सुई, दवा लगा है किंतु बेड पर साफ चार कभी नहीं बिछाया गया। इसी दौरान 60 वर्षीय परमानंद के डेरा गांव निवासी नव नारायण यादव का ब्लड प्रेशर हाई होने पर स्वजन उने सीएचसी लेकर पहुंचे जहां उनका उपचार किया गया।
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स्वजन ने बताया कि यहां प्राथमिक उपचार तो हो गया लेकिन बेहतर इलाज के लिए जिला अस्पताल दिखाया जाएगा। कस्बा निवासी गुड्डू केशरी ने बताया कि मेरी तीन वर्षीय बच्ची को दस्त व पेट दर्द की शिकायत थी। लगातार दो दिन उपचार के पश्चात अब ठीक है।
विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी से आज भी जूझ रही डेढ़ लाख की आबादी
सोमवार को प्रभारी अधीक्षक डॉ. प्रवीण कुमार को छोड़ कर शेष चिकित्सक ओपीडी में अपने-अपने कक्ष में मौजूद रहे। स्टाफ नर्स सरजीत वर्मा, फार्मासिस्ट राजकुमार यादव तथा वार्ड ब्याय विनोद मिश्र अपने ड्यूटी पर मुस्तैद रहे। ग्रामीणों ने बताया कि इस सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर आज भी विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी है, ऐसे में डेढ़ लाख की आबादी प्रभावित हो रही है।
एक्स-रे, अल्ट्रासाउंड आज भी बाहर महंगे दामों में कराने पड़ते हैं। सीएचसी परिसर में वर्ष 2014 में लाखों की लागत से बना रैन बसेरा का अब तक लोकार्पण नहीं हो पाया है, ऐसे में खर पतवारों ने उसे जगह-जगह ढक लिया है।
दो सप्ताह पूर्व सीएचसी पर आया एक्स-रे मशीन को संचालित करने वाला कोई नहीं है। चीफ फार्मासिस्ट का पद भी एक वर्ष से खाली है। सीएचसी पर छह के साक्षेप दो चिकित्साधिकारी व दो आयुष यानी चार की तैनाती है। अब तक अर्थों व सर्जन दो डाक्टर के न होने से मरीजों को रेफर कर दिया जाता है।
एक्स-रे मशीन अस्पताल में आया है। अभी टेक्नीशियन की नियुक्ति नही हो पाई है। अल्ट्रासाउंड मशीन की व्यवस्था नहीं है। जनरेटर खराब होने की शिकायत जिला मुख्यालय भेजी गई है। स्टाफ की कमी से कुछ समस्या आती हैं। जितना संसाधन है उसी में मरीजों का बेहतर उपचार किया जाता है। -डॉ. धर्मराज, चिकित्सकाधिकारी, सीएचसी रेवती।