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    ‘हेलो, मैं विकास भवन से…’, सरकारी नौकरी के लिए आई कॉल, युवक ने तुरंत काटा फोन, हैरान कर देगी वजह

    Updated: Mon, 27 Apr 2026 05:45 PM (IST)

    बलरामपुर में साइबर ठग सरकारी विभागों से जुड़े नौकरी के आवेदकों और अन्य लोगों को निशाना बना रहे हैं, नौकरी या काम कराने के नाम पर पैसे ऐंठ रहे हैं। ...और पढ़ें

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    जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में

    संक्षेप में पढ़ें

    श्लोक मिश्र, बलरामपुर। ‘हेलो, मैं विकास भवन से बोल रहा हूं। आपने बेसिक शिक्षा विभाग में आउटसोर्सिंग से निकली भर्ती के लिए आवेदन किया है। आपका नाम साक्षात्कार की सूची में है। आप अपना चयन चाहते हैं, तो मैनेजमेंट कर लीजिए। एक यूपीआइ का क्यूआर भेज रहा हूं, आधा पेमेंट अभी तुरंत और आधा नियुक्ति पत्र के बाद देना होगा।’

    यह प्रलोभन किसी सरकारी विभाग के अधिकारी, कर्मचारी या बिचौलिए नहीं, बल्कि साइबर अपराधी आवेदकों को दे रहे हैं। यही नहीं, यदि किसी सरकारी कार्यालय में आपने किसी योजना के लिए आवेदन किया है, या किसी पटल पर आपका कार्य लंबित है और आप किसी से वार्ता कर रहे हैं, तो भी साइबर अपराधी आप तक पहुंच बनाकर रुपये ऐंठ रहे हैं।

    साइबर अपराध के ऐसे कई मामले सामने हैं। कुछ तो जागरूक होने के कारण बच गए और कुछ उनके झांसे में आकर ठगी का शिकार हो गए। पुलिस द्वारा लगातार साइबर अपराधियों के विरुद्ध प्रभावी कार्रवाई के बाद भी लोगों में जागरूकता नहीं आ रही है।

    कहां से लीक हो रहा अभ्यर्थियों का डाटा

    बेसिक शिक्षा विभाग में कई पदों पर सेवा प्रदाता के माध्यम से भर्ती प्रक्रिया चल रही है। बीते फरवरी में विभिन्न पदों पर अभ्यर्थियों के अभिलेखों का सत्यापन किया गया था। इसके बाद योग्य अभ्यर्थियों की सूची बनाई गई। यही सूची सेवा प्रदाता फर्मों को भी दी गई। इनके अतिरिक्त सूची कहीं प्रसारित नहीं की गई।

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    वर्तमान में साक्षात्कार प्रक्रिया शुरू हुई, तो अभ्यर्थियों का विवरण सूचना विज्ञान केंद्र बलरामपुर की वेबसाइट पर अपलोड किया गया। सूची में सिर्फ अभ्यर्थियों का नाम है। बावजूद इसके अभ्यर्थियों के मोबाइल नंबर, उनके शैक्षिक प्राप्तांक एवं अन्य विवरण भी साइबर अपराधियों तक पहुंच गए हैं। उनके द्वारा अभ्यर्थियों को कॉल करके 40 हजार रुपये की मांग की जा रही है।

    ब्लाक समन्वयक गुणवत्ता के लिए आवेदन करने वाले ऋषभ अग्रवाल, राकेश कुमार सैनी, सुदीप कुमार मिश्र, मोनिका श्रीवास्तव, राजकुमार यादव आदि ने बताया कि उनके पास कॉल करके एक व्यक्ति ने कहा कि विकास भवन से डाटा इंट्री आपरेटर बोल रहे हैं। इंटरव्यू में चयन के लिए 40 हजार रुपये लगेंगे। इसके लिए क्यूआर कोड दिया। 20 हजार पहले देने व 20 हजार नियुक्ति पत्र देने के बाद भुगतान करने को कहा।

    हालांकि, जागरूकता के कारण अभ्यर्थी ठगी का शिकार होने से बच गए। सवाल यह है कि यदि विभाग ने अभ्यर्थियों की सूची गोपनीय रखी, तो उनका संपूर्ण विवरण कॉल करने वाले को कहां से मिल गया। इससे सेवा प्रदाता एजेंसी की भूमिका पर सवालिया निशान लग रहे हैं।

    फर्जी कर्मचारी बन 40 हजार की ठगी

    ठगों का जाल सिर्फ बीएसए कार्यालय ही नहीं, बल्कि अन्य सरकारी विभागों तक फैला है। तुलसीपुर के ग्राम बेलीखुर्द निवासी सर्वजीत पासवान से मुख्य चिकित्साधिकारी (सीएमओ) कार्यालय का कर्मी बन किसी ने 40 हजार रुपये की ठगी कर ली। पीड़ित ने बताया कि 23 अप्रैल को सुबह करीब 10 बजे उसके मोबाइल नंबर पर एक कॉल आया।

    फोन करने वाले ने अपने को सीएमओ कार्यालय बलरामपुर का कर्मचारी जितेंद्र बताते हुए कहा कि वह एक स्कैनर भेज रहा है, जिसके माध्यम से रुपये भेजने पर उसका काम करा दिया जाएगा। झांसे में आकर पीड़ित ने बताए गए नंबर पर दो अलग-अलग खातों में 19,999.92 रुपये और 19,999.96 रुपये ट्रांसफर कर दिए।

    पैसे भेजने के बाद जब उसने संपर्क करने का प्रयास किया तो संबंधित नंबर बंद हो गया। इसके बाद उसे ठगी का एहसास हुआ। पीड़ित ने मामले की शिकायत करते हुए आरोपित के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर कार्रवाई की मांग की है।

    जागरूकता ही ठगी से बचाव

    साइबर अपराधी नौकरी, योजनाओं का लाभ एवं अन्य प्रलोभन देकर ठगी करते हैं। इसलिए किसी भी योजना या नौकरी के लिए आवेदन करने वाले सावधानी बरतें। किसी अनजान व्यक्ति से रुपये का लेनदेन न करें और न कोई ओटीपी शेयर करें। ठगी हो जाने पर 1930 पर शिकायत करें। जागरूकता ही ठगी से बचाव है।

    -विकास कुमार, पुलिस अधीक्षक