बलरामपुर में पीएम आवास ग्रामीण सूची में डेढ़ साल की देरी, निराशा में बदल रही उम्मीद
बलरामपुर में प्रधानमंत्री आवास ग्रामीण योजना के तहत पात्रों की अंतिम सूची डेढ़ साल से सत्यापन के कारण जारी नहीं हो पा रही है। ...और पढ़ें

जागरण संवाददाता, बलरामपुर। बेघर परिवारों को अपनी छत दिलाने की मंशा परवान नहीं चढ़ पा रही है। प्रधानमंत्री आवास ग्रामीण के तहत पात्रों की अंतिम सूची बनाने के लिए डेढ़ वर्ष से केवल सत्यापन ही किया जा रहा है।
इतना ही नहीं गांवों में खुली बैठक से लेकर शासन स्तर से एआइ के माध्यम से पांच बार पात्रता का सत्यापन किया गया है। फिर भी अब तक पात्रों की सूची फाइनल नहीं हो सकी है। ऐसे में जिन बेघर परिवारों को डेढ़ वर्ष पूर्व पक्का मकान मिलने की आस जगी थी, वह धीरे-धीरे निराशा में बदल रही है।
ग्राम्य विकास विभाग की ओर से पिछले वर्ष पीएम आवास ग्रामीण योजना के तहत जिले में 49678 परिवारों का आनलाइन सर्वे किया गया था। इसमें से 20725 आवेदक का डाटा संदिग्ध मिलने से पुन: सत्यापन भी किया जा चुका है।
पीएम आवास के आवेदकों के पहले चरण के सत्यापन में करीब 2853 आवेदक का डाटा पात्र मिलने पर निदेशालय स्तर पर स्वीकार कर लिया गया था।
वहीं, संदिग्ध आवेदकों का डाटा सत्यापन एक बार फिर जिला स्तरीय टीम द्वारा किया गया। इसके बाद शासन स्तर से एआइ के माध्यम से किया गया। फिर डेढ़ माह पूर्व गांव में खुली बैठक कर आवेदकों की सूची पड़ने के बाद पात्रों को चिह्नित किया गया है।
रिपोर्ट निदेशालय स्तर के पाेर्टल पर अपलोड किया गया है। फाइनल सूची शासन स्तर से जारी की जाती, लेकिन अब तक अंतिम सूची नहीं जारी हो सकी है।
ब्लाकवार सत्यापन की संख्या
चालू वर्ष में पीएम आवास ग्रामीण के तहत सदर विकास खंड में 10546 आवेदन में 4948 डाटा संदिग्ध मिलने पर पुन: सत्यापन किया गया है। इसी तरह गैंडास में 1803 में 1063, गैंसड़ी में 8325 में 3812, हरैया सतघरवा में 7110 में 2829, पचपेड़वा में 5922 में 2667, रेहराबाजार में 4680 में 1228, श्रीदत्तगंज में 2544 में 934, तुलसीपुर में 5772 में 1689 व उतरौला 2966 में 1055 आवेदक के डाटा संदिग्ध मिले थे। जिनका पुन: सत्यापन प्रक्रिया पूरा किया गया था।
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पीएम आवास ग्रामीण के संदिग्ध डाटा के सत्यापन की प्रक्रिया पूरी कर ली गई है। इसकी रिपोर्ट शासन को भेजी गई है। वहीं से अपात्रों का नाम हटाकर पात्रों की फाइनल सूची जारी की जाएगीं।
-विवेकानंद मिश्र, परियोजना निदेशक डीआरडीए