मुद्रा लोन के नाम पर 12 करोड़ गटकने का आरोपित Loan अप्रूवर गिरफ्तार, PSP कंस्ट्रक्शंस गोंडा के लोग और बैंक कर्मी थे शामिल
बलरामपुर में पंजाब नेशनल बैंक की नहर बालागंज शाखा में 12 करोड़ रुपये से अधिक के मुद्रा लोन और ओवरड्राफ्ट घोटाले का खुलासा हुआ है। पुलिस ने फर्जी खाते ...और पढ़ें


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जागरण संवाददाता, बलरामपुर। कारोबारियों व नए उद्यमियों को बिना गारंटी ऋण उपलब्ध कराकर व्यावसायिक रूप से सशक्त बनाने की प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की मंशा को बैंक अधिकारियों ने पलीता लगाया है। पुलिस की जांच में पंजाब नेशनल बैंक नहर बालागंज शाखा में अलग-अलग समय पर 86 फर्जी लोन खाते बनाकर 12 करोड़ तीन लाख 37 हजार रुपये का गबन कर लिया गया।
इसमें मुद्रा लोन के 40 फर्जी खातों से तीन करोड़ 93 लाख 50 हजार रुपये व अन्य 46 ओवरड्राफ्ट (ओडी) खातों से आठ करोड़ नौ लाख 87 हजार रुपये का गबन शामिल है। पुलिस ने गबन में शामिल लोन अप्रूवर आफिसर नगर के टेढ़ी बाजार खलवा निवासी विनय शर्मा को गिरफ्तार कर लिया है।
इससे पूर्व पुलिस आरोपित तत्कालीन वरिष्ठ शाखा प्रबंधक महेश त्रिपाठी निवासी लखनऊ, पीएसपी कंस्ट्रकशंस गोंडा के समरजीत सिंह व संतोष कुमार सिंह को जेल भेज चुकी है। घोटाले में पांच अन्य लोगों के ऊपर भी मुकदमा दर्ज है।
पुलिस अधीक्षक ने क्या बताया?
पुलिस अधीक्षक विकास कुमार ने बताया कि वादी चीफ मैनेजर पंजाब नेशनल बैंक सर्किल आफिस अयोध्या ने नगर कोतवाली में बीते 15 अगस्त को तहरीर दी कि नहर बालागंज शाखा में वरिष्ठ प्रबंधक महेश त्रिपाठी व उनके आठ सहयोगियों द्वारा बिना सक्षम अधिकारी की अनुमति के फर्जी एवं कूटरचित दस्तावेज तैयार कर 31 ओडी खाते खोलकर पांच करोड़ 25 लाख 18 हजार 400 रुपये का गबन किया गया है। सभी कर्मियों को निलंबित कर दिया गया है।
इस पर वरिष्ठ शाखा प्रबंधक समेत अधिकारी शाखा कार्यालय विनय कुमार शर्मा, संतोष गुप्त, कैश शाखा अधिकारी यशवंत कुमार, पीएसपी कंस्ट्रक्शंस की पूनम सिंह, वैभव सिंह, समरजीत सिंह व अन्य पर मुकदमा दर्ज किया गया। जांच में पाया गया कि बैंक शाखा में हुआ फ्राड सिर्फ ओडी खातों का ही नहीं, बल्कि मुद्रा लोन खातों का भी है। एफआइआर में सिर्फ 31 ओडी खातों की बात कही गई थी, जबकि जांच में 46 ओडी खातों से फर्जीवाड़ा सामने आया।
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बीते 25 सितंबर को नगर कोतवाली के तत्कालीन प्रभारी निरीक्षक सुधीर कुमार सिंह ने वरिष्ठ शाखा प्रबंधक व फर्म के समरजीत सिंह को गिरफ्तार कर लिया। आरोपितों ने बताया कि दोनों ने मिलीभगत करके अलग-अलग समय पर फर्जी लोन खाते बनाकर लगभग 46 लोनधारकों के आठ करोड़ नौ लाख 87 हजार रुपये का गबन किया है।
साथ ही पीएसपी कंस्ट्रक्शन के लोगों व उनके रिश्तेदारों के नाम से मुद्रा लोन के 40 फर्जी खाते तैयार किए। बिना किसी व्यापार के फर्म के इन खातों में तीन करोड़ 93 लाख 50 हजार रुपये डालकर गबन कर लिया। जांच में पाया गया कि जिन खातों में मुद्रा लोन की धनराशि का भुगतान हुआ है, उनके द्वारा वास्तव में कोई व्यापार नहीं किया जा रहा है।
लेंस साफ्टवेयर पर इंट्री करता था विनय
एसपी ने बताया कि विनय शर्मा लोन अप्रूवर एस-1 पद पर कार्यरत था, जो लेंस साफ्टवेयर पर फर्जी एलआइसी पालिसी नंबर की इंट्री कर लोन अप्रूवल का पहला चरण पूरा करता था। इसके बाद बैंक मैनेजर महेश त्रिपाठी फाइनल अप्रूवल के बाद लोन की धनराशि अनाधिकृत रूप से कैश या खाता ट्रांसफर के माध्यम से पीएसपी कंस्ट्रक्शन को भेज देते थे। आरोपित विनय शर्मा का आपराधिक इतिहास है, जिसके विरुद्ध 14 मुकदमे दर्ज हैं।