सोलर पैनल लगवाने के बाद भी नहीं छूटेगा स्मार्ट मीटर से पीछा, एक्सईएन बोले- शुरूआत में दिक्कत आती है
प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना के तहत सोलर पैनल लगवाने वाले उपभोक्ताओं को स्मार्ट मीटर की अनिवार्यता से परेशानी हो रही है। ...और पढ़ें

HighLights
सोलर पैनल पर स्मार्ट मीटर की अनिवार्यता से भ्रम।
नेट मीटर के बजाय स्मार्ट मीटर से रीडिंग में दिक्कत।
बलरामपुर में 1690 घरों में लगे हैं सोलर पैनल।
श्लोक मिश्र, बलरामपुर। सरकार प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना को बढ़ावा देने के लिए लोगों को अपने घर की छतों पर सोलर पैनल लगाने को प्रेरित कर रही है। वहीं बिजली विभाग के अधिकारियों की कार्यशैली उपभोक्ताओं को रुला रही है।
पूर्व में शहर और गांव में लगे स्मार्ट मीटर अचानक अपग्रेड हो जाने के कारण प्री-पेड होने से उपभोक्ता हलकान हुए थे। वहीं, अब सोलर पैनल लगाने पर नेट मीटर के बजाय स्मार्ट मीटर की बाध्यता कर दिए जाने से उपभोक्ताओं में भ्रम की स्थिति है।
कारण, नेट मीटर में लोगों को तुरंत उपभोग एवं उत्पाद की गई बिजली की रीडिंग आसानी से मिल जाती है। वहीं, स्मार्ट मीटर में उत्पाद की गई बिजली की गणना में तकनीकी दिक्कतें होती हैं।
ऐसे में जब आवेदक को यह पता चलता है कि सोलर पैनल लगवाने पर स्मार्ट मीटर लगवाना अनिवार्य होगा, तो वह अपने हाथ पीछे खींच लेता है। अब तक 1690 घरों में पैनल लग सके हैं।
नेट मीटर और स्मार्ट मीटर में अंतर
नेट मीटर एक द्विदिश मीटर होता है, जो सोलर सिस्टम से ग्रिड (बिजली विभाग) को भेजी गई (एक्सपोर्ट) और ग्रिड से ली गई (इंपोर्ट) बिजली का हिसाब रखता है। इसके माध्यम से उपभोक्ता अतिरिक्त सौर ऊर्जा बेचकर बिल में छूट प्राप्त करते हैं।
वहीं, सोलर पैनल लगवाने पर सामान्य स्मार्ट मीटर द्वि-दिशात्मक मोड में न होने पर सोलर से उत्पादित और ग्रिड को भेजी गई अतिरिक्त बिजली का सही क्रेडिट नहीं मिल पाता है।
अगर स्मार्ट मीटर प्रीपेड है, तो सोलर द्वारा ग्रिड में भेजी गई बिजली का हिसाब रखना मुश्किल हो जाता है और रिचार्ज बार-बार खत्म हो सकता है।
सोलर सिस्टम लगने के बाद, डिस्काम (विद्युत विभाग) को स्मार्ट मीटर में नेट मीटरिंग या ''सोलर एक्सपोर्ट'' की सेटिंग करनी पड़ती है, जिसमें कई बार तकनीकी देरी या त्रुटियां होने पर उपभोक्ताओं को उत्पादित बिजली का हिसाब नहीं मिल पाता है।
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उपभोक्ताओं का छलका दर्द
नगर के खलवा मुहल्ला निवासी अनुराग तिवारी ने बताया कि उन्होंने अपने घर की छत पर सोलर पैनल लगवाया। सिस्टम लगने के बाद उन्हें पता चला कि अब पुराने मीटर को हटाकर इसमें स्मार्ट मीटर लगाया जाएगा।
उन्होंने उलाहना दिया कि पहले नेट मीटर लगाने की बात हुई थी, जिस पर वेंडर ने विभाग से स्मार्ट मीटर अनिवार्य रूप से लगाने की बात कही। बिजली विभाग के कई चक्कर काटने पर लगभग 10 दिन बाद उन्हें नेट मीटर मिल सका।
इसी तरह छोटा धुसाह निवासी आलोक मिश्र ने भी सोलर सिस्टम के लिए बैंक से ऋण लिया। छत पर सिस्टम लगने के बाद उन्हें बताया गया कि स्मार्ट मीटर लगेगा। इस पर उन्होंने उपभोक्ता फोरम जाने और सिस्टम निकाल कर वापस ले जाने की बात कही। काफी नोकझोंक के बाद उनके यहां नेट मीटर लगाया गया।
अब शासन से सोलर पैनल के साथ स्मार्ट मीटर लगाना अनिवार्य कर दिया गया है। शुरुआत में 15-20 दिन दिक्कत होती है। इसके बाद सेटिंग कर दी जाती है। यदि किसी उपभोक्ता को स्मार्ट मीटर से रीडिंग में त्रुटि की आशंका है, तो वह चेक मीटर लगवा सकते हैं।
-अजय सिंह, अधिशासी अभियंता, विद्युत वितरण खंड बलरामपुर