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    दिल्ली-नोएडा की तर्ज पर संवरेगा बुंदेलखंड, विकास व रोजगार को मिलेगी नई रफ्तार<br/>

    Updated: Thu, 06 Aug 2026 12:12 AM (IST)

    बुंदेलखंड अब विकास के नए दौर में प्रवेश कर रहा है, जिसमें बांदा को आर्थिक केंद्र बनाया जाएगा। पीसीआरडीए और बीडा जैसे प्राधिकरणों के माध्यम से क्षेत्र ...और पढ़ें

    बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे का एरियल व्यू, जो क्षेत्र में बेहतर कनेक्टिविटी व औद्योगिक विकास की नई राह खोल रहा है। इंटरनेट मीडिया

    बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे का एरियल व्यू, जो क्षेत्र में बेहतर कनेक्टिविटी व औद्योगिक विकास की नई राह खोल रहा है। इंटरनेट मीडिया 

    जागरण संवाददाता, बांदा। कभी सूखा, पलायन और पिछड़ेपन की पहचान रहा बुंदेलखंड अब विकास के नए दौर में प्रवेश करने जा रहा है। प्रदेश सरकार ने प्रयागराज-चित्रकूट क्षेत्रीय विकास प्राधिकरण (पीसीआरडीए) के गठन को मंजूरी देकर पूरे क्षेत्र के सुनियोजित विकास का खाका तैयार किया है। इस महा प्राधिकरण में बांदा को इकोनामिक हब (आर्थिक केंद्र) की जिम्मेदारी दी गई है।

    सरकार की मंशा है कि जिस तरह नोएडा और ग्रेटर नोएडा में उद्योग, आधुनिक शहर, बेहतर सड़कें और रोजगार के अवसर विकसित हुए, उसी तर्ज पर बुंदेलखंड को भी नया औद्योगिक और आर्थिक केंद्र बनाया जाए। पीसीआरडीए के तहत प्रयागराज, चित्रकूट, बांदा, फतेहपुर, कौशांबी, महोबा, हमीरपुर और प्रतापगढ़ का एकीकृत विकास होगा।

    सड़क, आवासीय कालोनियां, औद्योगिक क्षेत्र, व्यापारिक काम्प्लेक्स, जलापूर्ति, सीवर, बस टर्मिनल और अन्य शहरी सुविधाओं का विकास एक ही मास्टर प्लान के तहत किया जाएगा। इससे निवेशकों को बेहतर माहौल मिलेगा और विकास योजनाएं तेजी से धरातल पर उतर सकेंगी।

    बीडा और एक्सप्रेसवे से उद्योगों को मिलेगी रफ्तार

    प्रदेश सरकार पहले ही बुंदेलखंड औद्योगिक विकास प्राधिकरण (बीडा) का गठन कर चुकी है। इसके तहत झांसी, जालौन, ललितपुर, बांदा, चित्रकूट, महोबा और हमीरपुर को शामिल किया गया है। बांदा में यूपीडा ने जमालपुर क्षेत्र में करीब 1,426 एकड़ भूमि अधिग्रहित की है, जहां भविष्य में औद्योगिक पार्क, लाजिस्टिक्स हब और वेयरहाउस विकसित किए जा सकते हैं। वहीं यूपीसीडा ने चिल्ला रोड स्थित कताई मिल के पास करीब 89 एकड़ भूमि औद्योगिक क्षेत्र के लिए अधिग्रहित की है।

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    डिफेंस कारिडोर से बढ़ेंगे निवेश और रोजगार

    उत्तर प्रदेश डिफेंस इंडस्ट्रियल कारिडोर के झांसी और चित्रकूट नोड का लाभ भी बांदा को मिलेगा। रक्षा उपकरणों के बड़े उद्योगों के साथ-साथ एमएसएमइ, मशीन निर्माण, पैकेजिंग, परिवहन और सर्विस सेक्टर में भी नए अवसर पैदा होंगे। बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे के कारण दिल्ली-एनसीआर, लखनऊ और पूर्वांचल तक तेज कनेक्टिविटी मिलने से उद्योगों को कच्चा माल और बाजार दोनों आसानी से उपलब्ध होंगे।

    कृषि, खनिज और पर्यटन बनेगी विकास की मजबूत नींव

    बांदा का क्षेत्रफल 4,408 वर्ग किलोमीटर है और यह दक्षिणी उत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड क्षेत्र में केन नदी के किनारे स्थित है। वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार जिले की आबादी 17.99 लाख है। जनसंख्या घनत्व 408 व्यक्ति प्रति वर्ग किलोमीटर, साक्षरता दर 66.67 प्रतिशत तथा लिंगानुपात प्रति 1000 पुरुषों पर 863 महिलाएं है। जिले में पांच तहसीलें बांदा सदर, पैलानी, अतर्रा, नरैनी और बबेरू तथा आठ विकासखंड हैं। बांदा दालों, विशेषकर चना और अरहर तथा तिलहन फसलों का प्रमुख उत्पादक है। यहां पत्थर और खनिज आधारित उद्योगों की भी अच्छी संभावनाएं हैं। एग्रो प्रोसेसिंग, फूड प्रोसेसिंग और खनिज आधारित उद्योगों के विस्तार की भी उम्मीद है।

    बेहतर कनेक्टिविटी से खुलेगा विकास का नया रास्ता

    बांदा राष्ट्रीय राजमार्ग एनएच-35 (झांसी-मीरजापुर ) और एनएच-76 से जुड़ा है। बांदा जंक्शन रेलवे नेटवर्क का प्रमुख स्टेशन है, जबकि निकटतम प्रमुख हवाई अड्डे प्रयागराज और कानपुर में हैं। ऐतिहासिक कालिंजर किला, केन नदी और केन घड़ियाल वन्यजीव अभयारण्य का क्षेत्र पर्यटन की दृष्टि से भी जिले को विशेष पहचान देता है। यदि औद्योगिक विकास के साथ पर्यटन और कृषि आधारित उद्योगों को भी बढ़ावा मिला तो स्थानीय अर्थव्यवस्था को नई मजबूती मिलेगी।

    बुंदेलखंड के हजारों युवा आज रोजगार के लिए दिल्ली, नोएडा, सूरत, पुणे और मुंबई जैसे शहरों का रुख करते हैं। सरकार का मानना है कि उद्योगों की स्थापना होने पर स्थानीय स्तर पर ही रोजगार के बड़े अवसर उपलब्ध होंगे। इससे पलायन कम होगा और व्यापार, परिवहन, होटल, शिक्षा, स्वास्थ्य तथा सेवा क्षेत्र को भी सीधा लाभ मिलेगा।

    अब सबसे बड़ी चुनौती योजनाओं को समयबद्ध तरीके से जमीन पर उतारने की है। यदि बीडा, पीसीआरडीए, डिफेंस कारिडोर और बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे से जुड़ी परियोजनाएं तय समय पर पूरी होती हैं तो आने वाले वर्षों में बांदा पूरे बुंदेलखंड के औद्योगिक, आर्थिक और निवेश के सबसे बड़े केंद्र के रूप में उभर सकता है।

    बांदा बना बुंदेलखंड के विकास का केंद्र

    • एक्सप्रेसवे, डिफेंस कारिडोर और रेलवे नेटवर्क का मिलेगा लाभ
    • हजारों एकड़ औद्योगिक भूमि पहले से उपलब्ध
    • कृषि, खनिज और पर्यटन की मजबूत संभावनाएं
    • उद्योग लगने से स्थानीय युवाओं को जिले में ही रोजगार मिलने की उम्मीद
    • व्यापार और निवेश के लिए पूरे बुंदेलखंड का प्रवेश द्वार बनेगा बांदा

    तीन एक्सप्रेसवे बदलेंगे बुंदेलखंड की तस्वीर

    • बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे से दिल्ली-एनसीआर तक आसान पहुंच
    • चित्रकूट-वाराणसी एक्सप्रेसवे से पूर्वांचल से सीधे जुड़ेगा क्षेत्र
    • कानपुर-महोबा ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे से औद्योगिक गतिविधियों को मिलेगा बढ़ावा
    • नए पुल और लिंक रोड से गांवों की कनेक्टिविटी भी होगी मजबूत

    हर जिले को मिलेगी अलग जिम्मेदारी, उसी हिसाब से होगा विकास

    • बांदा : उद्योग, निवेश और प्रशासन का केंद्र
    • चित्रकूट : धार्मिक पर्यटन और आध्यात्मिक विकास
    • फतेहपुर : कृषि, मंडी और फूड प्रोसेसिंग
    • हमीरपुर-महोबा : खनिज, डिफेंस और औद्योगिक क्षेत्र
    • कौशांबी : बौद्ध पर्यटन
    • प्रयागराज : पूरे क्षेत्र का जोनल मुख्यालय
    • प्रतापगढ़ : क्षेत्रीय विकास योजना से जुड़ेगा

    इन क्षेत्रों में सबसे ज्यादा बढ़ेंगे रोजगार के अवसर

    • डिफेंस और इंजीनियरिंग उद्योग
    • वेयरहाउस, लाजिस्टिक्स और ट्रांसपोर्ट
    • फूड प्रोसेसिंग और कृषि आधारित उद्योग
    • होटल, होम स्टे और धार्मिक पर्यटन
    • छोटे एवं मध्यम उद्योग, सर्विस सेक्टर और स्थानीय कारोबार

     

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