बांदा में हृदयविदारक घटना, पंखे में करंट से भाई की मौत, बचाने आई बहन भी हार गई जिंदगी
बांदा के तिंदवारा गांव में खेलते समय पंखे से करंट लगने से ढाई साल के शनि की मौत हो गई। उसे बचाने गई पांच साल की बड़ी बहन प्रियांशी भी करंट की चपेट में ...और पढ़ें

HighLights
खेलते समय हुई घटना, छोटे भाई को बचाने में बड़ी बहन भी करंट में चिपकी
मां घर के बाहर धुल रहीं थीं बर्तन, चीख सुनी तो दौड़कर पहुंचीं बचाने
संवाद सूत्र, बड़ोखर बुजुर्ग (बांदा)। शहर कोतवाली क्षेत्र के ग्राम तिंदवारा में खेलते समय पंखा छूने से बच्चे की करंट में चिपक कर मौत हो गई। झटका लगने से पंखा भी उसके ऊपर गिर गया। भाई के ऊपर पंखा गिरते देखकर मासूम बड़ी बहन उसे बचाने गई तो उसकी भी करंट में चिपक कर मौत हो गई। स्वजन जीवित होने के संदेह में तुरंत दोनों को रानी दुर्गावती मेडिकल कालेज के अस्पताल ले गए। जहां चिकित्सकों ने दोनों भाई-बहन के दम तोड़ने की पुष्टि की। पुलिस ने घटनास्थल की जांच की है।
तिंदवारा गांव निवासी बच्चू वर्मा शुक्रवार सुबह नौ बजे मजदूरी में जाने से पहले अपने ढाई वर्षीय पुत्र शनि व पांच वर्षीय पुत्री प्रियांशी को आंगनबाड़ी केंद्र छोड़कर आया था। जहां से दोनों भाई-बहन करीब साढ़े नौ बजे अपने घर लौट आए। जहां दस बजे खेलते समय फर्राटा पंखा पहले मासूम शनि ने उसे छू लिया। इससे वह करंट की चपेट में आ गया। बाद में मासूम बहन प्रियांशी अपने भाई को बचाने गई तो जैसे ही पंखा हटाने के लिए पकड़ा। वैसे ही वह भी करंट की चपेट में आने से चिपक गई। बच्चों की चीखने की आवाज सुनकर घर के बाहर बर्तन धुल रही मां शीला दौड़कर बचाने गई तो बिजली जाने से पंखा बंद हो चुका था। पंखा हटाने पर दोनों बच्चे अचेत मिले। इससे बिलखती हुई मां ने बाहर दौड़कर मदद के लिए गुहार लगाई।
इससे पड़ोसियों व अन्य स्वजन को मामले की जानकारी हुई। वह तुरंत दोनों बच्चों को रानी दुर्गावती मेडिकल कालेज के अस्पताल ले गए। जहां से चिकित्सकों ने दोनों बच्चों के दम तोड़ने का मेमो मेडिकल कालेज चौकी प्रभारी वीरेंद्र त्रिपाठी को भेजा। एएसपी शिवराज ने बताया कि करंट की चपेट में आने से दो बच्चों की मौत की सूचना मिली है। पुलिस ने स्वजन को ढांढस बंधाया है।
चार भाई-बहनों में छोटा था शनि, प्रियांशी भी सबसे बड़ी
करंट लगने से घटना होने के बाद दम तोड़ने वाले बच्चों के पिता ने बताया कि शनि दो भाइयों व दो बहनों में छोटा था। जबकि बहन प्रियांशी बड़ी थी। मां शीला दोनों बच्चों के शवों से लिपटकर रोते हुए कई बार गश खाकर बेहोश हुई। स्वजन उन्हें समझाने का प्रयास करते रहे हैं।