गवाईन नदी पुनर्जीवन से बुंदेलखंड को मिलेगा जल संबल, किसानों की समृद्धि की खुलेगी राह
बुंदेलखंड में 43 किमी लंबी गवाईन नदी का पुनर्जीवन अभियान शुरू हुआ, जिसका लक्ष्य 15 दिन में खोदाई और 34 चेकडैमों का जीर्णोद्धार है। ...और पढ़ें

HighLights
43 किमी गवाईन नदी की खोदाई 15 दिन में पूरी होगी।
मुख्यमंत्री सिंचाई योजना से 34 चेकडैमों का जीर्णोद्धार होगा।
यह अभियान बुंदेलखंड में जल संरक्षण और कृषि को बढ़ाएगा।
जागरण संवाददाता, बांदा। पानी की कमी और लगातार गिरते भूजल स्तर से जूझ रहे बुंदेलखंड के लिए गवाईन नदी का पुनर्जीवन अभियान नई उम्मीद लेकर आया है। कभी क्षेत्र की जीवनरेखा रही 43 किलोमीटर लंबी गवाईन नदी अब एक बार फिर अपने पुराने स्वरूप में लौटेगी।
जिला प्रशासन, लघु सिंचाई विभाग, खनन विभाग, ग्राम पंचायतों और किसानों की साझेदारी से शुरू हुआ यह अभियान न केवल नदी को नया जीवन देगा, बल्कि हजारों किसानों की सिंचाई, भूजल संरक्षण और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती प्रदान करेगा। इस अभियान का शुभारंभ शुक्रवार शाम बड़ोखर खुर्द विकासखंड के चमरहा गांव में किया गया।
यहीं से गवाईन नदी मध्य प्रदेश से उत्तर प्रदेश की सीमा में प्रवेश करती है। जिलाधिकारी अमित आसेरी ने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच भूमि पूजन कर कार्य की शुरुआत कराई।
इस दौरान एडीएम वित्त एवं राजस्व कुमार धर्मेंद्र, अधिशासी अभियंता लघु सिंचाई प्रेम नारायण गौतम, सहायक अभियंता विजय कुमार सिंह सहित अन्य अधिकारी, जनप्रतिनिधि और ग्रामीण मौजूद रहे।
कभी गांवों की जीवनरेखा थी गवाईन
गवाईन नदी का इतिहास बुंदेलखंड की जल संस्कृति से जुड़ा रहा है। इसका उद्गम मध्य प्रदेश के पन्ना जिले के चंद्रपुरा गांव से होता है। वहां से यह उत्तर प्रदेश में चमरहा गांव से प्रवेश कर मटौंध ग्रामीण, इटवा लोहरा, करछा, गोयरा मुगली, दुरेंदी, त्रिवेणी, मोहन पुरवा और चिलेहटा सहित कई गांवों से गुजरते हुए अंततः केन नदी में मिल जाती है।
एक समय था जब नदी सालभर पानी से भरी रहती थी। आसपास के गांवों की खेती, पशुपालन, पेयजल और स्थानीय जैव विविधता का प्रमुख आधार यही नदी थी। किसान इसकी धारा से सिंचाई करते थे और नदी के किनारे बसे गांव जल संकट से काफी हद तक सुरक्षित रहते थे।
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उपेक्षा से खो बैठी अपना अस्तित्व
समय के साथ गवाईन नदी का प्राकृतिक स्वरूप बदलता गया। वर्षों तक सफाई और संरक्षण नहीं होने से नदी में भारी मात्रा में गाद जमा हो गई। कई स्थानों पर अतिक्रमण और झाड़ियां उगने से प्राकृतिक प्रवाह बाधित हो गया।
नदी की चौड़ाई और गहराई लगातार घटती चली गई। परिणाम यह हुआ कि वर्षा का पानी नदी में रुकने के बजाय तेजी से बहकर निकल जाता था। भूजल पुनर्भरण बंद होने लगा और क्षेत्र के कुएं, हैंडपंप तथा नलकूपों का जलस्तर लगातार गिरता गया।
वैज्ञानिक तरीके से होगा पुनरोद्धार
अब गवाईन नदी को उसके मूल स्वरूप में वापस लाने की योजना बनाई गई है। लगभग 43 किलोमीटर लंबे नदी मार्ग में जरूरत के अनुसार दो मीटर तक गहरी खोदाई की जाएगी।
नदी की चौड़ाई विभिन्न स्थानों पर आठ मीटर से 35 मीटर तक है, जिसे प्राकृतिक स्वरूप के अनुरूप विकसित किया जाएगा। प्रशासन ने 15 दिनों में खोदाई कार्य पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया है।
इस अभियान में खनन विभाग खोदाई के लिए मशीनें उपलब्ध करा रहा है। तकनीकी गुणवत्ता बनाए रखने के लिए लघु सिंचाई विभाग के अवर अभियंताओं को सुपरविजन की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
ग्राम पंचायतें और स्थानीय किसान भी पूरे अभियान में सक्रिय भागीदारी निभा रहे हैं। इससे यह अभियान जनभागीदारी आधारित जल संरक्षण का मॉडल बन रहा है।
34 चेकडैमों के जीर्णोद्धार से बढ़ेगा जल संचयन
गवाईन नदी के पुनर्जीवन के साथ मुख्यमंत्री सिंचाई योजना के अंतर्गत नदी पर बने 34 चेकडैमों का भी जीर्णोद्धार भी कराया जाएगा। वर्षों से क्षतिग्रस्त इन संरचनाओं के सुधरने से वर्षा जल अधिक समय तक नदी में रुकेगा।
इससे भूजल स्तर में सुधार होगा और किसानों को सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी उपलब्ध हो सकेगा। जानकारों का मानना है कि नदी में जलधारण क्षमता बढ़ने से आसपास के हैंडपंप, कुएं और नलकूप भी रिचार्ज होंगे। इससे खेती की लागत घटेगी, उत्पादन बढ़ेगा और किसान फसल विविधीकरण की ओर भी कदम बढ़ा सकेंगे।
पर्यावरण और रोजगार को भी मिलेगा लाभ
गवाईन नदी का पुनर्जीवन केवल जल संरक्षण तक सीमित नहीं है। नदी में जल प्रवाह बढ़ने से आसपास हरियाली विकसित होगी, जैव विविधता को संरक्षण मिलेगा और पशुपालन को भी पर्याप्त पानी उपलब्ध होगा। भविष्य में मत्स्य पालन और अन्य ग्रामीण आजीविका के अवसर भी विकसित हो सकते हैं। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई गति मिलने की संभावना है।
बुंदेलखंड के लिए मिसाल बनेगा अभियान
जल संकट से लंबे समय से जूझ रहे बुंदेलखंड में गवाईन नदी का पुनर्जीवन एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। प्रशासन का उद्देश्य केवल नदी की खोदाई कराना नहीं, बल्कि उसे स्थायी रूप से जीवंत बनाना है।
यदि नदी के जलग्रहण क्षेत्र का संरक्षण, चेकडैमों का रखरखाव और अतिक्रमण पर प्रभावी नियंत्रण जारी रहा तो गवाईन नदी आने वाले वर्षों में क्षेत्र की जल सुरक्षा की मजबूत आधारशिला बन सकती है।
यह अभियान इस बात का उदाहरण भी है कि जब प्रशासन, तकनीकी विभाग, ग्राम पंचायतें और आम लोग एक लक्ष्य के साथ आगे बढ़ते हैं तो विलुप्त होती प्राकृतिक धरोहरों को भी नया जीवन दिया जा सकता है।
गवाईन नदी का पुनर्जीवन बुंदेलखंड में जल संरक्षण, पर्यावरण संरक्षण और किसानों की समृद्धि की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम साबित होने की उम्मीद है।