निपुण भारत मिशन का दायरा बढ़ा, अब पांचवीं तक के बच्चे बनेंगे दक्ष और सीखेंगे बुनियादी कौशल
निपुण भारत मिशन का दायरा अब प्री-प्राइमरी से कक्षा पांच तक बढ़ा दिया गया है, जिससे बच्चों के लिए गणित, हिंदी और अन्य विषयों में सीखने के न्यूनतम लक्ष् ...और पढ़ें


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जागरण संवाददाता, बांदा। निपुण भारत मिशन अब प्री-प्राइमरी से कक्षा पांच तक चलेगा। इस बाबत सरकार ने आदेश जारी कर दिया है। इसके साथ ही पांचवीं कक्षा तक बच्चों के सीखने की न्यूनतम क्षमता के लिए लक्ष्य तय कर दिए गए हैं। अभी तक यह मिशन कक्षा दो तक लागू था।
इससे मंडल के एक से पांच तक के संचालित 2983 विद्यालयों में अध्ययनरत 2,99,535 बच्चे लाभान्वित होंगे। बच्चों को गणित और हिंदी का न्यूनतम ज्ञान मुहैया कराने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं।
बच्चों के सीखने की क्षमता की आनलाइन परीक्षा भी होती है। बच्चा यदि इस परीक्षा में 80 फीसदी से अधिक अंक लाता है तो वह निपुण माना जाएगा।
मंडल में कुल 4788 परिषदीय विद्यालय हैं। इसमें से एक से पांच तक के 2983 विद्यालय संचालित हैं। परिषदीय विद्यालयों में अब निपुण भारत मिशन का दयरा बढ़ाकर बाल वाटिका से कक्षा पांच तक कर दिया गया है। अब केवल कक्षा दो तक ही नहीं, बल्कि कक्षा तीन से पांच तक के विद्यार्थियों के लिए भी विषयवार और कक्षावार सीखने के स्पष्ट लक्ष्य तय हैं।
इससे हर बच्चा अपनी कक्षा के अनुसार पढ़ना, लिखना, गणित हल करना और अन्य विषयों की जरूरी समझ विकसित कर सकेगा। इसको लेकर शासनादेश जारी किया गया है। निपुण भारत मिशन अब प्री-प्राइमरी से कक्षा पांच तक चलेगा।
इसके साथ ही पांचवीं कक्षा तक बच्चों के सीखने की न्यूनतम क्षमता के लिए लक्ष्य तय कर दिए गए हैं, जिसमें हिंदी में कक्षा तीन के छात्रों को आठ से 10 वाक्यों की समझ, स्पष्ट और प्रवाह के साथ उन्हें पढ़ना और उससे जुड़े 75 प्रतिशत सवालों के सही जवाब देने में सक्षम बनाना है।
इसके साथ ही किसी कहानी, चित्र, घटना या विषय पर अपन विचार, भावनाएं और अनुभव से चार से छह वाक्य लिखने की क्षमता भी जरूरी है।
जानिए बच्चों के लिए क्या है लक्ष्य
गणित में तीन अंकों की संख्याओं का जोड़-घटाव और दो अंकों की संख्या का गुणा कर लेना, दैनिक जीवन में कैलेंडर या घड़ी का प्रयोग कर लेना और 500 रुपये तक का लेनदेन कर लेने की क्षमता जरूरी है। अंग्रेजी में सामान्य निर्देश समझ लेना आर उस पर प्रतिक्रिया करना, चार से छह शब्द समझने और लिखने की क्षमता होनी चाहिए।
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मानवीय संसाधनों की पहचान कर पाना जरूरी
पर्यावरण में परिवार और समुदाय के संबंध, राष्ट्रीय पर्व, त्योहार और मेलों पर अपने विचार और भावनाएं चार से छह वाक्यों में व्यक्त कर सके। अपने लिए जरूरी प्राकृतिक और मानवीय संसाधनों की पहचान, देखभाल के सरल उपाय मौखिक और लिखिक रूप से व्यक्त कर लेना जरूरी है।
इसी तरह कक्षा चार और पांच के लिए भी इन्हीं चार विषयों में न्यूनतम समझ विकसित करने का लक्ष्य तय किया गया है।
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80 प्रतिशत अंक लाने पर माना जाएगा निपुण
निपुण भारत मिशन कक्षा दो तक कई सालों से चल रहा था। इसमें बच्चों को गणित और हिंदी का न्यूनतम ज्ञान मुहैया कराने के लिए प्रयास किए जाते हैं। उसके बाद बच्चों के सीखने की क्षमता की आनलाइन परीक्षा भी होती है। बच्चा यदि इस परीक्षा में 80 फीसदी से अधिक अंक लाता है तो वह निपुण माना जाएगा।
जब 80 फीसदी बच्चे निपुण हो जाएं तो वह निपुण स्कूल कहलाता है। निपुण भारत मिशन का विस्तार किया गया है अब प्री-प्राइमरी से कक्षा पांच तक चलेगा। इस संबंध में दिशा-निर्देश सभी जिलों के बीएसए को दिए गये हैं। रती वर्मा, एडी बेसिक, चित्रकूट धाम मंडल, बांदा