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    यूपी में बाढ़ का कहर, बांदा में चंद्रावल उफान पर, फर्रुखाबाद में गंगा के बढ़ते जलस्तर से कई गांव चपेट में

    Updated: Sat, 08 Aug 2026 12:14 AM (IST)

    यूपी में गंगा और सहायक नदियां उफान पर हैं, जिससे बांदा, फर्रुखाबाद और उन्नाव सहित कई जिलों में बाढ़ का कहर जारी है। गांवों में पानी घुसने से जनजीवन अस ...और पढ़ें

    गांव आशा की मड़ैया में भरे बाढ़ के पानी में नाव से घर जाते स्कूल के बच्चे। जागरण

    गांव आशा की मड़ैया में भरे बाढ़ के पानी में नाव से घर जाते स्कूल के बच्चे। जागरण

    HighLights

    1. बांदा में चंद्रावल नदी उफान पर, कई गांव संपर्क से कटे।

    2. फर्रुखाबाद में गंगा चेतावनी बिंदु से ऊपर, तटवर्ती गांव प्रभावित।

    3. प्रशासन ने अलर्ट जारी किया, राहत सामग्री वितरित की जा रही।

    जागरण टीम, कानपुर। यूपी में बाढ़ का कहर दिखना शुरू हो गया। गंगा नदी के साथ-साथ सहायक नदियां भी उफान पर हैं। बांदा, हमीरपुर, उन्नाव सहित कई जिलों में बाढ़ का असर देखने को मिल रहा है। गांवों में बाढ़ का पानी घुसने से अब लोग सुरक्षित स्थानों की तलाश कर रहे हैं। वहीं प्रशासन ने भी अलर्ट जारी कर दिया है।

    बुंदेलखंड और आसपास के जिलों में शुक्रवार को रुक-रुककर बारिश हुई। बांदा में 117.06 मिलीमीटर वर्षा दर्ज की गई, जबकि हमीरपुर, औरैया और इटावा में भी बारिश हुई। उरई में बिजली गिरने से किसान मानसिंह (50) की मौत हो गई। फर्रुखाबाद में गंगा का जलस्तर चेतावनी बिंदु से 20 सेंटर ऊपर पहुंचकर 136.80 पर स्थिर रहा। नरौरा, बिजनौर और हरिद्वार बैराज से पानी छोड़े जाने के कारण जलस्तर बढ़ने की आशंका है। उन्नाव में गंगा का जलस्तर 24 घंटे में आठ सेंटीमीटर घटकर 111.990 मीटर पहुंच गया, जो चेतावनी बिंदु 112 मीटर से एक सेंटीमीटर नीचे है। हालांकि गंगा के तटवर्ती बस्तियों के लोगों की चिंता बनी हुई है। पश्चिमी गंगाघाट में कई मकान पानी से घिरने लगे हैं।

    UP Flood Alert

    चंद्रावल नदी उफान पर, दो रपटे डूबे एक दर्जन से अधिक गांवों का संपर्क टूटा

    बांदा में में हल्की बूंदाबांदी के साथ पड़ोसी जिलों में हुई बारिश का असर नदियों के जलस्तर पर दिखाई देने लगा है। पैलानी तहसील क्षेत्र में चंद्रावल नदी उफान पर आ गई है। महोबा और हमीरपुर में हुई बारिश के बाद नदी में पानी का बहाव तेज हो गया, जिससे गौरी-आमरा रपटा और पड़ोहरा रपटा पूरी तरह जलमग्न हो गए हैं। दोनों मार्गों पर आवागमन बंद होने से एक दर्जन से अधिक गांवों का संपर्क ब्लाक, तहसील और जिला मुख्यालय से प्रभावित हो गया है।

    हमीरपुर की बारिश से बढ़ा नदी का जलस्तर

    चंद्रावल नदी महोबा जिले से निकलकर हमीरपुर होते हुए बांदा के पैलानी क्षेत्र में पहुंचती है और यहां केन नदी में मिल जाती है। महोबा और हमीरपुर में हुई बारिश का पानी इसी नदी के रास्ते बांदा पहुंचने से जलस्तर बढ़ गया है। रपटों के ऊपर कई फिट पानी बहने से ग्रामीणों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। किसानों को उपज बाजार तक पहुंचाने में दिक्कत आ रही है, जबकि मरीजों, स्कूली बच्चों और नौकरीपेशा लोगों की आवाजाही भी प्रभावित हुई है।

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    ग्रामीणों को जरूरी कामों के लिए नाव का सहारा लेना पड़ रहा है। प्रशासन ने सुरक्षा को देखते हुए पुलिस बल और तैराकों की तैनाती की है। लोगों से तेज बहाव के दौरान रपटों को पार न करने की अपील की गई है। वहीं शुक्रवार शाम चार बजे तक भूरागढ़ स्थित केन नदी का जलस्तर 93.62 मीटर दर्ज किया गया, जो घट रहा है। चिल्लाघाट स्थित यमुना नदी का जलस्तर 86.15 मीटर दर्ज हुआ, जिसमें बढ़ाव जारी है। प्रशासन दोनों नदियों के जलस्तर पर लगातार नजर रख रहा है।

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    नाव के सहारे बाढ़ के पानी से होकर स्कूल जा रहे बच्चे

    फर्रुखाबाद में पिछले 24 घंटों से गंगा का जलस्तर चेतावनी बिंदु से 20 सेमी ऊपर स्थिर है। इससे गंगा की बाढ़ का पानी तटवर्ती गांवों में भरा है। लगातार पानी भरे रहने के कारण गांव में एलर्जी और जुखाम बुखार और खांसी के मरीजों की संख्या भी बढ़ने लगी है। हालांकि जिला प्रशासन की ओर से स्वास्थ्य शिविर लगाए जा रहे हैं, लेकिन लोगों को इलाज के लिए नाव का सहारा लेकर जिला मुख्यालय के अस्पतालों में आना पड़ रहा है। पानी भरने के कारण मवेशियों के चारे का संकट भी हो गया है। पशुपालक काफी दूर क्षेत्रों से पशुओं के लिए चारा काटकर ला रहे हैं।

    नरौरा बांध से अधिक पानी छोड़े जाने से बढ़ेगा जलस्तर

    शुक्रवार को गंगा का जलस्तर समुद्र तल से 136.60 मीटर पर स्थित चेतावनी बिंदु से 20 सेमी ऊपर 136.80 मीटर पर स्थिर है। केंद्रीय जल आयोग के मुताबिक नरौरा बांध से गंगा में 1,24,173 क्यूसेक जो शाम को बढ़कर 1,34,584 क्यूसेक हो गया। इससे गंगा के जलस्तर में वृद्धि होगी। उधर, रामगंगा का जलस्तर घटकर गेज के नीचे पहुंच गया है। खोह, हरेली व रामनगर से रामगंगा में 23,798 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। जिससे रामगंगा का जलस्तर बढ़ने की आशंका है। अमृतपुर क्षेत्र में गंगा के तटवर्ती गांव चित्रकूट व सबलपुर के कई घरों में बाढ़ का पानी भरा है।

    गांवों में बाढ़ का पानी भरा होने से ग्रामीणों को आवागमन में परेशानी हो रही है। ग्रामीण बाढ़ के पानी मे निकलकर आवाजाही कर रहे हैं। आशा की मड़ैया में संपर्क मार्ग पर तीन फीट पानी बह रहा है। दोपहर स्कूल से आए बच्चे घर जाने के लिए आधा घंटे नाव के इंतजार में धूप में खड़े रहे। नाव आने पर वह घर पहुंचे।

    बदायूं मार्ग पर स्थित चित्रकूट डिप पर एक फीट से अधिक पानी बह रहा है। बाढ़ के पानी की धार में वाहन निकल रहे हैं। तटवर्ती गांव के खेतों में बाढ़ का पानी भरा होने से ग्रामीण मवेशियों के चारे की समस्या से परेशान हैं। कुसुमापुर निवासी देवपाल, मिथुन व मोहित बताते हैं कि साइकिल से डबरी से मवेशियों के लिए घास लानी पड़ती है। दूर से चारा लाने में दिन भर लग जाता है। बाढ़ प्रभावित गांव फखरपुर, बनासीपुर, मंझा की मड़ैया में लोग जुकाम, बुखार व खाज खुजली से परेशान हैं और झोलाछाप से इलाज करा रहे हैं।

    क्षतिग्रस्त पुलिया में ईंट भरी डाली बोरियां

    भुडिया भेड़ा संपर्क मार्ग करीब 20 मीटर पिछले साल गंगा की बाढ़ में कट गया था और पुलिया क्षतिग्रस्त हो गई थी। ग्रामीणों ने मिट्टी डालकर आवागमन शुरू कर लिया था। वर्षा में पुलिया के निकट डाली गई मिट्टी धंस गई। जिससे आवागमन बाधित होने की आशंका थी। जागरण ने प्रमुखता से बुधवार को खबर प्रकाशित की। उसके बाद मंडी समिति ने शुक्रवार को ईंट भरकर बोरियां लगवाई हैं।

    पीड़ितों को बांटी राहत सामग्री

    अमृतपुर तहसील के बाढ़ प्रभावित गांव के पीड़ितों के लिए दो हजार राशन पैकेट किट मिल गई हैं। शुक्रवार को विधायक सुशील शाक्य ने कुडरी सारंगपुर व करनपुर घाट के 520 पीड़ितों को राहत सामग्री वितरित की। एसडीएम श्वेता साहू, तहसीलदार शशांक सिंह व नायब तहसीलदार अभिषेक सिंह मौजूद रहे।