1 साल की उम्र में पिता को खोया, मां ने खेतों में मजदूरी कर पढ़ाया; अब बेटा बना सरकारी अफसर
सत्य प्रकाश ने अपनी मां के संघर्ष और मजदूरी के बल पर कृषि प्राविधिक सहायक (ग्रुप-सी) के पद पर चयनित होकर परिवार का नाम रोशन किया है। ...और पढ़ें

सत्य प्रकाश
HighLights
मां के संघर्ष से सत्य प्रकाश बने कृषि प्राविधिक सहायक।
बाराबंकी के सत्य प्रकाश ने ग्रुप-सी परीक्षा में सफलता पाई।
बचपन में पिता खोकर भी उच्च शिक्षा प्राप्त कर रहे।
संवाद सूत्र, बाराबंकी। सिर्फ एक साल की उम्र में पिता का साया सिर से उठ गया। आर्थिक तंगी के बीच मां ने दूसरों के खेतों में मजदूरी कर बेटे की पढ़ाई नहीं रुकने दी। उसी संघर्ष का नतीजा है कि मसूदाबाद गांव निवासी सत्य प्रकाश ने कृषि प्राविधिक सहायक (ग्रुप-सी) के पद पर चयनित होकर परिवार का नाम रोशन किया है।
निंदूरा ब्लॉक के ग्राम मसूदाबाद निवासी सत्य प्रकाश ने कठिन परिस्थितियों को मात देते हुए उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग की कृषि प्राविधिक सहायक (ग्रुप-सी) परीक्षा में सफलता हासिल की। उन्होंने वर्ष 2019 में सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, मेरठ से बीएससी (आनर्स) एग्रीकल्चर की डिग्री प्राप्त की। इसके बाद वर्ष 2021 में डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, पूसा (बिहार) से कृषि अर्थशास्त्र विषय में एमएससी की उपाधि हासिल की।
मुश्किलों के दौर में भी नहीं मानी हार
वर्तमान में वह राष्ट्रीय डेयरी अनुसंधान संस्थान (एनडीआरआई), बेंगलुरु में कृषि अर्थशास्त्र विषय में पीएचडी कर रहे हैं। सत्य प्रकाश की सफलता के पीछे संघर्ष की लंबी कहानी है। वर्ष 2000 में एक वर्ष की आयु में पिता राजाराम के निधन के बाद परिवार आर्थिक संकट में आ गया था।
ऐसे मुश्किल दौर में उनकी मां ने दूसरों के खेतों में मजदूरी कर परिवार का पालन-पोषण किया। जरूरत पर उधार लेकर भी बच्चों की पढ़ाई जारी रखी और कभी शिक्षा में बाधा नहीं आने दी।
मां के त्याग, संघर्ष और भाई-बहनों के सहयोग ने ही सत्य प्रकाश को इस मुकाम तक पहुंचाया। वह बताते हैं कि बड़ी बहन डॉ. राम मनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय, अयोध्या से समाजशास्त्र विषय में पीएचडी कर रही हैं। उनकी इस उपलब्धि पर गांव और क्षेत्र में खुशी का माहौल है।