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    विश्व फलक पर चमकेगी 'बाबू' की विरासत, हॉकी के वैश्विक पटल पर ड्रिबलिंग के जादूगर का सज रहा घर-आंगन

    Updated: Thu, 02 Apr 2026 01:43 PM (IST)

    बाराबंकी में पद्मश्री केडी सिंह बाबू का पैतृक आवास अब एक भव्य स्मृति संग्रहालय में बदल रहा है। ...और पढ़ें

    हॉकी के वैश्विक पटल पर ड्रिबलिंग के जादूगर का सज रहा घर-आंगन, विश्व फलक पर चमकेगी बाबू की विरासत

    हॉकी के वैश्विक पटल पर ड्रिबलिंग के जादूगर का सज रहा घर-आंगन, विश्व फलक पर चमकेगी बाबू की विरासत

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    नरेन्द्र मिश्र, बाराबंकी। हॉकी में वैश्विक प्रतिस्पर्धाओं में प्ले मेकर और ड्रिबलिंग के जादूगर कुंवर दिग्विजय सिंह से पद्मश्री केडी सिंह बाबू बनने का सफर बहुत रोमांचक है।

    उनकी जन्म स्थाली पैतृक कोठी के विशालकाय आंगन और दीवारें कुंवर की हॉकी से चिपककर चलने वाली बाल की स्मृतियों की धरोहर अब विश्व फलक पर बाराबंकी में बन रहे भव्य संग्रहालय में दिखेगी।

    सिविल लाइंस में 36000 वर्गफीट की विशाल कोठी में 2 फरवरी 1922 को भारत में हॉकी के शौर्य स्थापित करने वाले बालक का जन्म हुआ। पिता रायबहादुर रघुनाथ सिंह के कुंवर ने हॉकी से बाल को चिपकाना यानि ड्रिबलिंग करने का जादू आंगन से शुरू 14 से 16 साल की उम्र तक यूपी हॉकी टीम का रोमांचकारी प्रतिनिधित्व कर पूरे विश्व पटल पर अपनी छाप छोड़ दी थी।

    विश्व फलक पर चमकेगी 'बाबू' की विरासत

    अब अंतरराष्ट्रीय हॉकी खिलाड़ी पद्मश्री बाबू केडी सिंह की वही कोठी उनके स्मृति संग्रहालय के रूप में विकसित की जा रही है। शासन के संस्कृति अनुभाग से जारी शासनादेश में परियोजना को 8.98 करोड़ रुपये की स्वीकृति मिली थी और कोठी के सुंदरीकरण को 1 करोड़ 55 लाख 75 हजार रुपये की अतिरिक्त धनराशि मिल गई है।

    परियोजना के तहत बाबू केडी सिंह के पैतृक आवास को आधुनिक सुविधाओं से युक्त संग्रहालय हॉकी का प्रेरणास्थल बनेगा। योजना यह है कि कुंवर की कोठी के वातावरण में विश्व फलक पर हॉकी की उपलब्धियों और योगदान को जीवंत किया जाना है। परियोजना के क्रियान्वयन की जिम्मेदारी यूपी प्रोजेक्ट्स कारपोरेशन लिमिटेड को सौंपी गई है।

    पद्मश्री केडी सिंह बाबू की कोठी में पुरातन निर्माण को बिना परिवर्तित किए परिसर को नए कलेवर में हूबहू दर्शाने की चुनौती दी गई है। ऐतिहासिक इमारत स्मारक और संग्रहालय के रूप में विकसित होकर युवा खिलाड़ियों का प्रेरणास्थल बनेगा। यहां बाबू के खेल की विरासत को कुछ ऐसा संजोया जाएगा, कि पूरे विश्व में फैले उनके खेल प्रेमियों को यहां आकर जाने का मन नहीं करेगा।

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    मालूम हो कि दैनिक जागरण की पहल पर बीते वर्ष, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस ऐतिहासिक कोठी को नीलामी से बचाते हुए संस्कृति विभाग को सौंप दिया था। नीलामी प्रक्रिया को समाप्त करवाकर सरकार के पक्ष में केडी सिंह बाबू के स्वजन से बैनामा कराने में तत्कालीन डीएम सत्येंद्र कुमार के प्रयास अब रंग ला रहे हैं।

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    अब डीएम शशांक त्रिपाठी बाबू की महान स्मृतियों को यहां संजोने के लिए करवाए जा रहे कार्य अपनी निगरानी में करा रहे हैं। अब जल्द ही स्मृति संग्रहालय का स्वरूप सामने आने लगेगा।

    इमारत में बिना परिवर्तन किए उसे लंबे समय तक सुरक्षित करने की प्रक्रिया अपनाई जा रही है। कोठी के पीछे के भाग में स्थित पुराने कूप का भी जीर्णोद्धार किया जाना है। साथ ही बाबू का आलीशान बैठका और उनको कभी हवा देने वाला पुराने पंखे को भी संजोया जा रहा है।